डॉ महर उद्दीन खां का इश्कजादे और शहजादे पर आल्हा

राजनीति में आजकल एक साहेब हैं जिनके इश्क के चर्चे चारों ओर हैं और दूसरे युवराज हैं ही जिन्हें आजकल शहजादे के नाम से खूब जाना जा रहा है. इन दोनों राजनीति के साहेबजादों पर वरिष्ठ पत्रकार डॉ महर उद्दीन खां ने एक लघु आल्हा लिखा है. आप लोग भी पढ़िए और रस लीजिए.
 
आल्हा इश्कजादे का
 
कथा इश्कजादे की कहता मित्रों सुनना ध्यान लगाय
 
पत्नी त्यागे अरसा हो गया अब मन रहा बहुत अकुलाय
 
सुंदर कन्या एक मिल गई फौरन इश्क दिया फरमाय
 
अफसर एक बड़ा चालू था उसने सीडी ली बनवाय
 
खबर लगी जब आशिक जी को मन में गया बहुत घबराय
 
नीचे का दम नीचे रह गया उपर ले गया राम उठाय।
 
आल्हा शहजादे का
 
कथा सुनाउं शहजादे की पंचो सुनना कान लगाय
 
कांगेस के सारे फर्जी अब तो प्यादे दिए बनाय
 
घिग्गी बंध जाए नेताओं की जब शहजादा आंख दिखाय
 
एक को मारे दो मर जाते तीजा खौफ खाय मर जाय
 
प्राइम मिनिस्टर और मिनिस्टर सब को दी औकात बताय
 
भाषण ऐसा लगता जैसे बकरी बाड़े में मिमियाय
 

लेखक डॉ. महर उद्दीन खां वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं. रिटायरमेंट के बाद इन दिनों दादरी (गौतमबुद्ध नगर) स्थित अपने घर पर रहकर आजाद पत्रकार के बतौर लेखन करते हैं. उनसे संपर्क 09312076949 या maheruddin.khan@gmail.com के जरिए किया जा सकता है. डॉ. महर उद्दीन खां का एड्रेस है:  सैफी हास्पिटल रेलवे रोड, दादरी जी.बी. नगर-203207

अन्य संस्मरणों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: भड़ास पर डा. महर उद्दीन खां

 

 

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