नपुंसक पुलिस है तो कुछ नहीं हो सकता इस देश में (नीरज राजपूत की आपबीती)

मैं अपने साथ हुए एक फ्राड की कम्‍लेन करने नोएडा सेक्‍टर 20 थाने पहुंचा तो थाना प्रबंधक महोदया आदरणीय रीता यादव का पहला सवाल था -''कितने का फ्राड है?'' aud है?" मैंने बताया, "मैडम जी 2000 रुपये का." तो हंस कर बोलीं, ''कब तक चक्‍कर लगाएगा थाने के अपने दो हजार के लिए? जा के काम करो फिर कमा लेना दो हजार.''

मैंने पलटकर कहा, ''मैडम जी, दो करोड़ होता तो कुछ करते क्‍या? ये दो हजार दो लाख ना बना सके फ्राड इसलिए आया हूं. प्‍लीज एफआईआर नोट कर लीजिए.''

बालीं, कम्‍लेन लिख के दे दो हम वेरीफाई करेंगे कि कंपलेन सही है कि नहीं, उसके बाद कुछ करेंगे. आप फ्राड करने वाले से संपर्क बना के रखिए और जो भी कुछ नई डेवलपमेंट होती है वो हमे अपडेट करते रहिएगा.''

हर वो काम, जो पुलिस को करना चाहिए था, मैंने खुद किया. फ्राड करने वाले का नम्‍बर ट्रैस करवाना, उसका अकाउंट ट्रैस करवाना, अकाउंट में रजिस्‍टर्ड एड्रेस और फोन नम्‍बर लिखवाना, सब कुछ करके थाली में परोस के दिया मैडम जी को और उनके आरामपरस्‍त अफसरों को. पर कान पर जूं तक नहीं रेंगी इन सबके. 30 नवम्‍बर को कम्‍पलेन की थी. फोन नम्‍बर, एड्रेस, अकाउंट नम्‍बर और पता सब कुछ ला के दे दिया पर कुछ नहीं किया पुलिस ने. शायद वो चाहते हैं कि फ्राड करने वाले को ले के भी मैं आ जाउं और कार्रवाई भी मैं ही कर दूं.

आप बताइए, जिस इंसान ने मेरे से दो हजार का फ्राड किया वो न जाने ऐसे कितने लोगों के साथ ये फ्राड कर चुका होगा और आगे भी करता रहेगा. क्‍या पुलिस इंतजार कर रही है कि वो एक दिन फ्राड करते करते नेता बने और करोड़ों का घपला करे? तब भी पुलिस पल्‍ला झाड़ती नजर आएगी और काम तब भी नहीं करेगी. मैं श्‍योर हूं कि किसी सामाजिक कार्य के लिए उस इंसान ने फ्राड नहीं किया है. आज दो महीने बीत गए और मैं भी अब मान चुका हूं कि कुछ नहीं हो सकता हमारा.

हम आस लगा के जिंदगी काट देंगे. बोलेंगे कि बदलाव हमें लाना है.. आगे भी बढ़ेंगे गलतियों को काबू में करने के लिए, पर जब नपुंसक पुलिस से सामना होगा तो आदत पड़ जाएगी.. और फिर कह देंगे कि कुछ नहीं हो सकता इस देश का. मैंने कोशिश की थी कि किसी जुर्म करने वाले को रोक दूं शुरुआती दो हजार के दहलीज पर, परन्‍तु अफसोस मैं ऐसा नहीं कर पाया और अब इंतजार कर रहा हूं कि किसी दिन न्‍यूज में उस फ्राड करने वाले का नाम सुनने का. सुन के कह सकूंगा कि मैंने चाहा था इसे शुरुआत में रोकना पर अब ये एक छोटे से चोर से किसी दामिनी का बलात्‍कारी बन गया.

हम कुछ न कभी बदल पाए थे न बदल पाएंगे. बस चाय की चुस्कियों के साथ न्‍यूज का मजा लेंगे और कहेंगे कि कुछ नहीं हो सकता. आज भी चाहता हूं कि उस फ्राड करने वाले को पकड़ लिया जाए. इसलिए नहीं कि दो हजार वापस चाहिए बल्कि इसलिए कि जुर्म को बढ़ने और पनपने से रोकना चाहता हूं. ये होता मेरा कांट्रीब्‍यूशन, जो न हो सका हमारी नपुंसक पुलिस की वहज से.

नीरज राजपूत

9873868686

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