तो क्‍या खुद अजीत अंजुम इन संपादकों की लिस्‍ट में नहीं हैं?

Ajit Anjum : जो लोग कह रहे हैं कि जिंदल मामले में फलां- फलां भले ही खबर दिखाने के बाद 100 करोड़ की डील करते पकड़े गए हैं, हर संपादक ऐसा ही है, जो पकड़ा गया वो चोर, बाकी सिपाही …जो लोग कह रहे हैं कि मालिकों के कहने पर कौन ऐसा संपादक है जो डील करने नहीं चला जाएगा ….उनके लिए मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि आशुतोष (आईबीएन -7) शाजी जमां और मिलिंद खांडेकर (एबीपी न्यूज) सतीश के सिंह (लाइव इंडिया), विनोद कापड़ी (इंडिया टीवी), कमर वहीद नकवी (आजतक के पूर्व संपादक) और सुप्रिय प्रसाद (आजतक के मौजूदा संपादक) जैसे संपादक हैं, जिनकी कीमत कोई जिंदल नहीं लगा सकता….जिन्हें कोई जिंदल सौदेबाजी के लिए तैयार नहीं कर सकता …चैनल मालिक भी इन्हें किसी ऐसी डील के लिए मजबूर नहीं कर सकता.

इनमें से कोई ऐसा नहीं है जो नेताओं के आता-जाता (रिश्ते तराशने के लिए) हो …इनमें से कोई ऐसा नहीं है जिनकी नेताओं और मंत्रियों से नेटवर्किंग में दिलचस्पी हो ….इनमें से कोई ऐसा नहीं है, जो नेताओं-मंत्रियों के गुड बुक में बने रहने के लिए खबरों की सौदेबाजी करता हो …दुर्भाग्य से इनमें से कोई ऐसा भी नहीं है, जिन्हें दो-चार मंत्री अपना दोस्त भी मानते हों ….ये न्यूज रूम के लोग हैं, जो सत्ताधीशों के ड्राइंग रुम और अंत:पुर में कभी नहीं देखे जाते …..फिर आप फलां-फलां से सबकी तुलना कैसे कर सकते हैं ….आशुतोष जैसे लोगों को तो कोई हजार करोड़ देकर भी Oblige नहीं कर सकता ….दो पकड़े गए तो ये कहकर छाती मत पीटिए कि सभी संपादक डीलर हैं ….इस लिस्ट में बहुत से नाम छूट भी गए हैं ….मैंने सिर्फ हिन्दी चैनलों के संपादकों की बात की है …

वरिष्‍ठ पत्रकार अजीत अंजुम के फेसबुक वॉल से साभार.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *