भड़ास का जन्म होते ही लगने लगा की अभी भी पत्रकारिता हो सकती है

यशवंत भाई जी, नमस्‍कार। भड़ास के पांच साल (17 मई 2008 से 17 मई 2013) पूरे होने पर मेरी दिल से बधाई स्‍वीकार करें। यशवंत जी जिस जज्ज्बे के साथ अपने ये मुहिम चलाया हम सभी उसके लिए आपका तहेदिल से सुक्रगुजार हैं। भाई हम लोग तो पत्रकारिता पढ़े, लेकिन जब करने की बारी आई तो..हमारा हम पर ही हक न रहा।

एक टाइम तक बहुत घुटन सी महसूस होती रही ..लेकिन भड़ास का जन्म होते ही लगने लगा कि अभी भी पत्रकारिता हो सकती है। इतनी आर्थिक-सामाजिक मुश्किलें उस पर तुर्रा यह की चंद मीडिया मफियाओं का वर्चस्व सब साफ दिखा भड़ास के रस्ते में, लेकिन भड़ास और आप न रुके न थके! बस यही ज़ज्बा कायम रहे यही दुआ है।

कुंवर समीर शाही

समाचार संपादक

साकेत न्यूज़ चैनल

फैजाबाद 

9795503555

oursamadhan00@gmail.com


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