दोनों संपादकों की गिरफ्तारी अनुचित नहीं लगती : कमर वहीद नकवी

 

: तथ्‍यों को तोड़- मरोड़कर कर जी न्‍यूज ने मुझे पीड़ा पहुंचाई है : ज़ी न्यूज़ ने अपने सम्पादक व बिज़नेस हेड सुधीर चौधरी व ज़ी बिज़नेस चैनल के सम्पादक समीर अहलूवालिया की कल हुई गिरफ़्तारी पर मेरा फ़ोनो कल रात किया था. इसके बाद मेरे पास कई लोगों के फ़ोन और एसएमएस आये कि क्या आपने ज़ी को दिये फ़ोनो में पुलिस कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है क्योंकि ज़ी न्यूज़ अपने यहाँ ब्रेकिंग न्यूज़ की पट्टी पर आपका ऐसा बयान चला रहा है. मुझे इससे बड़ी पीड़ा पहुँची है. यह तथ्यों को अपने पक्ष में तोड़ कर पेश करने की निन्दनीय हरकत है.
 
इस मामले में मेरा स्पष्ट मानना है कि दो राष्ट्रीय न्यूज़ चैनलों के सम्पादकों पर अवैध उगाही और आपराधिक साज़िश जैसे आरोपों का लगना पत्रकारिता जगत के लिए बड़ी शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण बात है. चूँकि इस मामले में साक्ष्य के तौर पर वीडियो सीडी उपलब्ध है और उसकी फ़ॉरेन्सिक रिपोर्ट आ चुकी है कि उसके वीडियो-आडियो के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गयी है, इसलिए प्रथम दृष्ट्या इन दोनों सम्पादकों के विरुद्ध गम्भीर आपराधिक मामला बनता है और पुलिस ने इनके ख़िलाफ़ जो कार्रवाई की है, वह किसी भी दृष्टि से अनुचित नहीं लगती.
 
वरिष्‍ठ पत्रकार कमर वहीद नकवी के फेसबुक वॉल से साभार. 
 
“My phono on arrest of Zee News Editor Sudhir Chaudhaary and Zee Buisness Editor Sameer Ahulwalia is being misreported by Zee Channels. I strongly condemned the conduct of two editors in this case and said that it is an unfortunate event for all us journalists. I also said that in my view police decided to arrest them after it has fully satisfied that a prima facie case of extortion and criminal conspiracy exists against these two journalsits. I also said since police acted after forensic investigation of the CD, there is now no doubt on the authenticity of the CD on the basisi of whichthis case stands . I was asked that police didn’t take any action against those journalists whose conversations were there in Radia tapes, I said that case was related with ethical misconduct of the journalists and I condemned the conduct of those journalists but Sudhir and Sameer’s case is of criminal misconduct. Therefore police action doesn’t seem wrong to seem wrong to me. – Q.W.Naqvi.”

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