दैनिक जागरण ने नहीं छापी मीडियाकर्मी से बदसलूकी की खबर

दिल्‍ली-एनसीआर में दैनिक जागरण की घटिया पत्रकारिता से मीडियाकर्मियों में रोष है. अखबार इस कदर कारपोरेट मानसिकता का पोषक तथा पुलिस का चाटुकार हो चुका है कि अब पुलिस के खिलाफ खबरें ही प्रकाशित नहीं कर रहा है. वो भी तब जब पुलिस की गुंडागर्दी का शिकार खुद मीडियाकर्मी बना. इस बात को लेकर पत्रकार इस अखबार के चरित्र पर थू – थू कर रहे हैं. 

 
मामला नोएडा के सेक्‍टर 20 कोतवाली से जुड़ा हुआ है. यहां पर तैनात रहे प्रभारी अरुण कुमार सिंह ने नवभारत टाइम्‍स के फोटो जर्नलिस्‍ट के साथ बदतमीजी कर दी थी और उनके साथ के दूसरे सिपाही ने फोटो जर्नलिस्ट को थप्‍पड़ मार दिया था. दिल्‍ली-एनसीआर के पत्रकार इस घटना को लेकर एकजुट हो गए तथा एसएसपी के आवास का घेराव कर कार्रवाई की मांग की. इसके बाद एसएसपी ने सिपाही को सस्‍पेंड करने तथा कोतवाली प्रभारी को लाइन हाजिर करने का आश्‍वासन दिया. 
 
नोएडा के लगभग सभी अखबारों ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया, परन्‍तु दैनिक जागरण ने मीडियाकर्मी के साथ हुई अभद्रता पर एक लाइन भी प्रकाशित करना गंवारा नहीं समझा. खैर, जागरण के लिए पत्रकारिता गई तेल लेने. शुद्ध रूप से अखबार का बिजनेस करने वाला समूह शायद अरुण कुमार और प्रवीण कुमार का कर्ज उतारने के लिए इस खबर को प्रकाशित करना उचित नहीं समझा. हां, पत्रकारिता के वसूलों की हत्‍या करना उसके लिए आसान जरूर रहा. 

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