नोएडा गैंगरेप : छोटों को शिकार बनाने के बजाय बड़े अधिकारियों पर क्‍यों नहीं हो रही कार्रवाई?

दिल्‍ली रेप कांड को लेकर पूरा देश उबल रहा है. हर किसी के आंखों में गुस्‍सा है. इसके बाद भी नोएडा पुलिस कानों में तेल डाले हुए अपने पुराने अंदाज में काम कर रही है. इतनी बड़ी घटना के बाद  भी नोएडा पुलिस ने एक लड़की के गायब होने की घटना को गंभीरता से नहीं लिया, जिसका परिणा गैंगरेप और उसकी हत्‍या की शक्‍ल में आया. दिल्‍ली गैंगरेप की शिकार युवती की मदद करने की घोषणा करने वाले यूपी के सीएम अखिलेश यादव के कानों तक भी नोएडा में हुए गैंगरेप की आवाज नहीं पहुंची. जबकि मायावती के शासनकाल में इन्‍हीं गैंगरेपों की घटनाओं पर पैर रखकर वे सत्‍ता तक पहुंचने में सफल रहे.

नोएडा में पिछले कुछ दिनों में गैंगरेप की दो घटनाएं हो चुकी हैं. एक में पीडित परिवार पुलिस के चलते गांव छोड़ने को मजबूर हुआ तो दूसरे में पुलिस की लापरवाही से युवती की जान चली गई. इसके बाद भी शासन स्‍तर से किसी भी बड़े अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई. अब तो ऐसा लगने लगा है कि पूरा यूपी पांच साल के लिए एक परिवार का बंधुआ बन चुका है. यहां वही होगा जो ये लोग चाहेंगे. समाजवाद बुरी तरह परिवारवाद में तब्‍दील हो गया है. अगर अब भी अखिलेश यादव नहीं चेतते हैं तो 2014 में उन्‍हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है.

क्‍योंकि इन्‍हीं अधिकारियों ने मायावती को सत्‍ता से दूर कर दिया था. अब ऐसा लग रहा है कि अखिलेश भी इससे सबक लेने को तैयार नहीं हैं. नौकरशाही एवं पुलिसिया तंत्र उनकी बनी बनाई छवि पर बट्टा लगा रही है. लोग युवा सीएम के बारे में भी ठीक वैसे ही सोचने लगे हैं जैसा वे राहुल गांधी के बारे में सोचते हैं कि वे बड़े मुद्दों पर चुप्‍पी साध जाते हैं और ड्रामा करने में आगे रहते हैं. इससे मीडिया कवरेज तो मिल सकता है, पर वोट नहीं मिल सकता. ये साबित भी हो चुका है. यूपी की जनता को अब राहुल के कदमों पर चलते दिख रहे हैं अखिलेश यादव.

रायबरेली में पत्रकारों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया. पत्रकार धरना प्रदर्शन करते रहे. लेकिन शासन स्‍तर से कोई सुनवाई नहीं हुई, किसी ने भी इस मामले को संज्ञान में नहीं लिया. इससे लगने लगा है कि एक बार फिर यूपी की सत्‍ता गूंगे-बहरे लोगों के हाथों में चली गई है. अभी सत्‍ता मद में भले ही ये बातें दिखती नहीं हों, लेकिन वे दिन दूर नहीं जब सपा का हश्र भी 2014 में मायावती सरकार जैसा हो. आखिर मायावती की जनता से दूरी और अखिलेश की कार्यप्रणाली से प्रभावित होकर ही तो जनता ने उन्‍हें पहली बार पूर्ण बहुमत दिया था. अब अखिलेश भी उन्‍हीं राहों पर चलते दिख रहे हैं.

नोएडा रेप कांड को लेकर लोगों में उबाल है, पर सपा सरकार आंख-कान बंद किए हुए हैं. कार्रवाई के नाम पर छोटे कर्मचारियों को शिकार बना दिया गया, जबकि बड़े स्‍तर के किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की गई. नीचे नोएडा रेप कांड पर एबीपी न्‍यूज एवं आईबीएन7 ने भी पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाया है.


नोएडा रेपकेस : कार्रवाई के नाम पर लीपापोती

नोएडा : दिल्‍ली से सटे नोएडा में एक लड़की के साथ बलात्कार और फिर हत्या के केस की जांच कर रही पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगे हैं. लेकिन इन शिकायतों के बाद कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती की जा रही है. चार सिपाहियों को सस्पेंड किया गया है और एक चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर किया गया है, जबकि किसी बड़े अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है. पुलिस ने इस मामले में दो लोगो को गिरफ्तार किया है.

नोएडा में एक लड़की के साथ बलात्कार और फिर हत्या के केस में भी लोगों के अंदर गुस्सा है. शुक्रवार की रात नोएडा में दफ्तर से घर लौट रही लड़की की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी. शव अगले दिन सुबह झाड़ियों में मिला. परिजनों ने इस मामले में नोएडा पुलिस पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए. कहा गया कि पुलिस ने वक्त रहते कार्रवाई नहीं की और लड़की के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसे घरवालों की मर्जी के बगैर जलाने की कोशिश की.

आरोपों से घिरने के बाद कार्रवाई के नाम पर एक चौकी इंचार्ज को लाइऩ हाजिर और चार सिपाहियों को निलंबित किया गया है. लेकिन इस मामले मे आला अधिकारी अभी भी बचे हुए हैं. परिजनों के मुताबिक पुलिस ने उन्हें अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं सौंपी है ताकि उन्हें मौत की वजह पता चल सके. हालांकि पुलिस का दावा है कि हर पहलू से जांच की जा रही है और जल्द ही पूरी साजिश का खुलासा होगा. इस बीच पुलिस पर लगे आरोपों को महिला आयोग ने भी संज्ञान में लिया है. महिला आयोग का दल आज पीड़ित लड़की के परिजनों से मुलाकात करेगा. (एबीपी न्‍यूज)


नोएडा रेप केस में पुलिस के रवैये पर सवाल

नोएडा। 21 साल की लड़की से रेप और मर्डर के मामले में नोएडा की एक अदालत ने दो आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों आरोपी 14 दिन तक जेल में रहेंगे। गौरतलब है कि नोएडा पुलिस ने रविवार को दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। जिन्हें आज कोर्ट में पेश किया गया। हालांकि इस केस में नोएडा पुलिस के रवैये पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित घरवालों का आरोप है कि पुलिस ने उन पर अंतिम संस्कार जल्दी करने का दबाव डाला। साथ ही लड़की की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी अब तक उन्हें नहीं दी। इस केस में 5 कॉन्सटेबलों को सस्पेंड कर चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर दिया गया।

बीपीओ में काम करने वाली 21 साल की लड़की की लाश शनिवार सुबह सेक्टर 63 की झाड़ियों से मिली थी। लड़की की हालत देख आशंका जताई गई कि रेप के बाद उसकी हत्या की गई है, हालांकि पुलिसवालों ने लड़की की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट घरवालों को नहीं दी है लेकिन इस केस में रेप और हत्या का मामला दर्ज हुआ है। घरवालों का कहना है कि लड़की जब घर नहीं पहुंची तो उन्होंने उसे पूरी रात तलाशा और सुबह नोएडा सेक्टर 63 की पुलिस चौकी पर पहुंचे, लेकिन सेक्टर 63 चौकी पर मौजूद पुलिसवालों ने उन्हें वहां से लौटा दिया। इसके बाद लड़की के परिवार वाले सेक्टर 62 की चौकी पर गए। वहां तो किसी पुलिस वाले ने उनसे बात तक नहीं की।

पुलिस वालों ने लड़की के परिजनों को ये कहकर रफादफा कर दिया कि उनकी बेटी जवान है किसी के साथ चली गई होगी। ऐसे में सवाल ये कि क्या नोएडा पुलिस इस केस को दबा देना चाहती थी? राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी नोएडा पुलिस के रवैये पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की जांच की बात कही है। वरिष्ठ अफसरों ने छोटे स्तर के 5 पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया है। इनमें दो कॉन्सटेबल पीसीआर वैन में तैनात थे, जबकि तीन चौकी पर तैनात थे। इसके अलावा मॉडल टाउन पुलिस चौकी के इंचार्ज को सिर्फ लाइन हाजिर किया गया है।

ध्यान देने वाली बात ये भी है कि पीसीआर वैन में तैनात जिन दो कॉन्सटेबलों को सस्पेंड किया गया है वो वही हैं जिन्होंने शनिवार को पुलिसवालों पर लड़की के अंतिम संस्कार के लिए दबाव बनाया था। ये पुलिसवाले लड़की के पोस्टमॉर्टम के बाद शव को नोएडा के घर ले गए और घरवालों पर दबाव बनाकर सिर्फ 10 मिनट में शव को शमशान घाट तक ले आए। उस वक्त की तस्वीरें गवाह हैं कि कैसे पुलिस की जिप्सी में अर्थी ले जाई गई। ये पुलिसवाले लगातार घरवालों पर रात में लड़की का अंतिम संस्कार करने का दबाव बना रहे थे, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। (आईबीएन7)

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