देवीसिंह, अरुण, गुरुदत्त, घनश्याम, पद्मजा एवं अशोक समेत कई पत्रकार सम्‍मानित

जोधपुर। हरदम साप्ताहिक के प्रधान संपादक/प्रकाशक और प्रेसनोट डॉट काम के जोधपुर ब्यूरो को लोक समारोह में शॉल ओढा और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। अवसर था राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के तत्वावधान में तथा मध्यप्रदेश शासन के राजकीय अतिथि बाल योगी उमेशनाथ महाराज के सानिध्य में आयोजित राजस्थान पत्रकार कार्यशाला- 2012 का आयोजन। सूचना केन्द्र के मिनी ऑडिटोरियम में इसका आयोजन वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार शांतिचंद्र मेहता की स्मृति में किया गया।

कार्यशाला में पत्रकारिता खत्म होता मिशनरी भाव एवं नवीन मीडिया के खतरे विषय पर विचार गोष्ठी रखी गई। कार्यशाला में जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर एवं उदयपुर आदि विभिन्न स्थानों से आये पत्रकारों ने भाग लिया। कार्यशाला में अपने विचार रखते हुए सूरसागर विधायक सूर्यकांता व्यास ने कहा कि पत्रकारिता का स्तर नहीं गिर रहा है, उनकी क्षमता तथा महत्व दिनों दिन बढ रहा है। आज के पत्रकार को अधिक परिश्रम करने की आवश्यकता है। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ. सत्यनारायण ने कहा कि नवीन मीडिया एक आभासी दुनिया है।

केयर्न एनर्जी के उप महाप्रबंधक ए. पी. गौड ने कहा कि व्यवसाय और मिशन एक साथ नहीं चल सकते। आज सभी लोग अपना-अपना जीवन स्तर ऊपर उठाने में लगे हुए हैं, ऐसी स्थिति में यदि पत्रकार भी अधिक कमाना चाहते हैं और अपना जीवन स्तर ऊपर उठाना चाहते हैं तो इसमें कुछ भी अस्वाभाविक नहीं है। फिर भी अति हर चीज की बुरी होती है। मडिया को लोगों के भीतर अपने प्रति विश्वसनीयता बनाये रखने की आवश्यकता है। आकाशवाणी के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. कालूराम परिहार ने कहा कि मीडिया हमारे जीवन की हकीकत है। जैसे धर्म से आंख नहीं चुराई जा सकती वैसे ही मीडिया से भी आंख नहीं चुराई जा सकती। फोरम के अध्यक्ष अनिल सक्सेना ने कहा कि जीवन के हर क्षेत्र में गिरावट आई है। पत्रकारिता के मिशन में गिरावट के लिये केवल पत्रकार दोषी नहीं हैं। सिस्टम भी बराबर दोषी है।

कवि और लेखक दिनेश सिंदल ने कहा कि साहित्य मनुष्य को संवदेनशील बनाने का काम करता है। अद्वेता शर्मा ने कहा कि सोशियल नेटवर्क साइट्स काल्पनिक दुनिया बन गई है जहां दुनिया भर के लोग एक दूसरे से बात करते हैं तथा विचार व्यक्त करते हैं। यह मानव जाति की सोशियल इंस्टिंक्ट का प्रतीक है। डॉ. रमाकांत ने कहा कि यह लगातार कहा जाता रहा है कि आज का जमाना विमर्श का जमाना है किंतु केवल विमर्श से कब तक काम चलेगा। आज तो विकल्प की आवश्यकता है। लोकतंत्र के चारों खंभों को विकल्प चाहिये और यह विकल्प हमारा आज का युवा दे सकता है। पूंजीपतियों के हाथों में बिका हुआ मीडिया समाज को कुछ नहीं दे सकता। छोटा कहा जाने वाला पत्रकार आधे पेट भूखा रहकर ही समाज की बात कह सकता है। पहले के पत्रकार अधिकांशतः साहित्यकार भी होते थे। यही कारण था कि वे जब सम्पादकीय लिखते थे तो लोग उन्हें पढ़ते थे किंतु आज बड़े से बड़े समाचार पत्र का सम्पादकीय नहीं पढ़ा जाता। खरी बात कहना साहस का काम है। पत्रकारों में इतना साहस तो होना ही चाहिये कि वे सत्य को सामने ला सकें। सच्चे पत्रकार को बड़े घरानों की पत्रिका की बजाय लघु पत्रिकाओं के आंदोलन से जुड़ना चाहिये।

कार्यशाला में वरिष्ठ पत्रकार देवीसिंह बडगूजर, अरुण हर्ष, गुरुदत्त अवस्थी, घनश्याम डी रामावत, पद्मजा शर्मा, अशोक लोढा तथा सूचना एवं जनसम्‍पर्क अधिकारी मोहनलाल गुप्ता को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर यवतमाल की महापौर तथा बूंदी के जिला प्रमुख, जैसलमेर के साहित्यकार डॉ. आईदानसिंह भाटी, जोधपुर की साहित्यकार दीप्ति कुलश्रेष्ठ, डॉ. तारालक्ष्मण गहलोत, मरुधरा पत्रकार संघ के अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र भंसाली सहित विभिन्न साहित्यकार एवं पत्रकार उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन उदयपुर से आईं शकुंतला सरूपरिया ने किया। कार्यक्रम सहप्रभारी शेख रईश अहमद ने परिवार सहित आभार प्रकट किया। (प्रेनो)

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