डीएवीपी की समाचार पत्रों पर हंटर चलाने की तैयारी!

देहरादून। भारत सरकार का विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) देश के समाचार पत्रों पर काफी पड़ताल के बाद रेट लिस्ट जारी करने में कंजूसी बरत रहा है। डीएवीपी ने कई ऐसे समाचार पत्रों का भी रेट लिस्ट जारी कर दिया है जो सिर्फ फाइलों में छपते हुए नजर आते हैं। देश भर के 1468 मामलों में महज 349 समाचार पत्रों को ही विज्ञापन की मान्यता प्रदान की गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य से सबसे अधिक फिर दिल्ली व उसके बाद मध्यप्रदेश एवं उत्तराखण्ड शामिल हैं, जबकि 24 समाचार पत्रों को 3 महीने के अंक जमा करने पर मान्यता दिए जाने की बात कही गई है। दूसरी ओर 1095 समाचार पत्रों को मान्यता प्रदान नहीं की गई है।

पिछले काफी समय से डीएवीपी के अंदर समाचार पत्रों की रेट लिस्ट को लेकर घपले की बातें समाने आई थी, जिसको देखते हुए अब डीएवीपी ने समाचार पत्रों द्वारा पेश किए जाने वाले आवेदन पत्रों पर बारीकी से नजर दौड़ाई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खबर है कि डीएवीपी ने रेट लिस्ट हासिल करने वाले देश के सैकड़ों समाचार पत्रों को नोटिस भी जारी किया है, जिनके द्वारा अभी तक अपने कागज पूरे नही किए हैं। वहीं आगामी 3 सालों के लिए जारी हाने वाले रेटों पर भी कैंची चलाने की सम्भावना है। इसके पीछे कई समाचार पत्रों द्वारा डीएवीपी से प्रसार संख्या अधिक दिखाने के चलते रेट हासिल किए गए थे, जिन पर डीएवीपी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। डीएवीपी के एडिशनल डायरेक्टर एनवी रेड्डी ने देश के 349 समाचार पत्रों को रेट जारी किए हैं, जिनमें अंडमान निकोबार का एक, आन्ध्र प्रदेश के 27, आसाम का 1, बिहार के 4, छत्तीसगढ़ के 11, दादर का 1, दिल्ली के 58, गुजरात के 14, हरियाणा के 7, जम्मू कश्‍मीर के 8, झारखंड के 4, कर्नाटक के 5, केरला के 1, मध्य प्रदेश के 35, महाराष्‍ट्रा के 12, मिजोरम के 1, नागालैन्ड के 1, उड़ीसा के 10, पंजाब के 2, राजस्थान के 28, सिक्किम का 1, तमिलनाडू के 3, त्रिपुरा का 1, उत्तर प्रदेश के 71, उत्तराखण्ड के 34, वेस्ट बंगाल के 8 समाचार पत्र शामिल हैं।

देहरादून से नारायण परगाईं की रिपोर्ट.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *