भास्कर और इंडिया टुडे का झूठ

Mohammad Anas : अब, जब तक मैं ख़बर के स्रोत को खुद न जांच लूँ, किसी प्रकार की टिप्पणी करने से बचूंगा. मीडिया का प्रोपगेंडा थी सीरिया में पत्थर मार कर मौत की सज़ा देने की बात. लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है की मनुस्मृति, खाप और शरिया अदालतें महिलाओं के प्रति इस तरह के फैसलों के लिए पहचानी नहीं जाती.

सीरिया में असद की बर्बरता के खिलाफ लोगों का साथ देने वाले विद्रोही गुट को बदनाम करने के लिए वैश्विक स्तर पर जिस 'फेसबुक अकाउंट' और 'पत्थर मार सज़ा' को प्रचारित किया गया वह कुछ वैसा ही है जैसे रेड कारीडोर में पूंजीवाद के खिलाफ लड़ रहे आदिवासियों को, आदिवासियों का ही असली दुश्मन होने की बात मीडिया कहती आई है. पत्रकारीय सरोकारिता का इससे फूहड़ दौर तो हिटलर के समय भी नहीं था. सेलेक्टिव ट्रुथ और फाल्स की थ्योरी कई बार जानबूझ कर लोग अपनाते हैं, और उन लोगों को समाज की बेहतरी से रत्ती भर सरोकार नहीं होता. ऐसे लोगों के प्रति बस सचेत रहा जा सकता.

हैरत की बात है की यह खबर जिन पोर्टल पर मिल रही है उनके नाम अजीब-ओ-गरीब हैं. सबसे मजेदार काम भास्कर और इंडिया टुडे के कापीराइटरों ने किया है. भास्कर ने अनुवाद उठा कर ठेल दिया तो इंडिया टुडे ने शब्द दर शब्द अंग्रेजी चेप दी. अरब जगत की खबर थी और अलजज़ीरा के पोर्टल पर ही नहीं मिली. साफ़ था, प्रोपगेंडा की जगह अलजज़ीरा पर नहीं होती. जिनकी नज़र में यह झूठ, एक खबर है वह इसे खबर मान कर एप्पल जूस पिएं. या फिर नीचे रखे लिंक पर चटका लगाएं, चटका अपने चौड़े और छिछले माथे पर भी लगाएं ताकि झूठ और प्रोपगेंडा का सार समझना आ जाए. यदि यह लिंक झूठ है तो भास्कर और इंडिया टुडे कैसे सच हो सकता है, इस थ्योरी पर बात करें तो बेहतर होगा…

The widely circulating story "Syrian Girl stoned to death for using Facebook" is fake

http://www.skeptical-science.com/religion/claim-syrian-girl-stoned-death-facebook-fake-story/

युवा प्रतिभाशाली पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट मोहम्मद अनस के फेसबुक वॉल से.

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