पत्रकारिता भटकाव की शिकार है इसलिए परम्‍पराएं बाजार तय कर रहा है

 

: सम्‍पादकाचार्य पराड़कर जी की 129वीं जयंती मनाई गई : वाराणसी। संस्कृति की रक्षा पत्रकारिता व शिक्षा से ही संभव है। आज सम्पादकाचार्य बाबू राव विष्णु राव पराड़कर जी के मिशन का अभाव है। पूरे देश को पत्रकारिता ने ही जोड़ा है। बाजार की चुनौती का विकल्प तैयार करने की जरूरत है। साथ ही बदले परिवेश में एक नये प्रेस आयोग के गठन की आवश्यकता है ताकि प्रेस की स्वतंत्रता और भूमिका का नई चुनौतियों के अनुसार निर्धारण हो सके। यह विचार आज काशी पत्रकार संघ के तत्वावधान में पराड़कर भवन में आयोजित बाबूराव विष्णुराव पराड़कर की 129वीं जयंती पर वक्ताओं ने व्यक्त किए। 
 
मुख्य अतिथि गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व स्वतंत्रता सेनानी प्रो॰ वेणी माधव शुक्ल ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होनी चाहिए। स्वतंत्र पत्रकारिता का माहौल खत्म हो रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता शिक्षण के साथ पत्रकारों की समस्याओं पर भी चर्चा होनी चाहिए। कहा कि अखबारों में विचार परोसने की जगह विज्ञापन व अपराध की खबरों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ब्रिटिश जमाने के पत्रकार रहे पराड़कर जी ने भी समस्याएं झेली। इन्हीं समस्याओं में से समाधान भी खोजना है। गांधीवादी प्रो॰ रामचन्द्र सिंह ने कहा कि सत्य के लिए पत्रकारों को संघर्ष करना चाहिए। परम्पराएं बाजार तय कर रहा है, यह खतरनाक है। प्रो॰ गिरीशचन्द्र चौधरी ने कहा कि पराड़कर जी के आदर्शों का अनुसरण हो। डा॰ जितेन्द्र नाथ मिश्र ने कहा कि पत्रकार लोकचित्रण के साथ लोक निर्देशन भी करें। 
 
प्रो॰ वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी ने कहा कि पराड़कर जी के मिशन के अभाव को भरने की जरूरत है। समाजवादी चितंक विजय नारायण ने कहा कि पत्रकारिता का केन्द्र दिल्ली इसी लिए बन रहा है ताकि पत्रकारिता सत्ता से जुड़ सके। डा॰ राजेश्वर आचार्य ने कहा कि पत्रकार सामाजिक दृष्टिकोण को मजबूत करें। पूर्व अध्यक्ष प्रदीप कुमार ने कहा कि भटकाव की शिकार पत्रकारिता को पटरी पर लाने की जरूरत है। पूर्व अध्यक्ष योगेश कुमार गुप्त ने कहा कि पत्रकार अपनी भीतरी समस्याओं से भी जूझ रहा है। 
 
अध्यक्षता जगत नारायण शर्मा व संचालन प्रेस क्लब के अध्यक्ष डा॰ अत्रि भारद्वाज ने किया। स्वागत व धन्यवाद ज्ञापन महामंत्री राजेन्द्र रंगप्पा ने किया। डा॰ अजय चतुर्वेदी, अमरनाथ शर्मा, डा॰ राजेन्द्र उपाध्याय, सुधांशु, गोविन्द राम भार्गव, रमेश चन्द्र गुप्त, गया प्रसाद टंडन, कैप्टन आर॰एन॰ पाठक ने भी अपने विचार व्यक्त किये। मौके पर उपाध्यक्ष कमल नयन मधुकर, शम्भूनाथ उपाध्याय, बिमलेश चतुर्वेदी, ओमप्रकार सिनहा, नरेन्द्रनाथ मिश्र, आनन्द वर्धन, ईशान त्रिपाठी, श्रद्धा आनंदनी, विन्ध्याचल पाण्डेय, आदि उपस्थित थे।

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