पूरे उत्‍तराखंड में ‘आत्‍मोत्सर्ग की पत्रकारिता के सौ साल’ के आयोजन के साथ सालाना कार्यक्रम शुरू

उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने हिंदी पत्रकारिता के पुरोधा अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी जी द्वारा संपादित "प्रताप" के यह सौवां साल के मौके पर "आत्मोत्सर्ग की पत्रकारिता के सौ साल" कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत कर दी है। नए साल की पहली तारीख को उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने प्रदेश के अनेक जिलों और नगरों में "प्रताप" और गणेश शंकर विद्यार्थी जी के आदर्श पत्रकारीय जीवन को लेकर विचार-गोष्ठियों का आयोजन किया।

"आत्मोत्सर्ग की पत्रकारिता के सौ साल" कार्यक्रम की शुरुआत कुमाऊँ के मंडल मुख्यालय नैनीताल से हुई। उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने पहली तारीख की सुबह दस बजे नैनीताल प्रेस क्लब कक्ष में एक विचार गोष्ठी की। दिन में हल्द्वानी, किच्छा और सीमांत जिले पिथौरागढ और उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के प्रांतीय सचिव त्रिभुवन उनियाल के नेतृत्व में गढ़वाल मंडल के मुख्यालय पौड़ी समेत प्रदेश के अनेक जिलों में गोष्ठियाँ हुई।

नैनीताल में आयोजित गोष्ठी में उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के प्रांतीय महासचिव प्रयाग पाण्डे ने "प्रताप" और गणेश शंकर विद्यार्थी जी के आदर्श पत्रकारीय जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। वरिष्‍ठ पत्रकार नवीन जोशी, भूपेन्द्र मोहन रौतेला, हेम भट्ट, केएस देव, विनोद कुमार, राजू पाण्डे आदि ने विचार व्यक्त किए। गोष्ठी की अध्यक्षता  उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के अवैनितक के अध्यक्ष और नैनीताल प्रेस क्लब के महामंत्री माधव पालीवाल ने की। गोष्ठी में पत्रकार दामोदर लोहनी, प्रशांत दीक्षित, मनीष पाण्डे, हेमंत रावत आदि पत्रकारों ने भी हिस्सा लिया।

उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की हल्द्वानी नगर इकाई ने इस मौके पर एक बड़ी गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी की शुरुआत उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के प्रन्तीय उपाध्यक्ष पंकज वार्ष्णेय, महासचिव प्रयाग पाण्डे, एनडीटीवी के पत्रकार और यूनियन के वरिष्ठ नेता दिनेश मानसेरा, विपिन चन्द्रा, ओपी पाण्डे और अमर उजाला के वरिष्‍ठ पत्रकार भाष्कर पोखरियाल ने दिया जला और अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी जी के चित्र पर माल्यापर्ण कर की। गोष्ठी की अध्यक्षता उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के नैनीताल जिले के अध्यक्ष विपिन चन्द्रा ने की।

गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता यूनियन के महासचिव प्रयाग पाण्डे ने कहा कि पत्रकारिता और समाज का बहुत बड़ा और घनिष्ठ सम्बन्ध रहा है। पत्रकारिता ने समाज को सही राह दिखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आजादी के आंदोलन में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने पत्रकारिता को ढाल के रूप में इस्तेमाल किया। अमर शहीद श्री गणेश शंकर विद्यार्थी जी भी इन्हीं में से एक थे। इसीलिए गणेश शंकर विद्यार्थी जी एक व्यक्ति नहीं, एक युग का नाम है। गणेश शंकर विद्यार्थी जी हिंदी पत्रकारिता के वह ध्रुव तारा बन गए, जिसकी रोशनी न कभी कम हो सकती है और न खतम।

उन्होंने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी जी ने कलम द्वारा समाज सुधार की क्रांति को जन्म दिया। उन्होंने कलम को तलवार से ज्यादा ताकतवर बना अंग्रेजी शासन की नींव हिला कर रख दी थी। गणेश शंकर विद्यार्थी जी ने सिर्फ "प्रताप" का ही सम्पादन नहीं किया। केवल ख़बरें ही नहीं लिखीं। बल्कि उन्होंने समाज की बेहतरी के लिए हर क्षेत्र में भागीदारी की। संघर्ष किया। वे ब्रिटिश साम्राज्यवाद  की सभी बुराइयों के साथ भारतीय समाज के भीतर फैली बुराइयों और देशी पूंजीवाद और सामन्तवाद से भी लड़े।

गणेश शंकर विद्यार्थी जी ने आजादी की लड़ाई को सिर्फ ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खात्मे तक ही सीमित नहीं रखा। बल्कि गणेश शंकर विद्यार्थी जी देश के भीतर मौजूद आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक विषमताओं के खिलाफ भी जमकर संघर्ष किया। गणेश शंकर विद्यार्थी जी अगर अमर हो गए तो सिर्फ इसी कारण कि उन्होंने सिर्फ ख़बरें ही नहीं लिख, बल्कि समाज के प्रत्येक क्षेत्र में प्रत्यक्ष भागीदारी की। समाज को सफल नेतृत्व दिया। पत्रकारिता के लिए खुद आचार संहिता बनाई और आदर्श तय किए। उनका ईमानदारी से पालन भी किया। प्रयाग पाण्डे ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी जी ने पत्रकारिता के माध्यम से जनमानस में अपनी और पत्रकारिता की जो पहचान बनाई, वह आज के सन्दर्भ में और अधिक सार्थक और प्रासंगिक है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर की पत्रकारिता और पत्रकारों को गणेश शंकर विद्यार्थी जी की भूमिका में आने की जरूरत है। क्योंकि मौजूदा पत्रकारिता के मूल्यों/सरोकारों और वैचारिक स्तर पर आ रही जबरदस्त गिरावट न केवल पत्रकारों और पत्रकारिता के लिए बल्कि समाज और लोकतंत्र के लिए भी बेहद घातक है। नई खुली अर्थव्यवस्था, बाजारवाद और उपभोक्तावाद ने पत्रकारिता को भी संवेदनहीन बना दिया है। संवेदनहीनता ने पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिंह लगा दिए हैं। इस लिहाज से आज गणेश शंकर विद्यार्थी जी को याद करना बेहद जरुरी हो गया है। ताकि भारतीय  पत्रकारिता के गौरवशाली अतीत का स्मरण कर भविष्य के लिए उर्जा हासिल की जा सके।

इस मौके पर वरिष्‍ठ पत्रकार दिनेश मानसेरा ने मौजूदा वक्त में पत्रकारिता के समक्ष पेश आ रही चुनौतियों का जिक्र किया। कहा कि पत्रकारों के पेशेवराना दक्षता को बढ़ाने के लिए समय-समय पर बौद्धिक विचार गोष्ठियों का आयोजन किया जाना जरुरी है। अमर उजाला के वरिष्ठ पत्रकार भास्‍कर पोखरियाल ने कहा कि आज जबकि समूची पत्रकारिता के साख और सरोकारों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे नाजुक मौके पर "प्रताप" और गणेश शंकर विद्यार्थी जी के दौर की पत्रकारिता को याद किया जाना समसामयिक ही नहीं, बेहद जरुरी है।

जिला अध्यक्ष विपिन चंद्रा ने हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में गणेश शंकर विद्यार्थी जी की भूमिका और योगदान को याद किया। कहा कि उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन "प्रताप" के सौवें साल के मौके पर "आत्मोत्सर्ग की पत्रकारिता के सौ साल" कार्यक्रम आयोजित कर, नई पीढ़ी के पत्रकारों को विद्यार्थी जी की पत्रकारिता से वाकिफ करने का प्रयास कर रही है। ओपी पाण्डे ने मौजूदा पत्रकारिता के गिरते स्तर पर गंभीर चिंता जताई। कहा कि  आज के पत्रकार ने जनपक्षीय मुद्दों के लिए लिखना और लड़ना छोड़ दिया है। पत्रकारिता आत्म केन्द्रित होकर रह गई है। बैठक में दैनिक जागरण के पत्रकार नाजिम मिकरानी और गोविन्द सनवाल, हिंदुस्तान के वरिष्ठ पत्रकार अजय जोशी, गिरीश गोस्वामी, रवि दुर्गापाल, पंकज पाण्डे ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

यूनियन के प्रन्तीय उपाध्यक्ष पंकज वार्ष्णेय ने कहा कि आज "आत्मोत्सर्ग की पत्रकारिता के सौ साल" कार्यक्रम की शुरुआत भर है। "प्रताप" और गणेश शंकर विद्यार्थी जी से जुड़ी ज्ञात विभिन्न तिथियों में उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की प्रदेश भर की समस्त नगर और जिला इकाईयों द्वारा इस साल नौ नवम्बर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे। उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की उत्तराखंड की सभी नगर और जिला इकाईयां 25 मार्च, 2013 को "शहीद दिवस", 22 अप्रैल, 6 जुलाई और 30 अक्तूबर 2013 को "दमन- विरोधी दिवस" मनाएंगी। 8 जुलाई, 2013 को "जन – सहयोग दिवस", 26 अक्तूबर तथा 9 नवंबर 2013 को "अभ्युदय दिवस" मनाया जायेगा।

इसके अलावा इस अवधि में यूनियन की सभी नगर और जिला इकाइयां अपनी सुविधानुसार अपने क्षेत्र के स्कूल – कालेजों में "प्रताप" और विद्यार्थी जी के जीवन एवं पत्रकारिता के उच्च आदर्शों पर आधारित विचार – गोष्ठियों का आयोजन करेंगी। यूनियन द्वारा विद्यार्थी जी द्वारा स्थापित मूल्यपरक और जनपक्षीय पत्रकारिता के आदर्शो और अख़बार और पत्रकारों के लिए सुझाई आचार संहिता पर केन्द्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन किया जायेगा। इस सेमीनार का स्थान और तिथि यूनियन की प्रांतीय कार्यकारिणी द्वारा बाद घोषित की जाएगी। "प्रताप" के "अभ्युदय" के दिन 9 नवंबर 2013 को कार्यक्रमों का समापन होगा।

उधर गढ़वाल के मंडल मुख्यालय पौड़ी में यूनियन के प्रांतीय सचिव त्रिभुवन उनियाल के नेतृत्व में "आत्मोसर्ग की पत्रकारिता के सौ साल" कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस मौके पर दर्जनों पत्रकारों ने अपने विचार प्रकट किए। पहली जनवरी के दिन ही हिमालय की तलहटी में बसे कुमाऊँ के सीमांत जनपद पिथौरागढ में उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की पिथौरागढ जिला इकाई ने भी "प्रताप" और गणेश शंकर विद्यार्थी जी के आदर्श पत्रकारीय जीवन को लेकर विचार गोष्ठी का आयोजन किया। यूनियन के जिला अध्यक्ष जगदीश कलौनी की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में हाड़ कपाती ठण्ड के वावजूद सीमांत क्षेत्र के दो दर्जन से ज्यादा पत्रकारों ने हिस्सा लिया। गोष्ठी में "प्रताप" और गणेश शंकर विद्यार्थी जी की जनपक्षीय पत्रकारिता का स्मरण किया गया।

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