बिना कागज़ात नौकरी कर गए पूर्व कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह?

आरटीआई एक्ट तथा शासकीय अभिलेखों के आधार पर सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश को पत्र लिख कर पूर्व कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह के सेवा अभिलेख सम्बंधित मामले की जांच कराने की मांग की है. सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत देवेन्द्र कुमार दीक्षित, लखनऊ द्वारा नियुक्ति विभाग और नागरिक उड्डयन निदेशालय से शशांक शेखर सिंह की जन्मतिथि, शैक्षिक योग्यताओं, तकनीकी योग्यताओं तथा उनकी प्रथम नियुक्ति से अंत तक की चरित्र पंजिका जैसी कई जानकारियाँ मांगी गयी थी. इस सम्बन्ध में नागरिक उड्डयन निदेशालय के पत्र दिनांक 16 मई 2012 द्वारा बताया गया कि इनमें से कोई भी सूचना निदेशालय में उपलब्ध नहीं है. नियुक्ति विभाग भी कोई सूचना उपलब्ध नहीं करा सका.

इसी बीच 19 अप्रैल 1990 का विशेष सचिव, नियुक्ति तथा कार्मिक, उत्तर प्रदेश शासन को लिखा एक शासकीय अभिलेख सामने आया है जिसमे लिखा है- “कैप्टन शशांक शेखर सिंह से अभी तक उनका बायोडाटा तथा चरित्र पंजिका प्राप्त नहीं हुई है. श्री सिंह को अनुस्मारक करने के लिए आलेख सचिव महोदया के अनुमोदनार्थ प्रस्तुत है.” अनुभाग के इस नोट पर उस समय की नियुक्ति सचिव नीरा यादव का नोट दिनांक 20 अप्रैल 1990 अंकित है- “मैंने श्री सिंह से पुनः व्यक्तिगत रूप से अनुरोध कर उनको रिमाइन्ड करा दिया है.” इन तथ्यों के आधार पर ठाकुर ने कहा है कि यह पूरा प्रकरण अत्यंत संदिग्ध दिखता है और उन्होंने शशांक शेखर के सेवा अभिलेख प्रकरण की तत्काल जांच करा कर उचित कार्रवाई किये जाने की मांग की है.

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