खबरों से बौखलाई बहुगुणा सरकार ने अमर उजाला का विज्ञापन रोका

 

सच कहा गया है कि सत्‍ता किसी की हो उसका चरित्र नहीं बदलता है. विचारधारा कोई हो सत्‍ता एक ही चरित्र और चाल से संचालित होता है. इसे सच साबित कर रही उत्‍तराखंड की बहुगुणा सरकार. अब सत्‍ता में अपनी स्‍वस्‍थ आलोचना बर्दाश्‍त करने करने की भी ताकत नहीं रह गई है. जिस तरह से बीते सालों में मीडिया का चरित्र बदला उतना ही चरित्र सत्‍ता का बदल चुका है. अमर उजाला की खबरों से खार खाए बहुगुणा सरकार ने इस अखबार का विज्ञापन बंद कर के इसे झुकाने की कोशिश की है. साथ ही एक अघोषित चेतावनी भी कि अगर सरकार को आईना दिखाओगे तो हम तुम्‍हारी आर्थिक कमर तोड़ देंगे. 
 
जाहिर है कि जब आप आम जनता से सरोकार रखेंगे तो सत्‍ता को आईना दिखाती हुई खबरें प्रकाशित होंगी ही. अब अखबार सत्‍ता के खिलाफ जाता है तो सरकार उसका विज्ञापन रोककर औकात दिखाने की कोशिश करेगी और अगर जनता के खिलाफ जाता है तो विश्‍वास का संकट पैदा होने का खतरा होगा. दोनों ही स्थितियां किसी भी अखबार के लिए मुफीद नहीं होती है. उत्‍तराखंड में भी अमर उजाला इन्‍हीं दोनों के बीच की स्थिति से चलने की कोशिश कर रहा है. पर यह कोशिश भी सरकार को रास नहीं आ रही है. 
 
इसके पहले भाजपा सरकार भी अमर उजाला की खबरों से खार खाकर विज्ञापन रोक चुका है. यानी सत्‍ता किसी की भी चरित्र एक सा ही रहता है. इस बार बहुगुणा सरकार ने अमर उजाला का विज्ञापन रोककर उसे ब्‍लैकमेल करने तथा दबाव बनाने की रणनीति तैयार की है. शुक्रवार को सरकार ने तमाम छोटे बड़े अखबारों को एक पेज का विज्ञापन दिया परन्‍तु यह विज्ञापन अमर उजाला को नहीं दिया गया. विज्ञापन रोककर सरकार राज्‍य के अन्‍य अखबारों की तरह अपना पिछलग्‍गू बनाना चाहती है. अब यह देखना है कि प्रबंधन तानाशाही फैसले लेने वाले सरकार के सामने झुक जाता है या फिर सीना ताने जनता की आवाज को उसी तेवर से उठाता है, जो पहचान उत्‍तराखंड में अमर उजाला का रहा है. 

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