पत्रकारों के भौकाल से कुछ लोग इस कदर प्रभावित हो जाते है कि उसी भौकाल के लिए पत्रकार बनने की जद्दोजहद में जुट जाते है। ऐसे लोगों का पत्रकारिता से कोई वास्ता नही होता। उनके लिए ‘‘पत्रकार’’ शब्द सिर्फ स्वार्थ सिद्धि का पर्याय नजर आता है। उसी भौकाल के लिए ऐसे लोग तमाम अखबारों या न्यूज चैनलों में हर तरह के जुगाड़ लगाकर इन्ट्री लेना चाहते हैं। लेकिन गाजीपुर में एक शख्स ने नए तरिके से अपने नाम के साथ ‘‘पत्रकार’’ शब्द जोड़ने की कवायद शुरू की है। गाजीपुर के सुग्गन सिंह यादव ने बाकायदा जनता दर्शन में जिलाधिकारी महोदय को लिखित प्रार्थना पत्र देकर खुद को पत्रकार बनाने की गुहार लगाई है। जिसपर डीएम साहब ने जिला सूचना अधिकारी को कार्यवाही हेतु निर्देशित भी किया, किन्तु सरकारी कार्यालयों के परापम्परागत तरीकों के चलते पिछले अक्टूबर से इनका आवेदन निस्तारित होने की राह देख रहा है। आज भी ये महाशय आला अधिकारियों और सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
सुग्गन ने बताया कि ‘‘थाना हो या अस्पताल या फिर कचहरी, हर जगह पत्रकारों की सुनवाई प्राथमिकता पर होती है। मेरे भी कई काम कचहरी में फंसे हैं, थाने का दरोगा फरियाद करने पर भगा देता है, दुर्घटना होने पर अस्पताल से मेडिकल बनवाना भी टेढ़ी खीर है। इसलिए ऐसी समस्याओं के निराकरण के लिए पहले पत्रकार बनना जरूरी है। इसीलिए मैने डीएम साहब से गुहार लगाई है, लेकिन इतने महिनों के बाद भी मेरे प्रार्थना पत्र पर कोई कार्यवाही नही हुई। ऐसा ही चलता रहा तो मैं धरने पर बैठने को मजबूर हो जाउंगा।’’ अब देखना है कि जिला प्रशासन से सुग्गन सिंह यादव कबतक अपनी मांग पूरी करा पाते हैं।– गाजीपुर से के0के0 की रिपोर्ट, 9415280945





