पोंटी चड्ढा हत्‍याकांड में छह की गिरफ्तारी, मामला अब भी रहस्‍य के घेरे में

 

नई दिल्ली । छतरपुर स्थित 12 एकड़ के फॉर्म हाउस पर मालिकाना हक के विवाद को लेकर हुए खूनी संघर्ष में मारे गए शराब व रीयल एस्टेट के बड़े कारोबारी पॉन्टी चड्ढा व हरदीप सिंह चड्ढा मामले में अभी तक छह लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। इनमें पॉन्टी को 2 पर्सनल गार्ड भी शामिल हैं। बावजूद इसके यह मामला सुलझने के बजाय उलझता ही जा रहा है। घटना के दो दिन बीतने के बाद भी पुलिस बिखरी कड़िया जोड़ने में लगी है।
 
पुलिस ने पॉन्टी चड्ढा के फार्महाउस में घुसपैठ करने के आरोप में 4 और लोगों को गिरफ्तार किया है। हालाकि इन लोगों की गिरफ्तारी हत्या के आरोप में नहीं हुई है, लेकिन पुलिस को उम्मीद है कि अगर ये लोग घटना के वक्त वहा मौजूद रहे होंगे, तो वे पूरे मामले की हकीकत से पर्दा उठा सकते हैं। इन गिरफ्तारियों के साथ ही पुलिस ने इस हत्याकाड के सिलसिले में अब तक कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स बार-बार घटना का रीक्रिएट करने की कोशिश कर रहे थे। फार्म हाउस में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की रेकॉर्डिंग को भी अपने कब्जे में लिया गया।
 
पुलिस सूत्रों की मानें तो गोलीबारी में पाच अलग-अलग तरह के हथियारों का इस्तेमाल हुआ। पॉन्टी व हरदीप को दो तरह के हथियारों की गोलिया लगी हैं। पुलिस फायरिंग में प्रयुक्त तीन अन्य हथियार किसके थे? उनसे कितनी गोलिया चलाई गई? इस बात का पता लगाने में पुलिस जुटी हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सोमवार को डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट दे दी है, जिसमें नया खुलासा सामने आया है कि पोंटी को चार गोलिया लगी थीं और हरदीप को दो गोलिया लगी थीं।
 
किसकी थी प्वाइंट 30 पिस्टल : पुलिस अधिकारियों के अनुसार शनिवार को घटना वाले दिन फार्म हाउस परिसर से तीन तरह के हथियार व मौका-ए-वारदात यानी फार्म हाउस नंबर-42 के गेट से दो तरह के हथियारों के खाली खोखे मिले। चौकाने वाली बात यह है कि पॉन्टी चड्ढा के शरीर से निकाली गई चार गोलियों में कुछ प्वाइंट 30 पिस्टल की गोलिया भी हैं। जबकि इस तरह की पिस्टल मौके से बरामद नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि प्वाइंट 30 पिस्टल की गोली लगने से किसी का बच पाना नामुमकिन ही होता है। इस हथियार का लाइसेंस विशेष अनुमति के आधार पर ही दिया जाता है। जिस पिस्टल से यह गोली चली, वह किसकी थी यह अभी तक पता नहीं चल पाया है।
 
अब तक यही माना जा रहा है कि पॉन्टी को उनके भाई हरदीप ने ही अपनी लाइसेंसी पिस्टल से गोली मारी है। मौके से जो दो पिस्टल बरामद हुई हैं वे 7.65 व 7.62 की हैं। दोनों हरदीप की बताई जा रही हैं। पुलिस द्वारा रविवार को दोबारा पॉन्टी के शव का पोस्टमार्टम कराने की एक बड़ी वजह यह भी थी। पुलिस फार्म हाउस में मिले खोखों एवं पोंटी के शरीर से निकली गोलियों का मिलान कराना चाहती थी। हरदीप के शरीर से नाइन एमएम की दो गोलिया निकली हैं। माना जा रहा है कि वे गोलिया सचिन त्यागी की कारबाइन की हैं। सचिन उत्तराखंड के अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन सुखदेव सिंह नामधारी का पीएसओ है। हाईप्रोफाइल मामला होने के कारण पुलिस अधिकारी खुलकर इस मामले में कुछ नहीं बोल रहे। डर भी है कि कहीं भविष्य में चड्ढा परिवार द्वारा जांच पर कोई आरोप न लगाया जाए और खामियाजा उन्हें भुगतना पड़े।
 
पुलिस की भूमिका पर सवाल : हालाकि इस प्रकरण में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि शनिवार की सुबह साढ़े 10 बजे जब पॉन्टी के करीब तीन दर्जन लोगों ने फार्म हाउस नंबर 42 पर धावा बोला था तो वह करीब एक घटे तक रुके थे। फार्म हाउस पर कब्जा कर भगाए जाने के बाद पूर्वाह्न 11.55 पर पहली बार हरदीप के लोगों ने पुलिस को कॉल कर घटना की जानकारी दे दी थी। लेकिन पुलिस वहां नहीं पहुंची। ऐसे में थाना पुलिस के दबाव में होने की बात भी कही जा रही है। दोपहर 12.28 पर जब दूसरी बार कॉल की गई तब पुलिस मौके पर पहुंची।
 
पुलिस और नामधारी के बयान जुदा : यह मामला सोमवार को तब और पेचीदा हो गया जब संयुक्त पुलिस आयुक्त विवेक गोगिया ने कहा कि साढ़े 12 बजे झगड़े की कॉल मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची तो गेट पर ही हरदीप की लाश मिली। जबकि पॉन्टी के साथ मौजूद सुखदेव सिंह नामधारी ने एफआइआर में कहा है कि पॉन्टी व नरेंद्र को गोली मारने वाले हरदीप पर उनके पीएसओ सचिन त्यागी ने फायरिंग की थी। उन्होंने घायल पॉन्टी को लेकर खुद फोर्टिस अस्पताल चले जाने एवं हरदीप के फार्म हाउस के अंदर जाने की बात कही है। वहीं, जिस टाटा 407 से पॉन्टी चड्ढा के लोग फार्म हाउस पर कब्जा करने आए थे उसके मालिक का भी पुलिस पता नहीं लगा पाई है। (जागरण)

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