पत्रकार शाशिकांत को फर्जी फंसाए जाने के विरोध में पत्रकारों का धरना जारी

 

जालौन में सपा नेता पर हुए हमले के आरोप में एक पत्रकार को फर्जी फंसा कर जेल भेजने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जिसको लेकर पत्रकार 22 नवम्बर से जिलाधिकारी परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गये हैं। आपको बता दें कि 6 नवम्बर को देर रात जालौन के एट थाना क्षेत्र में सपा के पूर्व कोषाध्यक्ष राकेश पटेल जब अपने गाँव सोमई से बाइक से एट जा रहे थे तभी कुछ अज्ञात हमलावरों ने उन पर फायरिंग कर दी जिसमें वो घायल हो गये थे। घटना के नौ दिन बाद सपा नेता के भाई ने 16 नवम्बर 2012 को गाँव के ही दैनिक समाचार पत्र अमर उजाला के पत्रकार शशिकांत तिवारी के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया था, जिस पर पुलिस ने करवाई कर पत्रकार को जेल भेज दिया था। 
 
इस मामले में जनपद के पत्रकारों ने जालौन के पुलिस अधीक्षक आरपी चतुर्वेदी से निष्पक्ष जांच कर करवाई करने की बात कही थी लेकिन जांच कराने के बजाय पुलिस ने अपने ऊपर जनपद के सपा के एक जनप्रतिनिधि का दबाब होना बताया था, जिसके चलते पत्रकारों में आक्रोश भड़क गया और पत्रकारों ने 21 नवम्बर को जिलाधिकारी मनीषा त्रिघटिया से मामले की मजिस्ट्रेट जांच कराने की बात कही थी, लेकिन उन्होंने भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया और मजिस्ट्रेटी जांच कराने से मना कर दिया। इसके परिणाम स्वरुप जनपद के पत्रकार लामबद्ध हो गये और 22 नवम्बर 2012 से पत्रकारों ने उरई स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना देना शुरू कर दिया। 
 
धरने के चौथे दिन उरई स्थित गांधी चबूतरा पर सभी दलों के राजनीतिक लोगों ने एकजुट होकर पत्रकार शशिकांत तिवारी के उत्पीड़न के खिलाफ सभा की और धरना दिया। लोगों ने कहा कि सपा सरकार में आम आदमी के साथ-साथ लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ भी सुरक्षित नहीं है। पत्रकार को आवाज उठाने पर दबा दिया जाता है या फिर उसे झूठे मुकदमे में आरोपी बनाकर जेल भेज दिया जाता है, जो कतई बर्दास्त नहीं किया जा सकता है। इस अवसर पर अखिल भारतीय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि प्रदेश में जब बसपा की सरकार थी तब ब्राह्मणों का उत्पीड़न हुआ और अब सपा सरकार आने के बाद भी उत्पीड़न जारी है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों के उत्पीड़न के बाद जिस तरह से विधान सभा चुनाव में बसपा का सूपड़ा साफ़ हो गया था उसी तरह अगर प्रदेश में सपा सरकार में भी निर्दोष लोगों को जेल भेजा गया और ब्राह्मणों पर जुल्म हुआ तो आने वाले लोकसभा चुनावों में सपा का भी सूपड़ा साफ़ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वह निर्दोष पत्रकार शशिकांत तिवारी को न्याय दिलाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री और डीज़ीपी से भी मुलाक़ात करेंगे। 
 
वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा ने बताया कि अगर प्रशासन निष्‍पक्ष और उचित कार्रवाई नहीं करेगा तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसी भी पत्रकार का उत्‍पीड़न निंदनीय है। सपा सरकार में सबसे ज्‍यादा उत्‍पीड़न से पत्रकार ही जूझ रहे हैं। कामरेड कैलाश पाठक ने बेबाक बोलते हुए प्रदेश सरकार से मांग की है कि अगर 6 नवम्बर से लेकर 16 नवम्बर तक घायल सपा नेता राकेश पटेल, एट थाने के थानाध्यक्ष और जालौन के सांसद घनश्याम अनुरागी के मोबाइल फोन को सर्विलांस के माध्यम से जानकारी ली जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और पत्रकार निर्दोष साबित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन प्रभावशाली जनप्रतिनिधि के इशारे पर काम कर रहा है इसलिए इस घटना की उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर पत्रकार को दोषमुक्त कर नहीं छोड़ा गया तो सभी दलों के लोग लखनऊ और दिल्ली तक आन्दोलन करेंगे।
 
सर्वदलीय धरने में गौरीशंकर वर्मा, जगदीश तिवारी, हरेन्द्र विक्रम, कल्ला चौधरी, उरविजा दीक्षित, ब्लाक प्रमुख सुदामा दीक्षित, गिरीन्द्र सिंह, रेहान सिद्दीकी, अशोक द्विवेदी, विजय चौधरी, विनोद चतुर्वेदी (पूर्व विधायक), अभय द्विवेदी, किसान नेता राजवीर जादौन, बलराम सिंह लम्बरदार, लालू शेख एवं मीडिया से वरिष्‍ठ पत्रकार केपी सिंह, अरविन्द द्विवेदी, ना‍थूराम निगम, दीपक अग्निहोत्री, संजय श्रीवास्तव, ब्रजेश मिश्रा, अतुल त्रिपाठी, संजीव श्रीवास्‍तव, ओमप्रकाश राठौर, अमित द्विवेदी, मनोज राजा, आबिद नकवी, सुनील शर्मा, संजय मिश्रा, रमाशंकर शर्मा, जमील टाटा, अरमान, विकास जादौन, श्रीकांत शर्मा, अलीम सिद्दीकी, संजय गुप्‍ता, अनुज कौशिक, विनय गुप्ता, अजय श्रीवास्‍तव, प्रदीप त्रिपाठी, शशिकांत शर्मा, जितेंद्र द्विवेदी, राहुल गुप्‍ता, संजय सोनी, इसरार खान, मनोज शर्मा, जीतेन्द्र विक्रम सिंह, सहित तमाम पत्रकार, नेता एवं समाजसेवी मौजूद रहे और एक स्वर में पत्रकार की रिहाई एवं दोषियों को सजा देने की मांग की। सभी ने कहा कि जब तक निर्दोष पत्रकार के साथ न्याय नहीं होता तब तक धरना जारी रहेगा। 

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