बिना रजिस्‍ट्रेशन दैनिक जागरण ने भी करोड़ों का विज्ञापन लूटा, कोर्ट में दायर परिवाद से मामला खुला

: मामला उजागर करने वालों को दी जा रही धमकी : मुजफफरपुर (बिहार) :  दैनिक हिन्दुस्तान के लगभग 200 करोड़ के सरकारी विज्ञापन घोटाले की आग अभी देश में बुझी भी नहीं थीं कि अब दैनिक जागरण  के सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा ने पूरी दुनिया में कारपोरेट प्रिंट मीडिया के असली चेहरा को नंगा कर दिया है। सरकारी विज्ञापन घोटालों के उजागर होने से  दैनिक हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण के प्रबंधन की नींद उड़ गर्इ हैं। प्रबंधन ने पूरे देश में अपने संस्थान के आर्थिक अपराध को उजागर करने वाले देश के आरटीआर्इ के क्रांतिकारियों को सफाया करने की धमकी दे दी है। मुजफ्फरपुर और मुंगेर के गवाहों को दोनों अखबारों से जुड़े व्यक्तियों की ओर से लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। इस बीच, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अपील की गर्इ है कि मुख्य न्यायाधीश बिहार में दैनिक जागरण और दैनिक हिन्दुस्तान के सरकारी विज्ञापन घोटालों से जुड़े पुलिस अनुसंधान की मोनिटरिंग स्वयं अपने हाथ में ले लें। सर्वोच्च न्यायालय हर माह पुलिस अनुसंधान का स्वयं मोनिटरिंग करें।

 
इस बीच, मुजफफरपुर जिला मुख्यालय में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सुरेन्द्र प्रताप सिंह के न्यायालय में दायर परिवाद-पत्र, जिसकी संख्या-2638/ 2012 है, में परिवादी रमण कुमार यादव ने परिवाद-पत्र की पृष्ठ संख्या-04 और 05 पर दैनिक जागरण के सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा को विस्तार से न्यायालय में उजागर किया है। परिवाद -पत्र में परिवादी रमण कुमार यादव ने दैनिक जागरण के विज्ञापन फर्जीवाड़ा की बारीकियों को कानून की पृष्ठभूमि में दुनिया के समक्ष लाया है।
 
परिवाद-पत्र में परविदी रमण कुमार यादव ने पृष्ठ-04 और पृष्ठ -05 पर आरोप लगाया है कि''समाचार पत्र के प्रकाशन के पूर्व प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट -1867 की विभिन्न धाराओं के अन्तर्गत दिए गए प्रावधानों का अक्षरश: पालन करना समाचार-पत्र के किसी भी प्रकाशन के लिए कानूनी बाध्यता है। इस कानून का उल्लंघन दंडनीय अपराध है। दैनिक जागरण का प्रबंधन देश के जिन-जिन स्थानों से दैनिक जागरण का मुद्रण, प्रकाशन और वितरण कर रहा है, उन-उन स्थानों/नगरों/शहरों में अखबार का विधिवत छापाखाना और संपादकीय कार्यालय संचालन हो रहा है और उन-उन स्थान विशेष/ नगर/शहर के लिए स्थानीय समाचारों की प्रमुखता के साथ विशेष संस्करणों/प्रकाशनों को प्रकाशित कर रहा है।
  
बिहार सहित पड़ोसी राज्यों मे अलग-अलग छापाखानों से अलग-अलग स्थानीय समाचारों की प्रमुखता से मुद्रित, प्रकाशित और वितरित दैनिक जागरण के सभी अलग-अलग संस्करणों के लिए अलग-अलग स्थानीय संपादक नियुक्त रहते हैं जो प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धाराएं 5 (1), 5 (2), 5 (2ए), 5(2बी) और 5 (2सी) के अन्तर्गत हैं। जागरण प्रबंधन अपने समाचार-पत्र दैनिक जागरण के माध्यम से निजी क्षेत्रों के अतिरिक्त केन्द्र एवं राज्य सरकारों से सरकारी विज्ञापन प्राप्त कर प्रति वर्ष करोड़ों-करोड़ों का आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहा है।
 
केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, उपक्रमों और विभागों से संबंधित सरकारी विज्ञापन डीएवीपी, नर्इ दिल्ली और राज्य सरकार (बिहार) के विभिन्न विभागों, उपक्रमों, निगमों, नगर परिषदों से संबंधित सरकारी विज्ञापन राज्य के सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय (पटना,बिहार) के माध्यम से दैनिक अखबारों को प्राप्त होता है। 6 मार्च, 2008 के पूर्व बिहार में जिलों-जिलों में बिहार सरकार के विभागों के द्वारा सरकारी विज्ञापन सीधे तौर पर समाचार-पत्रों कोप्रकाशन हेतु भेजा जाता था। 15 अगस्त और 26 जनवरी को प्रत्येक वर्ष सजावटी विज्ञापन भी समाचार-पत्र सरकारी कार्यालयों से सीधे प्राप्त कर लेते थे। परन्तु 6 मार्च, 2008 के बाद बिहार सरकार के द्वारा 'बिहार विज्ञापन नीति -2008' की घोषणा होने के बाद सरकार द्वारा केवल 'सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय, पटना के माध्यम से सीधे समाचार -पत्रों को सरकारी विज्ञापन निर्गत करने की व्यवस्था चालू की गर्इ है जो अभी तक जारी है।
 
समाचार-पत्रों को सरकारी विज्ञापन प्रकाशन के बाद सरकार सरकारी मद से समाचार -पत्रों को विज्ञापन विपत्र का भुगतान करती है। वर्ष 18 अप्रैल, 2005 से दैनिक जागरण का मुद्रण, प्रकाशन, वितरण मुजफ्फरपुर मुख्यालय में उमाशंकर मार्ग, रमना, पानी टंकी चौक, रमना, मुजफ्फरपुर स्थित दैनिक जागरण प्रेस से शुरू कर दिया जो लगातार आज की तिथि तक जारी है।
 
जागरण कंपनी ने 01 जनवरी 1857 से 2, सर्वोदयनगर, कानपुर (त्तर प्रदेश) टाइटल कोड-यूपीएचआर्इएन 13545/ निबंधन संख्या-2017 दिनांक 01-01-1957 स्थित प्रिंटिंग प्रेस से दैनिक जागरण का प्रकाशन शुरू किया और आरएनआर्इ नं0-2017 प्रेस रजिस्ट्रार, नर्इ दिल्ली से प्राप्त किया। इसी टाइटल पर स्थानीय समाचारों की प्रमुखता के साथ कंपनी ने 11 फरवरी, 1999 को गोरखपुर के 23 सिविल लाइन्स, गोरखपुर स्थित प्रिटिंग प्रेस टाइटल कोड-यूपीएचआर्इएन 26566/ निबंधन संख्या-26729, दिनांक 11-02-1999 और लखनउ के 75, हजरतगंज, लखनउ, उत्तर प्रदेश, टाइटल कोड – यूपीएचआर्इएन 26572, निबंधन संख्या-35496, दिनांक 11-02-1999 स्थित प्रिंटिंग प्रेस से दैनिक जागरण के नए संस्करणों का मुद्रण, प्रकाशन और वितरण किया।
  
पुन: बिहार के स्थानीय समाचारों की प्रमुखता के साथ कंपनी ने 12 अप्रैल, 2000 से पटना स्थित 5 फलोर, रशिम कम्पलेक्स, 172/92/ 11-बी- 2, सर्किल 243, किदवर्इपुरी, पटना (बिहार) से दैनिक जागरण के नए बिहार संस्करणका मुद्रण, प्रकाशन और वितरण शुरू किया और कंपनी ने 22 मार्च 2001 को बी आर्इएचएचआर्इएन/2000/03097 (नया निबंधन) प्राप्त किया। इसी टाइटल से कंपनी ने मुजफ्फरपुर स्थित उमाशंकर मार्ग, रमना, पानी टंकी चौक, मुजफ्फरपुर के नए जागरण प्रकाशन प्रेस से 18 अप्रैल, 2005 से दैनिक जागरण का नया संस्करण स्थानीय समाचारों की प्रमुखता के साथ मुद्रण, प्रकाशन और वितरण शुरू कर दिया। कंपनी ने मुजफ्फरपुर स्थित नए जागरण प्रिटिंग प्रेस से दैनिक जागरण अखबार का मुद्रण, प्रकाशन अैर वितरण प्रेस रजिस्ट्रार, नर्इ दिल्ली की अनुमति प्राप्त किए बिना ही शुरू कर दिया।''
 
स्मरणीय है कि विश्व के दूसरे सबसे बड़े सनसनीखेज  दैनिक जागरण के करोड़ों के सरकरी विज्ञापन घोटाले के संबंध में बिहार के मुजफ्फरपुर जिला मुख्यालय में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में रमन कुमार यादव ने मेसर्स जागरण प्रकाशन लिमिटेड (जागरण बिलिडंग,  2, सर्वोदयनगर, कानपुर-208005) के चेयरमैन महेन्द्र मोहन गुप्ता सहित कुल सत्रह व्‍यक्तियों के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराएं 120 (बी), 420, 471, 476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुकस एक्ट, 1867 की धाराएं 8 (बी), 12, 13, 14 और 15 के अन्तर्गत ''परिवाद-पत्र'' दायर किया है। परिवादी ने न्यायालय से मुकदमा को तजबीज कर संज्ञान लेकर द्वितीय पक्षों के विरूद्ध सम्मन निर्गत करने या पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर देश व्यापी विज्ञापन घोटाले में गहरे अनुसंधान का आदेश देने की प्रार्थना की है।
  
न्यायालय के आदेश पर परिवादी रमण कुमार यादव ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में शपथ पर अपना बयान दर्ज करा दिया है और परिवाद-पत्र में लगाए आरोपों का समर्थन किया है। प्रथम गवाह कंचन शर्मा (मुंगेर निवासी) ने भी न्यायालय में अपने बयान में परिवाद-पत्र में वर्णित आरोपों का समर्थन किया है। दो अन्य गवाह क्रमश: श्रीकृष्ण प्रसाद (अधिवक्ता, मुंगेर) और बिपिन कुमार मंडल (अधिवक्ता, मुंगेर) का बयान कोर्ट में दर्ज होना है।
 
परिवाद-पत्र में मेसर्स जागरण प्रकाशन लिमिटेड के जिन लोगों के विरूद्ध ''परिवाद-पत्र'' दायर किया गया है, उनमें शामिल हैं–(1) चेयरमैन  सह प्रबंध निदेशक  महेन्द्र मोहन गुप्ता, (2)  सी0र्इ0ओ0 सह संपादक संजय गुप्ता, (3) पूर्णकालिक निदेशक धीरेन्द्र मोहन गुप्ता, (4)  पूर्णकालिक निदेशक सह संपादक सुनील गुप्ता, (5) पूर्णकालीक निदेशक शैलेश गुप्ता, (6) स्वतंत्र निदेशक भारतजी अग्रवाल, (7) स्वतंत्र निदेशक किशोर बियानी, (8) स्वतंत्र निदेशक नरेश मोहन, (9) स्वतंत्र निदेशक  आर0 के0 झुनझुनवाला, (10) स्वतंत्र निदेशक रशिद मिर्जा, (11) स्वतंत्र निदेशक शशिधर नारायण सिन्हा, (12) स्वतंत्र निदेशक  विजय टंडन, (13) स्वतंत्र निदेशक विक्रम बख्शी, (14) कंपनी सचिव अमित जयसवाल, (15) महाप्रबंधक और मुद्रक आनन्द त्रिपाठी, (16) वर्तमान स्थानीय संपादक, मुजफ्फरपुर देवेन्द्र राय और (17) संपादक शैलेन्द्र दीक्षित। नीचे  परिवाद-पत्र की पृष्ठ संख्या-04 और 05 की छायाप्रति।
 

एसके प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नम्‍बर 09470400813 के जरिए किया जा सकता है. 


 

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