गैंगरेप पीडिता का नाम उजागर करने पर हो सकती है दो साल की सजा

नई दिल्‍ली। दिल्‍ली गैंगरेप केस की पीडिता के लिए आज सारा देश उसके काल्‍पनिक नाम “दामिनी” के नाम से इंसाफ मांग रहा है। उसे यह नाम मीडिया ने दिया, क्‍योंकि कानून के मुताबिक, पीडिता का असली नाम उजागर नहीं किया जा सकता था। हर इंसान देश को हिला देने वाले इस गैंगरेप की पीडिता के नाम से अनभिज्ञ है। ऐसे में केंद्रीय मानव संसाधन राज्‍यमंत्री शशि थरूर ने उसका नाम सार्वजनिक करने की मांग कर दी। इसके बाद अब रेप पीडि़ता की पहचान उजागर किए जाने संबंधी मुद्दे पर बहस छिड़ गई है। इस बारे में निजी तौर पर किसी की जो भी राय हो, पर कानून इसकी इजाजत नहीं देता।

बलात्कार की शिकार लड़की या महिला का नाम प्रचारित-प्रकाशित करने और उसके नाम को ज्ञात बनाने से संबंधित कोई अन्य मामला आईपीसी की धारा 228 ए के तहत अपराध है। आईपीसी की धारा 376, 376ए, 376बी, 376सी, 376डी, 376जी के तहत केस की पीडिता का नाम प्रिंट या पब्लिश करने पर दो साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है। कानून के तहत बलात्‍कार पीडि़ता के निवास, परिजनों, दोस्‍तों, विश्‍वविद्यालय या उससे जुड़े अन्‍य विवरण को भी उजागर नहीं किया जा सकता। ऐसे में बलात्‍कार पीडि़ता का नाम सार्वजनिक करने के लिए कानून में बदलाव की जरूरत है।

वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता अशोक अग्रवाल कहते हैं कि रेप की शिकार पीडिता का नाम, उसकी पहचान और उसके परिजनों या दोस्‍तों से जुडी कोई भी जानकारी उजागर करना कानून के तहत निषेध है। अगर कोई ऐसा करता है तो वह आईपीसी की धारा 228ए के तहत आरोपित होगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार इस संदर्भ में व्‍यवस्‍था दी हैं और समय-समय पर इस बारे में अपनी राय भी जाहिर की है। हालांकि अशोक का कहना है कि महिलाओं को प्रोटेक्‍शन के बावजूद खुद आगे आना चाहिए, ताकि वे अपने हक की लडाई लड सकें। इससे उन्‍हें कुछ समय के लिए परेशानी तो होगी, लेकिन वह न्‍याय पा सकेंगी और समाज में भी खुद को साबित कर सकेंगी।

भारतीय प्रेस परिषद द्वारा जारी पत्रकारिता आचरण मानदंडों (2010 संस्‍करण) के मुताबिक भी ऐसा नहीं किया जा सकता। भारतीय प्रेस परिषद ने पत्रकारिता के आचरण के लिए मानदंड जारी किया है। इन मानदंडों के मुताबिक, जब एक पत्रकार रेप संबंधी अपराध की रिपोर्टिंग करता है, तो वह पीडि़त का व्‍यक्तिगत चरित्र, उसकी निजता, नाम, फोटो और पहचान बताने वाले तथ्‍यों को प्रकाशित नहीं कर सकता। अगर पत्रकार ऐसा करता है तो वह इन मानदंडों का उल्‍लंघन करता माना जाएगा।

इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने भी व्‍यवस्‍था दी है। State of Karnataka v. Puttaraja (2004)1 SCC 47 केस में शीर्ष अदालत ने उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्णय के प्रकाशन में भी बलात्कार के शिकार की पहचान उजागर करने के खिलाफ चेतावनी दी थी। केरल की जिस लड़की की फोटो फेसबुक पर दिल्ली गैंगरेप पीड़िता के रूप में साझा की जा रही है उसके पिता ने साइबर सेल में मामला दर्ज करवाया है। केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने कहा था कि सोशल मीडिया पर जिस लड़की की फोटो बलात्कार पीड़ित के रूप में पोस्ट की जा रही है वह दरअसल केरल की एक इंजीनियरिंग छात्रा है। थरूर ने ट्वीट किया, 'पीड़ित के बारे में कई तरह की गलत जानकारियां साझा की जा रही हैं। जो तस्वीर फेसबुक पर पोस्ट की गई है वह केरल की एक इंजीनियरिंग छात्रा की है। (भास्‍कर)

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