उत्तर बिहार के मधुबनी में प्रीति-निशांत प्रेम प्रकरण और उनके फरार होने के बाद हिन्दुस्तान की पक्षपातपूर्ण रिपोर्ट को लेकर सम्पूर्ण मिथिलांचल में हिन्दुस्तान की थू-थू हो रही है। जिला स्तरीय सरकारी अधिकारी जगपत चौधरी की पुत्री प्रीति अपने प्रेमी निशांत के साथ फरार हो गयी थी। निशांत के परिजनों का आरोप था कि उनके बेटे का अपहरण कर लिया गया है और इसके लिए प्रीति के पिता पर आरोप लग रहे थे। इसी बीच एक युवक की सिर कटी लाश बरामद होने और परिवार के सदस्यों द्वारा उसे निशांत का शव बताने के बाद पूरा मधुबनी शहर उबल पड़ा।
धरना-प्रदर्शन और बंद की आग मधुबनी के ग्रामीण क्षेत्र में भी फैल गयी। यहां तक पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी जिसमें दो निर्दोष युवक को जानें गयीं। यह बात अलग है कि शव की शिनाख्त में गलती हुई क्योंकि प्रीति और निशांत को पुलिस ने दिल्ली में सकुशल बरामद कर लिया। पुलिस भी कह रही थी कि बरामद शव निशांत का नहीं है। इस पूरे प्रकरण में हिन्दुस्तान की पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग से मधुबनीवासी बुरी तरह भड़क उठे। जगह-जगह हिन्दुस्तान के विरोध में नारे गूंजे और अखबार की प्रतियां जलायी गयी। मधुबनी जिला हिन्दुस्तान के मुजफ्फरपुर एडिशन के अन्तर्गत पड़ता है। इसकी सूचना अखबार के मुजफ्फरपुर के आरई को दी गयी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब पटना और दिल्ली कार्यालय का दरवाजा खटखटाया गया।
मधुबनी को सुलगता देख राज्य सरकार ने आनन-फानन में वहां के एसपी और डीम को तो तुरंत हटाया ही, रीजनल आईजी भी बलि का बकरा बन गये। बाद में समस्तीपुर में मीडिया से मुखातिब रीजनल आईजी आरके मिश्र ने इस बवंडर के लिए एक मीडिया हाउस को इसके लिए दोषी करार दिया। हिन्दुस्तान के विरूद्ध सुलगी यह आग न केवल मधुबनी बल्कि दरभंगा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और जयनगर तक फैल गयी है। इसका सीधा लाभ मुजफ्फरपुर से प्रकाशित प्रभात खबर को मिल रहा है। हिन्दुस्तान भले ही इन क्षेत्रों में जा रहा है लेकिन अब बिक नहीं रहा है, पाठकों की नजर से दूर हो गया है। मार्केट पर पीके तेजी से कब्जा कर रहा है। मिथिलाचंल बड़ा ही संवेदनशील क्षेत्र है जिसे अपनाता है तो जी भर कर और दुत्कारता है तो ऐसी तैसी कर देता है। हिन्दुस्तान के साथ ऐसा ही हुआ और हो रहा है।
हिन्दुस्तान के आरई के पद पर जब सुकांत आसीन हुए तो मैथिलों ने इस अखबार को सिर आंखों पर बिठाया क्यों वे जनकवि नागार्जुन के पुत्र थे और क्षेत्र के ही मैथिल ब्राह्मण थे। बताते चलें कि मधुबनी ब्यूरो का काम पहले रामानंद सिंह सरीखे वरीय पत्रकार के जिम्मे था। उस वक्त मधुबनी आफिस दरभंगा कार्यालय के अधीन था जिसके ब्यूरो हेड ज्ञानवर्द्धन मिश्र हुआ करते थे। श्री मिश्र ने हिन्दुस्तान को मिथिला का पर्याय बना दिया था। हिन्दुस्तान के जरिये श्री मिश्र की टीम ने जो महत्तम कार्य किये उसे इलाके के लो आज भी याद करते हैं। तब हिन्दुस्तान पटना से छप कर जाता था।
मुजफ्फरपुर एडिशन प्रारंभ होने के बाद रामानंद सिंह को हटा जिले के ही अरूण कुमार नामक मुफस्सिल संवाददाता को ब्यूरो की जिम्मेवारी दे दी गयी। मुख्यालय में बैठे कुछ मठाधीशों की ‘सेवा‘ न कर पाने के कारण इन्हें भी हिन्दुस्तान से मुक्त कर दिया गया। इसके बाद मुजफ्फरपुर जिले के एक प्रखंड संवाददाता रहे मनीष को मधुबनी ब्यूरो की कमान सौंपी गयी। प्रीति-निशांत प्रकरण में हिन्दुस्तान की हुई फजीहत के बाद अब इनके भी पर कतर दिये गये हैं। खबर है कि अब नये ब्यूरो प्रभारी की तलाश हो रही है। बात यहीं तक नहीं दरभंगा कार्यालय के ब्यूरो प्रभारी पर भी गाज गिरनी तय मानी जा रही है। इस प्रकरण में इनकी भूमिका भी संदिग्ध मानी जाती है क्यों रीजनल आईजी, डीआईजी और प्रमंडलीय आयुक्त प्रमंडलीय मुख्यालय दरभंगा में ही बैठते हैं। डिवीजनल हेडक्वार्टर से भी इस मामले में खबर भेजने में कोताही की गयी।
मधुबनी से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.