महिलाएं भी करती हैं बलात्‍कार : वेद प्रताप वैदिक

इंदौर। लोग सोचते हैं कि महिलाएं ही बलात्कार का शिकार होती हैं मगर यह पूरी तरह सही नहीं है। पुरुषों को भी ऐसे अत्याचार झेलने पड़ते हैं। स्त्रियों द्वारा जबरदस्ती करने के मामले भी सामने आए हैं। दरअसल बलात्कार बलशाली द्वारा निर्बल पर की गई गंभीर हिंसा का मामला है। इससे निपटने के लिए पुरुष और महिलाओं को अलग-अलग नजरिए से देखने के बजाय हमें बलशाली द्वारा निर्बलों पर किए जाने वाले अत्याचार समाप्त करने के ठोस प्रयास करने होंगे।

उक्त विचार वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेदप्रताप वैदिक ने सोमवार शाम इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। जाइंट्स इंटरनेशनल और सेवा सौरभ द्वारा 'महिला उत्पीड़न – कारण और निवारण' विषय पर आयोजित परिचर्चा में उन्होंने कहा कि गैंपरेप जैसी घटनाएं रोकने के लिए सामाजिक, आर्थिक परिस्थितियों में बड़े स्तर पर बदलाव के साथ-साथ लोगों की मनःस्थिति बदलने की भी जरूरत है। इसके लिए बच्चों को शुरू से ही नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। नई पीढ़ी को संवेदनशील बनाकर अपराधों में कमी लाई जा सकती है। इसलिए कानून बना देना ही काफी नहीं है। देश में अभी १७ हजार न्यायाधीश, लोकपाल की भूमिका निभा रहे हैं मगर अपराध नहीं रुक रहे हैं। हजार मामलों में से मात्र १०-१२ में ही दोषी को सजा मिल पाती है। देर से मिला न्याय भी अन्याय के बराबर है। इसलिए न्यायिक व्यवस्था में बदलाव जरूरी है। बलात्कार जैसे मामला की सजा तत्काल देकर अपराधियों में भय का माहौल बनाया जा सकता है।

भारत में स्थिति बेहतर—डॉ. वैदिक ने बताया कि अमेरिका में एक लाख पर २८, स्वीडन में ६३ और ब्रिटेन में २४ लोग बलात्कार का शिकार होते हैं मगर भारत में यह आंकड़ा एक के अंक से जरा सा ही ज्यादा है। इस लिहाज से भारत की स्थिति बेहतर है मगर यह कोई संतोष की बात नहीं है। भ्रष्टाचार, कालाधन और गैंगरेप जैसे मुद्दों पर जनता के घर से निकलकर सड़क पर आने को डॉ. वैदिक ने आंदोलन मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह जनोत्थान है जिसके जरिए जनता अपना स्वाभाविक गुस्सा व्यक्त कर रही थी।
 

२४ में से २२ परिचित-आईजी अनुराधा शंकर ने बताया कि नवंबर में इंदौर में सामने आए २४ में से २२ मामलों में ज्यादती किसी परिचित द्वारा ही की गई थी। ५० प्रतिशत मामले १० साल से छोटी बच्चियों के साथ हुए। गांवों में तो स्थिति और भी खराब है। इंदौर जोन का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि बलात्कार के ७५ फीसदी मामले शहरों की बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में दर्ज किए गए हैं। सुश्री अनुराधा ने कहा कि जो लोग महिलाओं को जीवन में सीता जैसा आदर्श उतारने की शिक्षा दे रहे हैं उन्हें पुरुषों को भी राम बनने की सीख देनी चाहिए। महिला उत्पीड़न की शुरुआत भ्रूण-हत्या से होती है। मां-बाप को बेटियों के साथ भी बेटों जैसी पहचान जोड़नी पड़ेगी।

प्रारंभ में सेवा सौरभ के अध्यक्ष विष्णु गोयल और जायंट्स इंटरनेशनल के अध्यक्ष अभिभाषक पीके शुक्ला ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण कुमार खारीवाल विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन मनीषा गौर ने किया। आभार संजय मित्तल ने व्यक्त किया। समारोह में बड़ी संख्या में अभिभाषक, सेवानिवृत्त न्यायधीश,मीडियाकर्मी एवं समाजसेवी उपस्थित थे।

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