बड़ा घोटाला : केवल छह जगहों से रजिस्‍टर्ड दैनिक जागरण पूरे यूपी में कर रहा है प्रकाशन!

खुद को नम्‍बर एक अखबार कहने वाला दैनिक जागरण फर्जीवाड़ा में भी नम्‍बर एक के पायदान पर चढ़ता दिख रहा है. अगर आरएनआई की सूचना को सही माने तो यह अखबार यूपी में कई जगह से फर्जी तरीके से अखबार का प्रकाशन कर रहा है. फर्जी एडिशनों के जरिए यह अखबार करोड़ों का सरकारी विज्ञापन उगाह चुका है. जानकारियों में अब इस अखबार तथा इसके प्रबंधन की कलई लगातार खुलती जा रही है. जिस तरह से इस अखबार के फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है, उससे साफ लगता है कि देर सबेर इसके कर्ताधर्ताओं को जेल जाना ही पड़ेगा. धीरे धीरे खुलासा हो रहा है कि इस अखबार ने किस तरह से सबको धोखा देकर माल बटोरा है.

देश का यह नम्‍बर वन अखबार यूपी में मात्र छह जगहों से रजिस्‍टर्ड है. रमन कुमार यादव द्वारा आरएनआई से मांगी गई सूचना अधिकार से इस बात का खुलासा हुआ है. सूचना में जानकारी दी गई है कि उत्‍तर प्रदेश में यह अखबार मात्र छह जगहों से प्रकाशित हो रहा है. जिन जगहों से इस अखबार का रजिस्‍ट्रेशन कराया गया है उसमें कानपुर, मेरठ, बरेली, लखनऊ, गोरखपुर और झांसी शामिल है. इसमें भी दिलचस्‍प बात यह है कि पांच जगहों के संपादक तो संजय गुप्‍ता हैं, लेकिन झांसी वाले एडिशन के संपादक यशवर्द्धन गुप्‍ता हैं. इनमें अभी तक जिन पब्लिशर का नाम तमाम एडिशनों में दिखाया जा रहा है उनमें कई लोग संस्‍थान से अलग हो चुके हैं. गोरखपुर से शैलेंद्र मणि त्रिपाठी तथा बरेली से चंद्रकांत त्रिपाठी जागरण से हट चुके हैं, वहीं लखनऊ के पब्लिशर दिखाए गए विनोद शुक्‍ला की मौत हो चुकी है.

आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार इन छह जगहों के अलावा दैनिक जागरण के नाम से इस अखबार का कहीं भी रजिस्‍ट्रेशन नहीं है. इससे साफ है कि अन्‍य जिलों एवं जिन स्‍थानों से यह अखबार प्रकाशित हो रहा है वो पूर्ण रूप से फर्जी है. ऐसे ही फर्जी प्रकाशन के चलते बिहार में इस अखबार के प्रबंधन के खिलाफ मुजफ्फरपुर में मामला कोर्ट में दायर किया गया है. जिस पर जल्‍द ही कोर्ट सुनवाई करने वाला है. इस मामले में कई लोगों की गवाही भी हो चुकी है. बिहार में इसी आधार पर मुकदमा दायर किया गया है कि यह अखबार गलत रजिस्‍ट्रेशन के आधार पर अरबों का सरकारी विज्ञापन अवैध ढंग से डकार चुका है.

बताया जा रहा है कि अब जल्‍द ही ऐसी ही कार्रवाई यूपी में भी किए जाने की तैयारी की जा रही है. सारी सूचनाएं एकत्रित करने के बाद इसके खिलाफ केस किए जाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं. बताया जा रहा है अगर इस मामले में सरकारी मशीनरी तथा अन्‍य जिम्‍मेदार संस्‍थाओं ने ईमानदारी से अपना काम किया तो एक बहुत बड़े घोटाले पर से तो पर्दा उठेगा ही, दैनिक जागरण के तमाम कर्ताधार्ता भी आईपीसी की कई धाराओं में जेल की सलाखों के पीछे होंगे. गौरतलब है कि हिंदुस्‍तान के खिलाफ ऐसे ही भ्रष्‍टाचार के आरोप में दाखिल हुए केस में हाई कोर्ट ने मामले की जांच रिपोर्ट मात्र तीन महीने में पेश करने का आदेश दिया है.

पटना हाई कोर्ट ने हिंदुस्‍तान के मामले में उसकी एफआईआर निरस्‍त करने की अपील भी खारिज कर दी थी. बिहार में जागरण भी ऐसे ही शिकंजे में फंसा हुआ है. कोर्ट से आदेश होते ही इसके निदेशकों तथा संपादकों के ऊपर भी गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगेगी. अब देखना होगा कि अपने को तुर्रम खां समझने वाले दैनिक जागरण के कर्ताधर्ता अपनी इन हेराफेरियों में सजा पाने से किस तरीके से बचते हैं. खबर है कि जल्‍द ही यूपी में भी जागरण के फर्जी प्रकाशनों के खिलाफ मामला दर्ज कराया जाने वाला है. लोग कानूनी प्रक्रिया समझने की कोशिश कर रहे हैं. नीचे देखिए आरटीआई से मिली जानकारी में जागरण के वैध प्रकाशनों की लिस्‍ट.

 

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