जनसंदेश टाइम्‍स, गोरखपुर में सैलरी के लाले, मुश्किल में पत्रकार

जनसंदेश टाइम्स, गोरखपुर में पिछले दो महीने से कई वरिष्‍ठों को तनख्वाह नहीं मिली है। लगभग तीन चौथाई कर्मचारी सैलरी न मिलने से परेशान हैं तथा सैलरी मिलते ही अखबार को अलविदा कहने की तैयारी कर रहे हैं। शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी के नेतृत्व मे गोरखपुर से शुरू यह अख़बार अपने प्रारंभ से ही चर्चा में है। दरअसल प्रबंधन शैलेन्द्र मणि के बड़ी-बड़ी बातों को उनकी प्रबंधन क्षमता मान बैठा और शुरुआत से यह अख़बार बिना किसी ठोस योजना के जैसे तैसे चलता रहा।

अख़बार की संपादकीय विभाग में हालाँकि बहुत से टैलेंटेड लोग हैं, परन्तु समय से वेतन न मिलने और अपनी कम पाठक संख्या के कारण इस अख़बार का भविष्य हमेशा प्रश्नचिन्ह के दायरे में रहता है। इस समय अख़बार के तीन चौथाई कर्मचारियों के जनवरी माह के वेतन तक नहीं मिले है यानि की दो माह का वेतन अभी प्रबंधन को देना है और तीसरा महीना चल रहा है। आये दिन लोग इस्तीफा दे रहे हैं।

कुछ दिन पूर्व स्वाति श्रीवास्तव ने इस्तीफा दिया तो उन्‍हें किसी तरह मनाया गया, फिर प्रभात तिवारी छुट्टी पर चले गए और वो अब वापस आने को तैयार भी नहीं हैं। सुनने में आया है कि जिन कर्मचारियों के वेतन रोके गए हैं वो अच्छी सैलरी पाने वाले लोग हैं। पहले ये लोग प्रबंधन को धमका लेते थे, परन्तु समय के साथ ये लोग भी अब अपनी नौकरी बचाने और हाई-लाईट होने से बचने के लिए अपना मुह बंद कर चुके हैं।

शैलेन्द्र मणि भी कर्मचारियों को किसी तरह बेवकूफ बनाकर शांत करने में लगे हैं। वे अपनी कुर्सी बचाए रखना चाहते हैं ताकि संपादक और यूनिट हेड होने का लाभ  बरकरार रखा जा सके। इस संदर्भ में शैलेंद्र मणि से बात करने के लिए फोन किया गया परन्‍तु उन्‍होंने फोन पिक नहीं किया। 

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