जनसंदेश टाइम्‍स के एडिटर एचआर को मालिक की विज्ञप्ति से छेड़छाड़ महंगी पड़ी

जनसंदेश टाइम्‍स, बनारस से खबर है कि इस अखबार को प्रकाशित करने वाली मुख्‍य कंपनी की एक विज्ञप्ति में छेड़छाड़ करवाना एचआर एडिटर को महंगी पड़ गयी. कंपनी प्रबंधन ने इस बदलाव पर नोटिस जारी कर संपादक से जानकारी मांगी. संपादक ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें एडिटर एचआर विजय विनीत का नाम सामने आया. सूत्रों का कहना है कि अपनी गलती के लिए विजय विनीत ने भी माफी मांगी.

जानकारी के अनुसार बीते 21 को बनारस में जनसंदेश अखबार का प्रकाशन करने वाले अनुराग कुशवाहा की मूल कंपनी संरचना इंफ्रा प्रोजेक्‍ट प्राइवेट लिमिटेड ने बनारस में पहाडि़या बलुआ रोड पर अपना एक प्रोजेक्‍ट लांच किया. इससे जुड़ी खबर कंपनी की तरफ से मेल करके अखबार को भी भेजी गई. मामला मालिक से जुड़ा हुआ था, लिहाजा अखबार ने प्रमुखता से इस खबर को अपने पहले पेज का लीड बनाया. खबर ठीक छपी. पर खबर छपने के बाद ही बवाल शुरू हो गया.

कंपनी की तरफ से भेजी गई खबर में ''मॉडल फ्लैट की आंतरिक साज सज्‍जा संरचना की वरिष्‍ठ इंटीरियर डिजाइनर दीपशिखा सिंह ने की है और उनके इस वर्क की सबने सराहना की'' जैसी अतिरिक्‍त लाइनें जोड़ दी गई थी, जिस पर सरंचना की तरफ से नोटिस जारी करके 48 घंटे में जवाब देने को कहा गया. जब इसकी जांच की गई तो पता चला कि एडिटर एचआर विजय विनीत के आदेश के बाद यह लाइन जोड़ी गई है. चूंकि दीपशिखा सिंह विजय विनीत की पुत्री हैं और कुछ समय पहले ही संरचना में उनकी नौकरी लगी है, लिहाजा अपनी पुत्री को माइलेज दिलाने के लिए विजय विनीत ने निर्देश देकर दीपशिखा सिंह को वरिष्‍ठ इंटीरियर डिजाइर लिखवा दिया. गलती यह भी कर दी कि दीपशिखा सिंह का नाम अनुराग कुशवाहा से भी उपर लिख दिया गया.

अमूमन अखबार के किसी मामले में हस्‍तक्षेप नहीं करने वाले अनुराग कुशवाहा अपने खबर में हुए हस्‍तक्षेप के बाद नाराज हो गए. इसके बाद उनकी कंपनी की तरफ से नोटिस जारी करके मामले की जानकारी मांगी गई. जांच के बाद सबने अपने अपने कवर नोट के साथ जानकादी दी कि यह बदलाव विजय विनीत के निर्देशानुसार किया गया है. इसके  बाद संपादक ने भी सभी तथ्‍यों से संरचना के अधिकारियों के नोटिस का जवाब दिया.  वैसे अपुष्‍ट सूत्रों से यह भी खबर आ रही है कि पहले से ही विवादों से जूझ रहे विजय विनीत ने भी माफी मांग कर मामले को रफा दफा किया.

मूल रूप से रिपोर्टर का दायित्‍व संभालने वाले विजय विनीत को पहले ही एचआर में भेजकर किनारे कर दिया गया है. कंटेंट और पहले पेज में कोई सुधार नहीं दिखने के बाद प्रबंधन ने प्रमोशन के बहाने विजय विनीत को लिखा-पढ़ी से हटाकर पहले ही एचआर में भेज दिया है. संपादकीय में अब उनका हस्‍तक्षेप भी लगभग खतम कर दिया गया है. माना जा रहा है कि प्रबंधन ने लगातार मिल रही शिकायतों के बाद उन्‍हें किनारे किया था. अब एचआर में आने के बाद भी उन पर आरोप लग रहे हैं कि मिर्जापुर और सोनभद्र में नियुक्तियां डिलिंग होने के बाद की गई हैं. माना जा रहा है कि अगर स्थिति नहीं सुधरी तो देर सबेर उन्‍हें एचआर से भी किनारे लगाया जा सकता है.

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