पोंटी और हरदीप को नामधारी ने मारी थीं गोलियां?

 

नई दिल्ली : तो क्या छतरपुर में फार्म हाउस संख्या 42 पर हुई फायरिंग में पोंटी चड्ढा और उनके छोटे भाई हरदीप को सुखदेव सिंह नामधारी ने गोलियां मारी थी! जांच में नामधारी द्वारा प्वाइंट 30 बोर की पिस्टल से फायरिंग करने की बात सामने आने के बाद पुलिस की जांच इस दिशा में घूमती नजर आ रही है। अधिकारियों के अनुसार नामधारी के पास मौजूद पिस्टल का लाइसेंस नहीं था। बावजूद अपने गुडों के साथ फार्म हाउस पर कब्जा करने नामधारी पिस्टल को साथ लेकर आया था। घटना के समय फायरिंग करने तथा पिस्टल की बात उसने पुलिस से छिपाई थी। इससे साबित हो रहा है कि उसके इरादे नेक नहीं थे।
 
पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस पूरे मामले में कई चीजें अभी स्पष्ट होना बाकी हैं। लेकिन जिस प्रकार पोस्टमार्टम के दौरान पोंटी चड्ढा के शरीर से प्वाइंट 30 बोर की गोलियां मिली और अब नामधारी द्वारा प्वाइंट 30 बोर की पिस्टल के प्रयोग करने की बात सामने आई है। उसके बाद यह जांचना बेहद जरूरी हो गया है कि कहीं नामधारी की गोली भी तो पोंटी को नहीं लगी। हालांकि हरदीप के पास भी प्वाइंट 30 बोर की पिस्टल थी। किस पिस्टल से निकली गोली से पोंटी की मौत हुई इसका पता बैलेस्टिक एक्सपर्ट लगाएंगे। हरदीप की पिस्टल तथा गोली के खाली खोखे जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। वहीं नामधारी से पिस्टल बरामदगी का प्रयास हो रहा है।
 
दूसरी तरफ घटना के प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि सचिन त्यागी और नामधारी दोनों ने हरदीप पर फायरिंग की। फार्म हाउस के गेट पर हुई गोलीबारी में शरीर में दो गोलियां (छाती और फेफड़े) लगने के बाद भी वह पैदल चलकर गेट के समीप बने गार्ड रूम तक पहुंच गया था। सचिन त्यागी कारबाइन से गोली चला रहा था जबकि नामधारी के हाथ में पिस्टल थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या कारबाइन की गोली लगने के बाद कोई जमीन पर गिरे बिना गार्ड रूम तक जा सकता है?
 
सूत्रों की मानें तो पुलिस को इस बात का पूरा अंदेशा है कि हरदीप को नामधारी की गोली लगी है। लेकिन बैलेस्टिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट आने तक फिलहाल कोई अधिकारी खुलकर बोलने से बच रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक जितने साक्ष्य सामने आए हैं उनसे नामधारी का इस केस से बच निकलना कठिन है। जांच से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार नामधारी के पास उत्तराखण्ड का लाइसेंस है। लेकिन वह अवैध रूप से अपनी पिस्टल दिल्ली लेकर आया। कब्जा करने वाले उसके गुंडे भी घटनास्थल के तत्काल बाद वारदात स्थल से गायब हो गए। पुलिस पूछताछ में नामधारी ने आत्मरक्षा में तीन गोलियां चलाने की बात कही है। लेकिन वारदात के बाद 17 नवंबर को ही महरौली थाने में दर्ज कराई एफआईआर में उसने ऐसी किसी भी बात का जिक्र नहीं किया। (जागरण)

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