भड़ास जांच दल की रिपोर्ट : पुलिस की हेकड़ी से रायबरेली में भड़का पत्रकारों का गुस्‍सा

: रायबरेली के पत्रकार लाठीचार्ज प्रकरण की जांच के लिए कुमार सौवीर के नेतृत्‍व में दो सदस्यीय भड़ास जांच दल की रिपोर्ट : भड़ास4मीडिया के कंटेंट एडिटर अनिल सिंह भी थे जांच दल में : रायबरेली में पत्रकारों पर लाठीचार्ज के प्रकरण का सच जानने के लिए भड़ास4मीडिया का एक जांच दल वरिष्‍ठ पत्रकार कुमार सौवीर के नेतृत्‍व में रायबरेली गया। वहां पुलिस और पत्रकार, दोनों पक्षों से बात कर मामले की जानकारी प्राप्‍त की। वहां पर साफ नजर आया कि पत्रकारों में गुस्सा पुलिस की असंवेदनशीलता के कारण है। इसी असंवेदनशीलता का असर है कि पत्रकार तो पत्रकार अब आम आदमी भी पुलिस से नाराज है। अगर पुलिस ने तनिक भी दूरदर्शिता दिखाई होती तो शायद इस तरह की नौबत नहीं आ पाती।

पुलिस एवं प्रशासन की हेकड़ी ने पत्रकारों का गुस्‍सा और भड़का दिया है। साथ ही कई पत्रकारों पर मुकदमा लिखे जाने से पूरे रायबरेली में आक्रोश है।  रायबरेली में झगड़ा के दो पहलू सामने आये हैं। पत्रकारों के अनुसार मामला कुछ इस तरह है। 19 तारीख की दोपहर 11 बजे इंडिया टीवी के रिपोर्टर शिवप्रसाद यादव का भतीजा नितिन स्‍टेट बैंक की सिटी ब्रांच में अपने खाते में 40 हजार रुपये जमा कराने गया था। मुम्‍बई में मर्चेंट नेवी की पढ़ाई कर रहे नितिन को यह रकम अपने पढ़ाई के लिए उसकी मां ने दिया था। इन रुपयों को वो मुम्‍बई नकद ले जाने के बजाय यह रकम अपने खाते में डालनी चाही। उस समय शिक्षक अर्हता परीक्षार्थियों का प्रवेश फार्म जमा कराने वालों की भीड़ थी। वहां मौजूद पुलिसवालों ने नितिन को सीधे फार्म जमा करने वाली लाइन में लगाने को कहा।

इस पर नितिन ने बताया कि यह रकम उसे अपने खाते में जमा करना है, सीईटी के लिए नहीं। इस पर वहां परीक्षार्थियों की भीड़ से निपट रहे सिपाही को शायद यह बात समझ में नहीं आयी और उसने कॉलर घसीट कर झापड़ मार दिये और धक्‍का देकर जमीन पर गिरा दिया। इस पर नितिन ने भी विरोध किया। बात बढ़ गयी तो पुलिसवाले नितिन को लेकर कोतवाली ले गये जहां उसकी डेढ़ घंटों तक जमकर पिटाई की गयी।

उधर पुलिस में दर्ज करायी गयी एफआईआर में सिपाही ललित सागर ने कहा है कि नितिन समेत 2-3 लोग जबरन लाइन में घुस रहे थे। ललित ने ऐतराज किया तो उसे जातिसूचक गाली देते हुए उनकी नेमप्‍लेट नोंच डाली। ललित के आरोप के अनुसार वहां मौजूद होमगार्ड हरीराम को भी गालियां दी गयीं। आरोप के अनुसार विवाद बढ़ने पर ललित को उसके साथियों ने सुरक्षित कोतवाली पहुंचाया।

उधर, रायबरेली प्रेस क्‍लब के अध्‍यक्ष ओमप्रकाश मिश्र का कहना है कि बैंक में हुई घटना की खबर मिलने पर दर्जनों पत्रकार कोतवाली पहुंचे। लेकिन न तो कोतवाल संतोष द्विवेदी ने और न ही सीओ पंकज पांडेय ने कोई संतोषजनक जवाब दिया। इन अधिकारियों ने पत्रकारों को बताया कि ऐसा कोई मामला कोतवाली में अभी तक आया ही नहीं है। लेकिन पत्रकारों को अचानक पता चला कि नितिन को पुलिसवाले कोतवाली में बुरी तरह पीट रहे हैं। नितिन को बरामद करने की मांग अब तेज हो गयी। पत्रकारों ने कोतवाली के सामने धरना शुरू कर दिया। करीब 2 घंटे बाद पुलिसवालों ने नितिन को छोड़ा। दैनिक हिन्‍दुस्‍तान के प्रभारी अखिलेश बताते हैं कि कोतवाली से निकाले गये नितिन बेहोशी की हालत में था। उसके शरीर पर गहरी चोटें भी आयीं थी। एबीपी न्‍यूज के रामेंद्र के अनुसार जब इस पर अपर अधीक्षक राहुल राज से बात की गई तो उन्‍होंने खुद के जेल निरीक्षण पर होने की बात कही, जबकि लगातार चार घंटों तक पुलिस अधीक्षक प्रेम नारायण ने पत्रकारों का फोन तक नहीं उठाया। एसपी के घर और दफ्तर से लगातार यही बताया गया कि साहब जरूरी काम में व्‍यस्‍त हैं।

जनसंदेश टाइम्‍स के उपमेंद्र सिंह बताते हैं कि नितिन की बुरी हालत और पुलिस से कोई सुनवाई नहीं होने के कारण पत्रकारों ने इलाहाबाद-लखनऊ राष्‍ट्रीय राजमार्ग पर मामा चौराहे पर जाम लगा दिया। यह शाम चार बजे का वक्‍त था। जाम के चलते यह पूरा राष्‍ट्रीय मार्ग पर गाडि़यों की कतारें लग गयीं। पुलिस कंट्रोल पर खबर प्रसारित होने के बावजूद पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। लेकिन अचानक साढ़े पांच बजे भारी पुलिस के साथ एसपी मौके पर पहुंचे और वहां मौजूद पत्रकारों से बातचीत करने के बजाय सीधे लाठीचार्ज का आदेश दे दिया। रामेंद्र का आरोप है कि एसपी शराब के नशे में थे और पत्रकारों को गालियां देते हुए पुलिस को कहा कि मारो सालों को। अभी इन हरामजादों का दिमाग ठीक करता हूं। खैर, बाद में कोतवाल की तरफ से दर्ज करायी गयी एफआईआर में लिखा गया कि यह दर्जनों पत्रकार राजमार्ग पर अराजकता फैला रहे थे। एफआईआर में दस पत्रकारों को नामजद तथा कई अज्ञात बताते हुए पुलिस ने उन पर 7-क्रिमिनल लॉ एमेंडमेंट एक्‍ट समेत सात अन्‍य धाराएं भी थोप दीं।

कुछ भी हो, रायबरेली का माहौल बेहद तनावपूर्ण है। सीडीओ डॉक्‍टर अख्‍तर रियाज प्रभारी जिलाधिकारी का चार्ज देख रहे हैं, लेकिन पुलिस के मामले में कोई भी हस्‍तक्षेप नहीं करना चाहते। चर्चाएं तो यहां तक है कि प्रदेश सरकार के स्‍वास्‍थ चिकित्‍सा मंत्री अहमद हसन का खुद को भांजा बताने वाले रियाज अब किसी भी बात पर अपने शेर-शायरी की तुकबंदी पेश करते हैं, जो प्रधानों को जबरिया बेची गयीं किताबों में दर्ज है। इस किताब के लेखक भी रियाज ही है। चर्चाएं तो यहां तक हैं कि डीएम भी अवकाश पर रियाज के चलते ही गए हैं। एसपी प्रेम नारायण का कहना है कि गुंडई करने वाला कोई भी शख्‍स अपराधी है। वे खारिज करते हैं कि पुलिस ने पत्रकारों पर लाठीचार्ज किया था। हम तो केवल जाम हटाने के लिए वहां गये थे, जो हमारी प्राथमिकता है। प्रेम नारायण का आरोप है कि इस पूरे मामले में कुछ लोगों की साजिशें हैं, हम ऐसे लोगों को कैसे छूट दे सकते हैं।

अब चाहे भाजपा हो, कांग्रेसी या सपाई अथवा कम्‍युनिस्‍ट, इस हादसे पर पुलिस के खिलाफ है। एक प्रमुख व्‍यापार मंडल के अध्‍यक्ष आशीष द्विवेदी साफ कहते हैं कि हमें नहीं पता है कि शुरुआती गलती पुलिस ने की या पत्रकारों ने। लेकिन बुद्धिजीवियों पर इस तरह का लाठीचार्ज अब कैसे बर्दाश्‍त किया जा सकता है। सेंट्रल बार एसोसियेशन के अध्‍यक्ष ओपी यादव कहते हैं कि पूरा मामला हमारे सामने है और इसीलिए हम जिले की सारी अदालतों पर तब से ही लगातार काम बंद किये हैं। फौजदारी की कोर्ट खुलने पर वहां भी हड़ताल रहेगी। इंडियन मेडिकल एसोसियेशन के स्‍थानीय नेता सीबी सिंह बताते हैं कि हम सांकेतिक हड़ताल कर रहे हैं। लेकिन इतना पूरा हंगामा होने के बावजूद प्रभारी डीएम ने इस पूरे मामले में हस्‍तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि यह पूरा मामला पुलिस का है, वह ही इससे निपटेगी। यानी जनता और पुलिस-प्रशासन के बीच रस्‍साकशी का माहौल अभी बना रहेगा। जाहिर है कि इसमें पीसी जाएगी केवल जनता।

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