टाइम्‍स ग्रुप को पछाड़कर जी बना देश का सबसे बड़ा मीडिया समूह

 

मुंबई : हफ्ते भर से गलत वजहों से सुर्खियों में रहे मीडिया समूह ज़ी के पास खुश होने की वजह भी आ गई है। अरसे से अव्वल नंबर पर काबिज टाइम्स समूह को पछाड़कर अब ज़ी देश का सबसे बड़ा मीडिया समूह बन गया है। इतना ही नहीं अगले वित्त वर्ष के आखिर तक स्टार इंडिया भी ज़ी के साथ इस सिंहासन पर बैठ सकता है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने देश के सबसे बड़े मीडिया समूहों की जो फेहरिस्त जारी की है, उसमें नेटवर्क 18 और सोनी तथा भाषायी अखबारों की जबरदस्त तरक्की भी अचरज में डालने वाली है।
 
सूची बनाना काफी मुश्किल था क्योंकि 80,000 करोड़ रुपये के भारतीय मीडिया और मनोरंजन (एमऐंडई) कारोबार में शामिल कई दिगगज कंपनियां सूचीबद्घ नहीं हैं। लेकिन कई स्रोतों और कंपनियों के भीतर से मिली जानकारी के आधार पर यह सूची तैयार की गई है। इसमें मीडिया पार्टनर्स एशिया के अनुमान, क्रिसिल की क्रेडिट रेटिंग और कैपिटालाइन की मदद मिली है।
 
आंकड़े पूरे नहीं हैं और एबीपी जैसे कुछ समूह इसमें नहीं हैं। कई जगह आंशिक आंकड़े इस्तेमाल किए गए हैं, मसलन रिलायंस के मीडिया कारोबार से केवल 2 कंपनियां सूचीबद्ध हैं। सभी कंपनियों के परिचालन लाभ के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए उनका इस्तेमाल नहीं किया गया। फिर भी कीमत के लिहाज से आधे मीडिया और मनोरंज उद्योग को समेटे यह सूची प्रमुख रुझानों का अच्छा संकेत देती है। इसमें 3 खास रुझान पता चलते हैं:
 
पहला रुझान: टेलीविजन का बढ़ता दबदबा। मीडिया-मनोरंजन कारोबार का आधा हिस्सा टीवी के पास है और इसका असर दिख रहा है। स्टार जैसे ही ईएसपीएन-स्टार स्पोर्टस का अधिग्रहण पूरा करेगा, 6,000 करोड़ रुपये की कमाई के साथ उसे जी के संग नंबर 1 की कुर्सी साझा करनी चाहिए। टीवी में टीवी सिग्नल वितरित करने वाली कंपनियों (टाटा स्काई और डिश टीवी) को भी शामिल किया गया है। पांच शीर्ष कंपनियों में टाइम्स अकेली प्रिंट मीडिया कंपनी है। 
 
दूसरा रुझान: भारती एयरटेल अकेली दूरसंचार कंपनी है जो मीडिया कंपनियों को कड़ी टक्कर दे पाई है। बाकी दूरसंचार कंपनियां मीडिया क्षेत्र में दखल नहीं दे पाईं और उन्होंने अलग हटकर मूल्य वद्र्घित सेवाएं ही उपलब्ध कराई हैं। हालांकि कुछ ऐसे बड़े समूह हैं जिनके पोर्टफोलियो में दूरसंचार और मीडिया दोनों ही है जैसे कि टाटा और रिलायंस। मगर इनमें दूरसंचार का दबदबा अधिक और मीडिया का कम रहा है। मुकेश अंबानी ने नेटवर्क 18 और इनाडु के अधिग्रहण में पूंजी लगाई थी जिससे नेटवर्क 18 इस सूची में पहले 10 में शामिल हो गया। एवी बिड़ला समूह ने इंडिया टुडे समूह में अल्पांश हिस्सेदारी खरीदी थी।
 
तीसरा रुझान: भाषायी अखबारों का विकास। पिछले साल टीवी में कदम रखने वाले प्रमुख हिंदी अखबारों और मलयाला मनोरमा के आंकड़े देखिए। मंदी से बेअसर इनका प्रदर्शन लाजवाब है। (बीएस)

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