खबर छपने से नाराज सपा जिलाध्‍यक्ष बलराम यादव ने दी पत्रकारों को धमकी

अभी यूपी में सरकार बने एक साल भी नहीं बीता कि सपाई अपने खोल से बाहर निकल कर सड़क पर गुंडई करने लगे हैं. आम लोगों के साथ अब पत्रकारों को भी देख लेने की धमकी दी जाने लगी है. मामला चंदौली जिले के सैयदराजा का है. बताया जा रहा है कि 29 दिसम्‍बर 2012 को चंदौली के सपा जिलाध्‍यक्ष बलराम यादव एक सफारी गाड़ी यूजीजेड -4809 से सैफई महोत्‍सव से वापस लौटे थे. सैयदराजा बाजार में उनकी गाड़ी एक ट्रक, जिसका नम्‍बर यूपी 22 – 3635 था, से गलत पास लेने के चक्‍कर में पीछे से थोड़ी टकरा गई.

प्रत्‍यक्षर्दियों के अनुसार इस टक्‍कर में पूरी गलती सफारी चालक की थी. इसके बावजूद सफारी में बैठे जिलाध्‍यक्ष के गुर्गे उतरे और ट्रक को रोककर उसके चालक की जमकर पिटाई की. सड़क पर ही उसे बुरी तरह से मारापीटा और गंभीर रूप से घायल कर दिया. इसके बाद सत्‍ता की हनक दिखाने के लिए थाने में फोन कर दिया. इस समय सपा के रहमोकरम चल रहा पुलिस महकमा बिना देर किए मौके पर पहुंच गया तथा मय ट्रक चालक को थाने पकड़ कर लाए. यहां भी चालक को थोड़ा बहुत पीटा गया. हालांकि बाद में पुलिस उस समय सांप-छुछुंदर वाली स्थिति में आ गई, जब पता चला कि यह ट्रक रामपुर वाले मंत्री जी के किसी नजदीकी का है.

असली बात तक हुई जब कई अखबारों ने इस घटना को प्रकाशित किया. बताया जा रहा है कि ज्‍यादातर अखबारों ने खबर लिखी. अब ये अलग बात है कि अमर उजाला ने उल्‍टी खबर छापते हुए जिलाध्‍यक्ष को ही ट्रक की चपेट में आने से बाल बाल बचा दिया. यहां अमर उजाला एवं हिंदुस्‍तान की पत्रकारिता ऐसे ही चलती है. खैर. अन्‍य अखबारों ने भी बच बचाकर खबर लिखी, क्‍योंकि मामला सपा के जिलाध्‍यक्ष का था, पर जनसंदेश टाइम्‍स, समाचार ज्‍योति व जागरण ने खबरें थोड़ी बड़ी और सही लिख दी.

बस क्‍या था अगले दिन जिलाध्‍यक्ष सैयदराजा में स्थित जनसंदेश प्रतिनिधि बशर खान के कार्यालय पहुंचे. वहां अन्‍य अखबारों के प्रतिनिधि बैठे हुए थे. लगभग सभी को धमकाते हुए कहा कि बहुत खबर छाप रहे हो तुम लोग भविष्‍य में भुगतना पड़ेगा. इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. बताया जा रहा है कि धमकी देने बाद बलराम यादव अपने पैड पर एक पत्र लिखकर जनसंदेश टाइम्‍स के स्‍थानीय प्रतिनिधि को हटाने का आदेश-आवेदन-निवेदन, जो भी कह लें, वाराणसी कार्यालय भेजा है.

जिलाध्‍यक्ष के धमकी से तमाम पत्रकारों में नाराजगी है, लेकिन यहां चम्‍मचागिरी करने वाले पत्रकारों के चलते इस तरह की धमकियों का कभी विरोध नहीं हो पाता है. इसलिए अक्‍सर लोग पत्रकारों को धमकाते हैं और निकल जाते हैं. चम्‍मचागिरी करने वाले पत्रकारों को डर रहता है कि उनके कई गलत काम नहीं हो पाएंगे और विज्ञापन भी नहीं मिलेगा. बार्डर होने के चलते ज्‍यादातर पत्रकार अवैध वसूलियों में लगे हुए हैं. जिसके चलते वे अपने साथ घटने वाली घटनाओं का विरोध नहीं कर पाते हैं और एकजुट नहीं हो पाते हैं. जल्‍द ही वसूली में लगे पत्रकारों की पोल खोले जाने की योजना भी तैयार की जा रही है. साथ ही बार्डर से कितने सपाइयों के सौजन्‍य से ट्रकें पास हो रही हैं इसका भी खुलासा किया जाएगा.

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