नक़वीजी के इस कदम से हमारे जैसे बहुत से लोग फिलहाल आश्‍वस्‍त हो सकते हैं

Abhishek Srivastava : … तो मित्रो, काशी बनाम नरेंदरभाई की बेमेल लड़ाई में हिंदी पत्रकारिता जगत से पहला शहीद होने वाला भी संयोग से एक मूर्धन्‍य बनारसी ही है। सुबह-सुबह पता चला कि नरेंद्ररभाई ने दुनिया की जो सबसे बड़ी अदालत रजत शर्मा के आंगन में लगाई थी, उस संबंध में श्री क़मर वहीद नक़वी ने किसी विवाद के चलते अपना इस्‍तीफ़ा शर्मा को सौंप दिया है। विद्यार्थी परिषद के पुराने सेवक रहे शर्मा ने स्‍वाभाविक तौर पर इस्‍तीफ़ा स्‍वीकार भी कर लिया है।

ऐसा लगता था कि हिंदी के संपादकों ने अपनी रीढ़ बेच खाई है, लेकिन नक़वीजी के इस कदम से हमारे जैसे बहुत से लोग फिलहाल आश्‍वस्‍त हो सकते हैं। अभी पिक्‍चर बाकी है। जिस तरीके से इंडिया टीवी पर नरेंद्ररभाई का इंटरव्‍यू स्‍वयंसेवक शर्मा ने और आज तक पर राहुल बाबा का इंटरव्‍यू मुख्‍तार-अफ़जाल के राजनीतिक सलाहकार (संभवत: रिश्‍तेदार भी) जावेद अंसारी ने लिया है, वह हिंदी के मीडिया की तह में घुस चुकी सड़ांध का बजबजाता नमूना है।आगे और सिर कटेंगे, और इस्‍तीफे होंगे। इस क्रम में उन्‍हें भी गौर से पहचाने जाने की ज़रूरत होगी जो नाखून कटाकर शहीद बनने की फि़राक में हैं।

फि़लहाल मैं खुश हूं कि मैंने पिछले महीने अपने विवेक की आवाज़ पर नक़वीजी से किया एक वादा तोड़ कर इंडिया टीवी का चुनावी असाइनमेंट ठुकरा दिया और दो अन्‍य स्‍वयंसेवक चैनलों की तकरीबन मिल चुकी नौकरी के लिए अपने कदम दहलीज़ से ही वापस खींच लिए। कैसे दिन आने वाले हैं, इसका अंदाज़ा मुझे पहले से था। अभी तो बस ट्रेलर है। देखते जाइए…

पत्रकार और एक्टिविस्ट अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.

मूल खबर…

रजत शर्मा-नरेंद्र मोदी में अनैतिक डील के खिलाफ इंडिया टीवी के चीफ एडिटर नकवी ने दिया इस्तीफा

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रजत शर्मा के प्रायोजित अदालती कार्यवाही को नकवी ने लात मार दिया

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