जी ने कहा – उनके संपादकों की गिरफ्तारी गैरकानूनी तथा किसी और मकसद से की गई है

 

जी न्यूज ने बुधवार को मांग की है कि कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल द्वारा दाखिल जबरन वसूली के मामले में गिरफ्तार किये गये उसके दो संपादकों को तत्काल रिहा किया जाए. संस्थान ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई ‘गैरकानूनी’ तथा ‘किसी और मकसद’ से की गयी है. कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में जिंदल पावर एंड स्टील लिमिटेड पर आरोप लगाने वाली खबरों को प्रसारित नहीं करने के लिए कंपनी से 100 करोड़ रुपये मांगने की कोशिश करने के आरोपों का खंडन करते हुए जी न्यूज के सीईओ आलोक अग्रवाल ने आरोप लगाया कि संप्रग-2 सरकार अपनी ‘गलतियों’ के चलते मीडिया को ‘डरा धमका रही’ है.
 
जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी और जी बिजनेस के संपादक समीर अहलूवालिया को जिंदल की कंपनी की ओर से अक्तूबर में दाखिल शिकायत के आधार पर मंगलवार की रात गिरफ्तार कर लिया गया था. अग्रवाल और जी समूह के वकील आर के हांडू ने गिरफ्तारी और इसके समय पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि जानबूझकर छुट्टी वाले दिन से पहले गिरफ्तारियां की गयीं ताकि नियमित जमानत नहीं मिल सके. हांडू ने कहा कि गिरफ्तारी उस धारा के तहत की गयी है जो गैर जमानती अपराध पर लागू होती है ना कि जमानती के लिए. हांडू ने कहा, ‘‘गिरफ्तारी की क्या जरूरत थी. यह किसी और मकसद से किया गया है.’’
 
अग्रवाल ने दावा किया कि कांग्रेस सांसद ने पहले जी के संपादकों को रित के तौर पर पैसा देने की और बाद में यह पैसा कंपनी को देने की पेशकश की थी.
उन्होंने आरोप लगाया कि जिंदल ने जी के कई वरिष्ठ अधिकारियों को न केवल सीधे बल्कि कई अन्य लोगों के जरिये प्रभावित करने का भी प्रयास किया जिनमें उनके भाई पृथ्वी जिंदल, रिश्तेदार सीताराम जिंदल और दिग्विजय सिंह, रमन सिंह तथा अजरुन मुंडा जैसे नेता भी हैं. अग्रवाल का यह भी दावा है कि इन लोगों ने जिंदल के खिलाफ खबरों को प्रसारित नहीं करने का अनुरोध भी किया था.
 
उन्होंने कहा कि जिंदल और जी के अधिकारियों की छह मुलाकातों में कुल छह घंटे की बातचीत हुई और यदि कोई इस बातचीत का केवल पांच प्रतिशत निकालता है तो इसे किसी भी तरह से तोड़ा मरोड़ा जा सकता है. जिंदल ने बुधवार को इस घटनाक्रम पर अपनी ओर से कोई भी टिप्पणी करने से मना करते हुए कहा, ‘‘मामला अदालत में विचाराधीन है. दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है. मैं इस पर टिप्पणी नहीं करुंगा.’’
 
हालांकि जब जिंदल से उनके, उनकी कंपनी के अधिकारियों और जी के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत का केवल 14 मिनट का अंश जारी करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला ने इसकी पड़ताल की है और सबकुछ सार्वजनिक किया जाएगा. क्या जिंदल की कंपनी की तरफ से स्टिंग आपरेशन का मकसद कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में जिंदल पावर की कथित संलिप्तता से ध्यान हटाना था, इस पर जिंदल ने तल्ख लहजे में कहा, ‘‘ठीक है, आप अपना ध्यान नहीं भटकाएं.’’
 
गिरफ्तारी के समय के सवाल पर हांडू ने कहा कि प्राथमिकी जहां दो अक्तूबर को दर्ज की गयी थी वहीं गिरफ्तारी कल ऐसे वक्त की गयी जब दोनों संपादक जांच में सहयोग दे रहे हैं. उन्होंने दावा किया, ‘‘पुलिस का कहना है कि उनके पास फोरेंसिक रिपोर्ट है. तो वे सीधे आरोपपत्र क्यों नहीं दाखिल करते. गिरफ्तारी की क्या जरूरत है? सामान्य मामले में उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाता.’’ अग्रवाल ने कहा, ‘‘हमने बातचीत से कभी इनकार नहीं किया.’’ उन्होंने कहा कि जब दोनों पुलिस की जांच में शुरू से सहयोग दे रहे हैं तो गिरफ्तारी क्यों की गयी. (सहारा)

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