सीबीआई के फर्जी एसपी रजनीश भाई का कथित सरगना अब्दुल मुईज खान एसपी यानी सपा का भी खास था. अब कितना खास था ये तो नहीं पता पर मुईज और सपा के संबंधों में मिठास तो जरूर थी. इतनी मिठास की पूछिए ही मत. शायद इसी मिठास ने उसकी पहुंच पंचम तल पर बना दी थी. कई मौकों अपने मुईज भाई मिठाई का डिब्बा लेकर पहुंच जाते थे. पचास या सौ रुपये का नहीं बल्कि लांखों का. और लगते थे बंटवाने. बेचारे गरीब पत्रकार कुढ़ते थे कि हम काहे नहीं बंटवा पा रहे हैं ऐसा ही मिठाई का डिब्बा ताकि हमारी पहुंच भी पंचम तल से लेकर कालीदास मार्ग तक हो.
ये वो ही वाले अब्दुल मुईज खान हैं जो सपा सुप्रीमो के परिवार से जुड़े किसी मौके पर मिठाई बंटवा देते थे. लाखों का. बिना हिचकिचाए, बिना सकुचाए. लोगों को भी लगता था कि मुईज भाई सपा वालों के खास होंगे तभी तो लाखों का मिठाई बंटवा दिया और कहीं से कोई विरोध नहीं हुआ. मुईज भाई मिठाई बांटने में कोई तकल्लुफ नहीं करते थे. मौका मिला नहीं कि मिठाई बंटवा दिया. और ये मिठाइयां चारबाग स्टेशन पर गरीबों को नहीं बंटती थीं. ये मिठाइयां एनेक्सी या कालीदास मार्ग पर ही बंटती थीं ताकि लोग समझ सकें कि महत्वपूर्ण मौके के लिए कितनी महत्वपूर्ण मिठाइयां हैं.
मुईज भाई इतने ''चालाक'' थे कि सपा सुप्रीमो या उनके परिवार के किसी खास सदस्य को लेकर कोई मौका मिला नहीं लगते से थे मिठाई बंटवाने. वैसे ही जैसे हम लोग अपने बच्चों के जन्मदिन पर सौ-पचास रुपये का लेमनचूस बंटवाने लगते हैं. हमलोग सैलरीजीवी हैं तो इतना ही खर्च कर पाते हैं, मुईज भाई जमीन-मकानकब्जाजीवी हैं तो खर्च का कोई टेंशन नहीं. बताते हैं कि जब सीएम साहब की पत्नी और नेताजी की बहु डिम्पल यादव निर्विरोध सांसद बनी थीं तो सबसे ज्यादा खुशी अपने मुईज भाई को ही हुई थी. उस समय भी ये नाम-पद लिखे गत्तापट्ट यानी मिठाई के डिब्बों में मिठाइयां बंटवा दी थीं.
इस बार भी भाई साहब ने नेताजी के 73वें जन्मदिन पर इतने खुश हुए कि खास-खास जगहों पर मिठाइयां बंटवा डाली. एनेक्सी, कालीदास मार्ग, पंचम तल पर भी शायद. इन मिठाइयों की मिठास का असर इतना हुआ कि इनका कोई काम शासन-प्रशासन स्तर पर तीखा या नमकीन कर पाने की किसी भी अधिकारी की हिम्मत नहीं होती थी. इन्हीं मिठाइयों ने पंचम तल पर सबसे ताकतवर महिला अधिकारी से इनके संबंधों में भी मिठास घोल रखी थीं. पर मुईज भाई ने इतनी ज्यादा मिठाइयां इधर-उधर बांट दी कि आखिर में 'डाइबिटिज' के चक्कर में फंसना पड़ गया. नकली वाले एसपी ने असली वाले एसपी (सपा) के साथ इनके सारे घनचक्करों की कलई खोल दी. बेचारे कोस रहे होंगे उस वक्त को जब वो मुएं असली पत्रकारों से भिड़ गए. और मिठाइयों से कुढ़े-चिढ़े पत्रकारों ने सवारी कर ली.






