Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

प्रिंट-टीवी...

नेशनल दुनिया में झऊआ भर संपादकों के बीच से गायब था आरई और एनई का पद

आलोक मेहता का नाम ऐसे ही बड़े संपादकों में शुमार नहीं होता है, बल्कि उन्‍होंने इस तरह के काम कर डाले हैं अपने पत्रका‍रीय जीवन में जो बड़े-बड़े संस्‍थान और बड़े-बड़े लोग भी नहीं कर पाए हैं. ये आलोक मेहता ही हैं जो रातों रात इस तरह से अखबार बदल दिया कि नईदुनिया अगले दिन नेशनल दुनिया हो गया और पाठकों को पता नहीं चल पाया. इसके लिए कुछ प्रचार प्रसार भी नहीं करना पड़ा था. बस कहा गया कि नाम बदला है काम कुछ भी नहीं बदला.

आलोक मेहता का नाम ऐसे ही बड़े संपादकों में शुमार नहीं होता है, बल्कि उन्‍होंने इस तरह के काम कर डाले हैं अपने पत्रका‍रीय जीवन में जो बड़े-बड़े संस्‍थान और बड़े-बड़े लोग भी नहीं कर पाए हैं. ये आलोक मेहता ही हैं जो रातों रात इस तरह से अखबार बदल दिया कि नईदुनिया अगले दिन नेशनल दुनिया हो गया और पाठकों को पता नहीं चल पाया. इसके लिए कुछ प्रचार प्रसार भी नहीं करना पड़ा था. बस कहा गया कि नाम बदला है काम कुछ भी नहीं बदला.

शायद बात भी सही था कि नाम के अलावा कोई काम नहीं बदला था. जैसे नईदुनिया को डुबाया था नेशनल दुनिया को भी उसी राह पर ले जा रहे थे. पर नेशनल दुनिया के शैलेंद्र भदौरिया नईदुनिया के विनय छजलानी से समझदार निकल गए. भदौरियाजी ने मेहताजी को इतना ऊपर प्रमोट कर दिया कि बाहर किसी को समझ में नहीं आ रहा है कि ऐसा प्रमोशन पाकर खुश हुआ जा सकता है या फिर नाराज. खैर, हम बात कर रहे थे आलोक मेहता के उन अनोखे कामों के बारे में जो वे ही कर सकते थे.

मेहता साहब ने नईदुनिया और नेशनल दुनिया में भी इतने संपादक बना दिए थे, जितने कुछ अखबारों के पूरे एडिशन में भी खोजे नहीं मिलेंगे. यानी संपादक नाम की रेवड़ी पूरे अखबार में बंटी हुई थी. स्‍वास्‍थ्‍य संपादक, मेट्रो संपादक, रोविंग संपादक, खेल संपादक, क्राइम संपादक, हई संपादक, हऊ संपादक और पता नहीं कौन कौन संपादक. पर असली खबर तो अब सामने आ रही है कि इस झउआ भर संपादकों के बीच वे दो असली संपादक गधे की सींग की तरह गायब थे, जो अन्‍य किसी भी अखबार में पाए जाते हैं. अभी भी आप समझ नहीं पाए होंगे कि कौन से दो संपादक गायब थे.

चलिए अब बिना इंतजार कराए आपको बता देते हैं कि किसी भी अखबार में एक स्‍थानीय संपादक तथा एक समाचार संपादक का पद जरूर होता है. ये दोनों संपादक सभी अखबारों में पाए जाते हैं, और अखबारों में खबरों के चयन से लेकर लेआउट तक की सारी जिम्‍मेदारी इन्‍हीं पर होती है. पर आलोक मेहता के प्रधान संपादकत्‍व में चलने वाले नेशनल दुनिया में सभी संपादक तो थे, पर स्‍थानीय संपादक एवं समाचार संपादक का कोई पद नहीं था. यह अखबार बिना इन दो संपादकों के चल रहा था. हालांकि इसमें मेहता जी की कोई गलती भी नहीं होगी, उन्‍होंने इतने संपादक बना दिए थे कि इनकी जरूरत भी नहीं रही होगी. 

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...