तीन दिन की छुट्टी देकर बलराम शर्मा की नौकरी बचा ली थी शील ने

दैनिक जागरण में अमूमन सभी जगहों की यही स्थिति होती है कि कुछ खास मौकों की खबरों में थोड़ा हेरफेर करके इनके पत्रकार लिख देते हैं. अक्‍सर ऐसे मामले पकड़ में नहीं आ पाते हैं, क्‍योंकि लोग पढ़कर भूल जाते हैं. पर कुछ पाठक ऐसे भी होते हैं, जो हर खबर को गंभीरता से पढ़ते हैं. खबर दैनिक जागरण के हिसार संस्‍करण के भिवानी से है.

2012 में 2 अक्‍टूबर को दैनिक जागरण में दो खबरें प्रकाशित हुई थीं. मुख्‍य संवाददाता बलराम शर्मा के नाम से. सेम खबर 2011 में भी प्रकाशित हो चुकी थी, लिहाजा किसी पाठक ने इसकी शिकायत नोएडा कर दी. नोएडा से विष्‍णु ने कठोर कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे, परन्‍तु शील जी ने कुछ दिनों की छुट्टी काटकर बलराम शर्मा को जीवन दान दे दिया था. आप भी देखिए उस दौरान हुई पत्रबाजी.



शील जी,
सादर प्रणाम,

कृपया अटैचमेंट्स का अवलोकन करें। किसी पाठक ने पत्र के द्वारा इन्हें प्रेषित किया है। पाठक की आपत्ति कतई दुरुस्त है। गांधी जयंती के अवसर पर विगत वर्ष दो अक्टूबर, 2011 को भिवानी डेटलाइन से हिसार संस्करण में दो आइटम प्रकाशित हुए थे। इस वर्ष दो अक्टूबर के अंक में गत वर्ष प्रकाशित दोनों आइटमों को एक ही बाक्स में ज्यों का त्यों शब्दशः प्रकाशित कर दिया गया है।

-ये कृत्य तो घोर अपराध की श्रेणी में आता है। जिन पाठकों की नजर से ये कृत्य गुजरा होगा, उनके जेहन में अपने अखबार की साख क्या रही-बची होगी? साख बनाने में बरसों लगते हैं और इस तरह के कृत्य कुछ क्षणों में उसे धूमिल कर देते हैं। जिन संपादकीय सहकर्मियों के जानकारी में ये ये कृत्य संपन्न किया गया होगा, उनमें किस तरह की कार्य संस्कृति का स्थापन किया गया होगा?

-मैं ये मानकर चल रहा हूं कि आपकी नजर में ये प्रकरण आ चुका होगा और इस पर सख्त निर्णायक कार्रवाई भी हुई होगी।

-मेरी स्पष्ट धारणा है कि इस तरह के कृत्य के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को दैनिक जागरण संस्थान में एक पल भी नहीं रहने देना चाहिए। वो इस तरह की हरकतों से पहले भी संस्थान-अखबार को नुकसान पहुंचाता रहा होगा और आगे भी ऐसा करता रहेगा।

-कृपया जो भी कार्रवाई की गई हो, उससे अवगत कराने का कष्ट करें।

धन्यवाद,

-विष्णु


सर,

निश्चित तौर पर २०११ व २०१२ को प्रकाशित हुए समाचार में तथ्य लगभग सेम हैं। लेकिन मैने समाचार को संशोधित करके भेजा था। मेरा इरादा  संस्थान व पाठक को धोखा देना बिल्कुल नहीं था। लेकिन यह गलती भूलवश हुई कि की तथ्य सभी सेम हैं। मैं आपको आश्वासन दिलाना चाहूंगा कि भविष्य में इस तरह  की गलती की पुनरावृति कभी नहीं होगी। गांधी जी भिवानी में दो बार ही आए थे और इन्हीं तथ्यों पर आधारित मैने यह समाचार भेजा था। यह मेरी पहली व आखिरी गलती है। यह गलती माफी योग्य तो नहीं है पर फिर भी मेरे अब तक के इमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा से किए गए कार्यों को देखते हुए माफी मिलेगी…।

बलवान शर्मा


श्री बलवान,
आपने अपनी गलती तो मान ली लेकिन इससे निश्चित तौर पर समचारपत्र की छवि को गंभीर आघात पहुंचा है जिसकी भरपाई करना बहुत मुश्किल है। आपकी इस लापरवाही और गंभीर भूल के लिए तीन दिन के लिए अनुपस्थित किया जा रहा है। साथ ही दंड के तौर पर आपके इस माह के सभी साप्‍ताहिक अवकाश भी निरस्‍त किए जा रहे हैं। आपको तीन रेड स्‍टार भी दिए जा रहे हैं। साथ ही आपको यह चेतावनी भी है कि भविष्‍य में ऐसी भूल पर आपकी स्‍वत: सेवा समाप्ति समझी जाएगी।

शील।

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