जनसंदेश टाइम्‍स के कर्मियों को पुलिस ने घंटों बैठाया थाने में

जनसंदेश टाइम्‍स, बनारस से खबर है कि एक व्‍यक्ति को बिना वजह पीट दिए जाने के चलते पुलिस अखबार को दो कर्मचारियों को पकड़कर थाने ले गई तथा घंटों बैठाए रखा. बाद में समझौता हो गया, जिसके बाद पुलिस ने दोनों को छोड़ दिया. खबर के अनुसार जनसंदेश टाइम्‍स, बनारस के कार्यालय में एक बैंक भी शाखा भी खुली है. इसी बैंक में पास में रहने वाले डा. दुर्गाचरण के भाई, जो पैरों से कमजोर हैं, अपने स्‍कूटर से आए तथा पास में ही उसे खड़ी करके बैंक जाने लगे.

वे धीरे-धीरे पांच छह सीढ़ी चढ़े होंगे कि अखबार के गार्ड ने उनसे स्‍कूटर वहां से हटाने को कहा. इस पर उन्‍होंने अपनी परेशानी का हवाला देते हुए कहा कि बस दस मिनट में वे बैंक से काम करके चले जाएंगे. इतने में गार्ड अड़ गया तथा उनसे बदतमीजी करने लगा. इस दौरान अखबार के एक दो कर्मचारी भी चले आए. इसके बाद विवाद बढ़ गया तथा अखबार के कर्मचारी उन पर टूट पड़े उनके साथ जमकर मारपीट की गई. उनकी पत्‍नी बचाने आई तो उनके साथ भी बदतमीजी की गई.

इस दौरान वहां पर भीड़ लग गई. किसी ने पुलिस को सूचना दे दी. मौके पर पहुंची पुलिस मारपीट करने वाले अखबार के कर्मचारियों को पकड़कर थाने ले गई. तीन से चार घंटे तक पुलिस सभी को थाने में बैठाए रखा. बाद में अखबार के लोग अपने सारे घोड़े दौड़ाने के बाद थकहार गए तो डाक्‍टर के पास पहुंचे. बताया जा रहा है कि डाक्‍टर के भाई ने बाद में आसपास के लोगों के समझाने तथा पुलिस द्वारा भी पचड़े में न पड़ने की सलाह के बाद समझौता कर लिए.

हालांकि इस घटना से अखबार की छवि को भी धक्‍का लगा. नाम ना छापने की शर्त पर पास में रहने वाले एक व्‍यक्ति ने बताया कि अखबार के लोग खुद को तीसमार खां समझते हैं. अपने वाहन सड़क पर ही खड़ा कर देते हैं. सामने पार्किंग के लिए तनिक भी जगह नहीं है. बिल्डिंग के बेसमेंट में पार्किंग है, लिहाजा बहुत कम लोग बेसमेंट में अपनी गाडि़यां पार्क करते हैं, जिसके चलते यहां हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है. ये घटना भी इसी जाम के चलते हुई क्‍योंकि हर कोई पार्किंग के भीतर वाहन नहीं खड़ा कर सकता. इस संदर्भ में अखबार में कार्यरत विजय विनीत से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, परन्‍तु उन्‍होंने एसएमएस का कोई जवाब नहीं दिया.

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