दिल्‍ली के कमिश्‍नर जाएं या फिर गृहमंत्री?

Anand Pradhan : दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की ताजा घटना दिल-दिमाग को सुन्न कर देनेवाली घटना है. दोषियों को जल्दी से जल्दी और कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. दिल्ली को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने के लिए हर कदम उठाने की जरूरत है. इसपर न तो बहस की कोई गुंजाइश है और न ही जरूरत. मुद्दा यह है कि अब जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. अगर ऐसी घटनाएँ बढ़ रही हैं तो यह साफ़ तौर पर पुलिस और कानून के शासन के घटते इकबाल का नतीजा है. आज पुलिस से अपराधी नहीं, शरीफ लोग डरते हैं. क्यों? अगर ऐसी शर्मनाक आपराधिक घटनाएँ सार्वजनिक स्थानों, बाजारों, परिवहन और स्कूल-कालेजों के आसपास हो रही हैं तो इसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही से दिल्ली पुलिस और देश के गृह मंत्री कैसे बच सकते हैं? दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को अब तक अपनी कुर्सी पर क्यों होना चाहिए? या तो वे जाएँ या फिर गृह मंत्री?

आईआईएमसी के प्राध्‍यापक आनंद प्रधान के फेसबुक वॉल से साभार.

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