पत्रकारों को अदा करनी होगी समाज प्रहरी की भूमिका : राम गोविन्द चौधरी

: उपजा के कार्यक्रम में कहा : विश्व प्रेस दिवस पर आयोजित एक संगोष्ठी में प्रदेश के बाल विकास एवं बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविन्द चौधरी ने पत्रकारिता के प्रति उत्पन्न हो रहे खतरे को अगाह करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सरकार आती और जाती रहती है। जब सरकारें आना जाना बंद कर देंगी तब हालात भयावह हो सकते हैं। मीडिया ने अंग्रेजों की दांस्तां से लेकर जेपी के आन्दोलन तक समाज के हित में एक प्रहरी के रूप में खड़े हो कर जो भूमिका अदा की है, उसकी मैं सराहना करता हॅू।

उन्‍होंने कहा कि वर्तमान में ऐसे हालात हैं जिसमें प्रेस के लोगों की भूमिका ओर भी अधिक बढ़ जाती है। उस भूमिका को आज पूंजीवाद के तंत्र ने उलझा दिया है। आज समाजवादी विचारों को पोषण देनी की जगह पूंजीवाद के प्रति बढ़ता झुकाव एक खतरे की घंटी बन रहा है।लोकतंत्र में प्रेस की भूमिका एक चौथे स्तम्भ के रूप में मानी जाती है। हमें ध्यान देना होगा कि निरंकुश होती सरकारें और निरंकुश होती व्यवस्था के विरूद्ध संर्घष कर के उसे रास्ते पर लाने की जिम्मेदारी प्रेस निभाए। पत्र और पत्रकारों को जहॉ एक ओर सरकार के लिए उनके संरक्षण के प्रति ध्यान देने की आवश्यकता है। वहीं दूसरी ओर समाचार पत्रों की भी जिम्मेदारी है कि समाज के हित में अपने समाचार और विचार दे कर मार्ग दर्शन करें।

खुद मुख्यमंत्री पत्रकारों की समस्याओं को दूर करने के लिए निरन्तर प्रयत्नषील हैं। इस मौके पर समाजकल्याण मंत्री अवधेष प्रसाद ने कहा कि पत्रकारों की जो भी समस्याएं है उन्हें दूर किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि पत्रकार अपनी एक समिति गठित करें, जो समस्याएं हो उसे मुख्यमंत्री से वार्ता के दौरान हल कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने 15 दिसम्बर से पहले मुख्यमंत्री से समय लेकर मुलाकात कराने की भी बात कही है। इस अवसर पर उपजा के अध्यक्ष रतन दीक्षित, महामंत्री रमेशचन्द्र जैन, एनयूजे के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला, पूर्व अध्यक्ष दादा पीके राय, पूर्व सूचना आयुक्त विरेन्द्र सक्सेना, पीटीआई के वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद गोस्वामी, वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार, संपादक तारकेश्वर मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार सर्वेष सिंह, उपजा के कोषाध्यक्ष प्रदीप शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार अरबिन्द शुक्ला, केके वर्मा, रोहिताश मिश्रा, राजकुमार उपाध्यय, एसवी सिंह, मंगल सिंह, निर्भय सक्सेना, सुनील त्रिवेदी,जितेन्द्र पाण्डेय नरसिंह नारायण पाण्डेय, विवेक त्रिपाठी समेत सैकड़ों पत्रकार एवं फोटोग्राफर मौजूद थे।

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