नरसिंहपुर पुलिस फंसाना चाहती है मीडियाकर्मियों को, फर्जी मामला दर्ज किया

यशवंतजी, 15 मई 2011 को रात्रि में 11:30 बजे नरसिंहपुर के ईटीवी रिपोर्टर जीतेंद्र चौबे के पास थाने से फोन आता है कि जबलपुर से कोई महिला आई है और उसके साथ कोई स्‍थानीय समाजसेविका जया शर्मा भी हैं और उन्‍हें मदद की जरूरत है, आप लोग थाने आ जाओ. थाने आने पर पता चला कि उक्‍त महिला का नाम अर्चना त्रिपाठी है और उसके द्वारा बताया गया कि उसका पति राजेश त्रिपाठी तीन-चार सालों से उसके पास नहीं आया है. पर उसे पता चला है कि वह गुरुद्वारा के पास किसी मकान में रह रहा है.

इस महिला को मदद की जरूरत थी तो जीतेंद्र चौबे ने पत्रकार समीर खान को फोन पर सूचित किया और समीर खान ने मुझे सूचित किया. हम तीनों द्वारा अन्‍य मीडियाकर्मियों को भी सूचित किया गया. हमलोग थाने गए वहां पर उस वक्‍त एएसआई बीडी द्विवेदी, मनोज पुरी, मनीष परमार और मीडियाकर्मी मौजूद थे. चूंकि महिला ने लिखित शिकायत देकर पुलिस से मदद मांगी थी और हम मीडियाकर्मी से भी कवरेज करने की गुजारिश की तो हम तैयार हो गए. इसलिए भी कि पुलिस उस महिला के साथ जा रही थी. पर मैंने मामले की गंभीरता को देखते और समझते हुए पूरे मामले को पुलिस के आला अधिकारी को सूचित करना उचित समझा.

तब मैंने अपने मोबाइल नम्‍बर 9425469156 से तात्‍कालिक अतिरिक्‍त पुलिस अधीक्षक विनोद सिंह चौहान को रात्रि लगभग 12:20 के आसपास उनके मोबाइल नम्‍बर 9425138778 पर फोन करके मामले से अवगत कराया तो श्री चौहान ने थाने पर फोन कर संबंधित अधिकारी कार्रवाई करने के लिए कहा तो हम सभी मीडियाकर्मी पुलिस वालों और अर्चना त्रिपाठी व जया शर्मा के साथ गुरुद्वारा के पास पहुंच गए. मकान के मेन गेट पर ताला पड़ा हुआ था तो मनोज पुरी ने आवाज देकर मकान मालिक को आवाज दी तो मकान मालिक कोष्‍टी जी आए और ताला खोला. जब राजेश त्रिपाठी के बारे में पूछा गया तो उन्‍होंने बताया कि वो ऊपर के कमरे में अपनी पत्‍नी के साथ रहते हैं.

यह सुनकर अर्चना जी ऊपर की ओर चली गईं और उन्‍होंने दरवाजा खटखटाया. उस समय हमलोग नीचे मकान मालिक से बात कर रहे थे. इसी दौरान ऊपर से जोर जोर से चिल्‍लाने की आवाज आने लगी. अर्चना जी जोर जोर से किसी आदमी को डांट रही थीं, तो हम लोग भी ऊपर चले गए. उपर जाकर देखा कि अर्चना अपने कथित पति राजेश त्रिपाठी को डांट रही हैं और मार भी रही हैं. इतने में वो अंदर चली गईं और वहां मौजूद महिला को भी डांटना शुरू कर दिया. उन्‍होंने उसे मारा भी. और हमें भी कवरेज करने को कहा. कुछ देर में ही नीचे खड़े होकर मकान मालिक से बात कर रहे पुलिसकर्मी भी ऊपर आ गए. उनके साथ जय शर्मा और राजेश राय जो कि घर में मौजूद उक्‍त महिला का भाई था, वह भी आ गया और फिर पुलिस वाले अपनी विवेचना करने लगे.

वहां पर मौजूद एएसआई बीडी द्विवेदी ने अपने किसी अधिकारी से फोन पर बात की तथा सारी जानकारी दी. इसके बाद उक्‍त महिला और राजेश त्रिपाठी को पुलिस वैन में लेकर थाने आई. जहां पर अर्चना त्रिपाठी की शिकायत के आधार पर राजेश त्रिपाठी व उक्‍त महिला जिसका नाम पुष्‍पलता राय बताया गया, उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 498 ए तथा 323/34 के तहत मामला दर्ज किया गया. उसके बाद हम सभी मीडियाकर्मी वापस आ गए और इस न्‍यूज को सुबह अपने चैनलों पर भेज दी. उस दिन के बाद हमारी पुष्‍पलता राय से आज तक हमारी कोई मुलाकात नहीं हुई. पर अब सुनने में आया कि पुष्‍पलता राय, राजेश और अर्चना जी का कोर्ट में आपसी समझौता हो गया है.  

इस घटना के एक वर्ष बाद हमें पता चला कि पुष्‍पलता राय ने हमारे खिलाफ झूठी शिकायत राज्‍य महिला आयोग में की है कि घटना के दिन वे रात्रि में साढ़े ग्‍यारह बजे अपने घर में अकेली थी तब अर्चना त्रिपाठी, राजेश राय, जीतेंद्र चौबे (ईटीवी), समीर खान (दैनिक जनपक्ष), पंकज गुप्‍ता (बंसल न्‍यूज), अभय तिवारी (टीवी99) मेरे घर में जबरन घुस गए और अर्चना व राजेश त्रिपाठी ने मेरे साथ मारपीट की और इन लोगों ने कैमरे में कवरेज किया, जिससे घबराकर मैं घर से भाग गई. शिकायत में पुष्‍पलता राय द्वारा ये बात छिपाई गई कि वो उस समय किस के साथ थीं. और पुलिस की मौजूदगी बात भी छिपाई गई कि उन्‍हें पुलिस पकड़कर थाने लाई और मामला दर्ज किया.

सबसे दिलचस्‍प बात यह है कि हम लोगों की शिकायत उस समय की गई जब उसके मामले में कोर्ट में राजीनामा हो गया. वह भी चार महीने बाद. जिससे स्‍पष्‍ट है कि हम मीडियाकर्मियों को इस मामले में फर्जी तरीके से फंसाया जा रहा है, जिसमें पुलिस की संलिप्‍तता भी रही है. पुलिस भी अब जानबूझकर बिना किसी सबूत के आधार पर बिना मामले की जांच किए हम मीडियाकर्मियों को फंसाने के लिए मामला दर्ज किया है. इस पूरे मामले में पुलिस ने न तो पुष्‍पलता राय पर घटना दिवस पर दर्ज मामले को और न ही मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों का जिक्र किया और न ही मकान मालिक और हमलोगों के बयान लिया.   

पुलिस ने उक्‍त महिला की बात मानकर एकतरफा झूठी बात मानकर बिना जांच के मीडियाकर्मियों पर मामला दर्ज कर लिया. पुलिस की यह कार्यप्रणाली उसे संदेह के घेरे में खड़ी करती है. इससे साफ जाहिर होता है कि पुलिस कहीं ना कहीं पत्रकारों को टारगेट बनाकर झूठे मामले में फंसाने का प्रयास कर रही है. इसलिए हमने पुलिस अधीक्षक और गृहमंत्री से मामले की पुन: जांच व राज्‍य महिला आयोग और डीजीपी महोदय से मामले की सीआईडी जांच की मांग की है ताकि इस मामले का पूरा सच सामने आ सके.

पंकज गुप्‍ता
बंसल न्‍यूज
नरसिंहपुर
 

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