गैस एजेंसी के कर्मचारियों ने दी पत्रकार राजीव को जान से मारने की धमकी, मामला दर्ज

यूपी में पत्रकारों के साथ लगातार बदतमीजी, धमकी देने तथा मारपीट करने की घटनाएं आम हो गई हैं. यूपी के चंदौली जिले के मुगलसराय से खबर है कि दी रेलवे मेन्‍स कोऑपरेटिव इंडेन गैस एजेंसी में केवाईसी फार्म जमा करने गए पत्रकार राजीव गुप्‍ता के साथ एजेंसीकर्मियों ने न सिर्फ अभद्रता एवं गाली ग्‍लौज की बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी. जिसके बाद भयभीत पत्रकार ने कोतवाली में आवेदन देकर जानमाल के रक्षा की गुहार लगाई. पुलिस ने एनसीआर में मामला दर्ज कर लिया है.

जानकारी के अनुसार उक्‍त गैस एजेंसी में आम उपभोक्‍ताओं के साथ पहले से ही अभद्रता करने की शिकायतें आती रही हैं. रेलवे परिसर में स्थित इस कोआपरेटिव सोसाइटी के सदस्‍य ज्‍यादातर एक ही परिवार के लोग हैं, लिहाजा सारी गड़बडि़यों के बाद भी तमाम चीजें बाहर नहीं आ पाती हैं. स्‍थानीय दबंग होने के चलते यहां के कर्मचारी भी आम लोगों से आए दिन अभद्रता भी करते रहते हैं. इसी क्रम में आज राजीव गुप्‍ता इनकी अभद्रता के शिकार बन गए.

राजीव गुरुवार की दोपहर लगभग तीन बजे केवाईसी फार्म जमा करने कोऑपरेटिव इंडेन गैस एजेंसी गए थे. जब उन्‍होंने वहां पर फार्म जमा करने का निवेदन किया तो वहां मौजूद कर्मचारी संजय राय ने फार्म लेने से इनकार कर दिया. राजीव ने जब नियमों का हवाला दिया तथा कहां कि नियमानुसार शाम पांच बजे तक फार्म जमा होना चाहिए फिर आप लोग फार्म क्‍यों नहीं जमा कर रहे हैं. इतना सुनते ही संजय राय व जितेंद्र सिंह राजीव से उलझ गए. संजय राय खुद को भाजपा का नेता भी बताता है, ने राजीव को दलाल, फर्जी पत्रकार कहते हुए मां-बहन की गालियां देनी शुरू कर दी. राजीव ने जब विरोध किया तो उनको जान से मारने की धमकी भी दी गई.

इतना से ही संजय राय का मन नहीं भरा तो उसने कहा कि यह पब्लिक प्‍लेस है नहीं तो तुम्‍हे आज तुम्‍हारी औकात दिखा देता. इसके बाद धमकी देते हुए कहा कि साले यहां से भाग जाओ नहीं तो जान से जाओगे. इस घटना से अपमानित एवं पीडि़त राजीव ने इसकी सूचना तत्‍काल मंडल रेल प्रबंधक अनूप कुमार से मिलकर दी. उन्‍होंने इंडेन गैस सर्विसेज के कस्‍मर केयर नम्‍बर पर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद इस घटना से हतप्रभ राजीव ने कोतवाली में तहरीर दी, जिसके बार पुलिस ने एनसीआर दर्ज कर लिया. पर माना जा रहा है कि आरोपी दबंग तथा पहुंच वाले हैं, जिसके चलते पुलिस शायद ही इनके खिलाफ कोई कड़ा एक्‍शन ले.

वैसे भी कोआपरेटिव पर यह कोई पहली घटना नहीं है. इसके पहले भी उपभोक्‍ताओं से बदतमीजी, गाली-ग्‍लौज तथा मारपीट होती रही है. पर कर्मचारी इन लोगों की शिकायत करने की बजाय वहां से हट जाने में ही अपनी भलाई समझता है, जिसके चलते इन लोगों का मन और अधिक बढ़ गया है. आरोप यह भी है कि यहां कोई भी काम नियम से नहीं होता. प्रबंधन से जुड़े लोगों की जो मर्जी होती है वही करते हैं. अगर आप अपना काम कराने जाएं तो यहां काम होना संभव नहीं है जब तक कि किसी की सिफारिश ना हो.

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