मीडिया क्षेत्र से भी विधायक-सांसद चुनाव कराने की मांग

 

: ऐपजा की बैठक यशवंत और अनिल के उत्‍पीड़न का मामला भी उठा : मौजूदा पत्रकारिता और पत्रकारों की दुर्दशा से निपटने के लिए फौलादी इरादों के साथ संघर्ष करने के संकल्प का साक्षी बना इलाहाबाद। ‘जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो’ की आवाज बुलंद करने वाले अकबर इलाहाबादी से लेकर कर्मयोद्धा गणेश शंकर विद्यार्थी, कमलेश्‍वर, धर्मवीर भारती, रामबहादुर राय, आशुतोश, प्रताप सोमवंशी सरीखे दिग्गज पत्रकारों के संघर्ष और कर्मभूमि की गवाह, इलाहाबाद की सरजमीं पर पत्रकारों का जुटान हुआ। जिला कचहरी के पास विकास भवन परिसर में आल इंडिया प्रेस जर्नलिस्ट एसोसिएशन (ऐपजा) के सेमिनार में विस्तार से कई मुद्दे उठे तो उनसे निपटने के कई सुझाव भी आए। 
 
खास बात यह रही कि शिक्षक क्षेत्र, स्नातक क्षेत्र की तरह मीडिया क्षेत्र से भी विधायक और सांसद के चुनाव लड़ाने की भी जोरदार तरीके से मांग उठी। तर्क दिया गया कि मीडिया के क्षेत्र से चुनकर पत्रकारों के संसद और विधानसभा पहुंचने से पत्रकारों के उत्पीड़न पर अंकुश लग सकेगा। संस्थान की मनमानी, काम के घंटे, कर्मचारियों की छंटनी, वेतन आयोग की संस्तुति की अनदेखी से लेकर उनकी सुरक्षा समेत तमाम ज्वलंत मुद्दे हैं। इनसे निपटने को सत्ता में दखल जरूरी है। 
 
अनुराग मिश्र सारथी ने कहा कि पत्रकार साथी विभिन्न दलों के प्रतिनिधि बनकर विधान परिषद और राज्यसभा में पहुंचते भी हैं तो वे अपने दल की नीतियों से बंधकर कार्य करने लगते हैं। पत्रकारों और पत्रकारिता से कोई मतलब नहीं रहता। वे पूरी तरह पेशेवर नेता बन जाते हैं। उदाहरण के लिए राजीव शुक्ला, शाहिद सिद्दीकी समेत कई लोगों के नाम लिए गए। एसएस पांडेय ने पत्रकार उत्पीड़न और असंगठित पत्रकारों की दशा का विस्तार से जिक्र करते हुए ऐपजा संगठन से साफ नीति और नीयत से काम करने पर जोर दिया। न्यूज पोर्टल भड़ास4मीडिया के  प्रमुख यशवंत सिंह और अनिल सिंह की गिरफ्तारी और नाजायज उत्पीड़न का जिक्र किया गया। संगठन के प्रदेश महासचिव गिरीश शुक्ल, एसके यादव, वाहिद चिश्‍ती, रजनीश केसरवानी समेत कई पत्रकार साथियों ने विचार रखे।
 
इलाहाबाद से वरिष्‍ठ पत्रकार शिवाशंकर पाण्‍डेय की रिपोर्ट. 

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