क्‍या चैनल गंभीर घड़ी में ऐसे विज्ञापनों का रेला थाम नहीं सकते थे?

'छोटा-सा ब्रेक' : जब देश शोक में डूबा हो, टीवी चैनल हर दामिनी पर हुए दमन के खिलाफ मोमबत्तियों की रोशनी और बेहतर न्याय पर चर्चाएं हम तक पहुंचा रहे हों — क्या उस गंभीर घड़ी में उन विज्ञापनों का रेला वहां थोड़ी देर के लिए थम नहीं सकता, जिनमें औरत को सामान बेचने के लिए जिंस की तरह इस्तेमाल किया गया हो? ऐसे शोक की घड़ी में समूचा देश, एक समान जज्बे के साथ, रोज तो नहीं डूबा होता!!

Divya Gupta Jain Mujhe bhi aisa hi laga.

Asha Jassal आपका कार्यक्रम देख रही थी तो इसी बात का मलाल मुझे हो रहा था ………

Dhirendra Pandey क्या आज न्यूज़ चैनल विज्ञापन के बिना प्रसारण नही कर सकते थे कितना घृणास्पद लग रहा है "" यू आर माई पम्पकिन "" ||

Meenu Jain desh dooba huaa hai shok mein , news channels nahin ……..dhikkar hai !

Anand Kumar Dwivedi विरोध केवल शब्दों से ही चरित्र से नहीं .. फिर नतीजा यही

Mutha Rakesh ye baat aap keh sakte hai media ke pramukh stambh hote hue bhi aapka akhbaar kjansatta kabhi bhi vigyapano v ochi patrakarita kaa shikar nahi hua aap desh ke ek matra sampadak hai jo kala ke kshtra ko pramukhta se bahut sara sathan dete hai i m proud on u sir on yr frdhship

Dharm Meena वो सब को जगा कर
खुद चिरनिद्रा मेँ सो गई ॥

Tejendra Sharma Om jee… aap se adhik vigyapan ka mehtava kaun samajh sakta hai. Business sense is not governed by emotions. Aapkee in bhaawnaon ka kroor business world mein koyee arth nahin hai…

डॉ. रश्मि !!!baazarvaad!!!

Manoj Bharti Gupta break ko jehl saktye lekin break beech me jo deodrent (axe skore) ki advertiement jo message de rahi uska kya hal hai !!

Amit Ranjan Chitranshi सारे शापिंग माल खुले हैं, दबंग-2 का शो हाउसफुल जा रहा ….

Nirmal Kumar सर यहाँ तो बलात्कार की घटना पर चर्चा हो रही है, अपने देश के चैनल वाले तो ऐसे हैं कि अगर उन्हें बलात्कार होते हुए कोई फूटेज मिले तो मदद के हाथ बढाने के बदले ब्रेकिंग न्यूज़ बनाकर जबरदस्त टी आर पी बटोरने के चक्कर में ये भी दिखा दे …

Zia Khan विराट कोहली का ऐड देखा होगा …लड़की पटाने के तरीको वाला …ये हमारे रोल मोडल जो परोस रहे है उस पर भी निगाह रखिये ….एक पिज्जा खाने वाली लड़की केह रही होती है के मेने 'वो' वाली फिल्म भी देखी है …ओर एक्स इफ्फेक्ट के तो क्या कहने …….क्या ये ही प्रोग्रसिव सोच है ..

वरिष्‍ठ पत्रकार ओम थानवी के फेसबुक वॉल से साभार.

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