मुंबई की झुग्‍गी बस्‍ती के निवेशक सहारा से नाराज

मध्य मुंबई स्थित झुग्गी बस्ती बैगनवाड़ी की एक संकरी गली में भारत के बहु-बिलियन-डॉलर वाले सहारा समूह का स्थानीय कार्यालय ढूंढना मुश्किल है। गौरतलब है कि इस कंपनी के न्यूयॉर्क और लंदन में होटल हैं और एक फॉर्मूला1 रेसिंग टीम भी है। बैगनवाड़ी में नगर निगम के कूड़ेदान से महज़ कुछ किलोमीटर दूर सहारा का एक कमरे वाला ऑफिस एक छोटे, रेडीमेड कपड़े के स्टोर के ऊपर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए, आगंतुक रस्सी थामे, संकरी लोहे की सीढ़ी पर चढ़ते हैं।

इसी जगह से, ऑफिस मैनेजर मोहम्मद राशिद ने 3-4 एजेटों की एक टीम के ज़रिए बैगनवाड़ी के लोगों को हालिया वर्षों में 2.5 मिलियन रूपए (करीब 46,000 डॉलर) के सहारा बॉन्ड बेचे, ऐसा श्री राशिद का कहना है। अब, इनमें से कई लोग, जिनमें हाथों से रिक्शा खींचने वाले और 5000 रूपए (90 डॉलर) से कम मासिक आमदनी वाले फल विक्रेता भी शामिल हैं, धन-वापसी को लेकर चिंतित हैं। वो देशभर के उन 22 मिलियन से ज्यादा लोगों में हैं, जिन्होंने 2008-11 के बीच 3 बिलियन डॉलर से ज्यादा के सहारा बॉन्ड में पैसा लगाया। ये बॉन्ड अब कंपनी और देश के पूंजी बाज़ार नियामकों के बीच विवाद के केन्द्र में हैं।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) कहता है कि सहारा ने इनके निजी स्थापन का दावा करने के बावजूद सीधे लोगों को ये बॉन्ड बेचकर पूंजी बाज़ार के नियमों का उल्लघंन किया है। नियमों के मुताबिक, जब एक कंपनी 50 अथवा उससे ज्यादा लोगों को प्रतिभूति की पेशकश करती है, तो उसे सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में दिए एक आदेश में सेबी के इस विचार को जायज़ ठहराया। कोर्ट ने सहारा को इस महीने तक सेबी में ब्याज़ समेत 3 बिलियन डॉलर जमा कराने के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि नियामक बॉन्डधारकों को उनका पैसा वापस करेगा।

इस महीने की शुरुआत में, सेबी ने कहा कि सहारा ने पैसा जमा नहीं कराया, लिहाज़ा नियामक ने सहारा की बॉन्ड जारी करने वाली दो इकाईयों, सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉर्प और सहारा हाउजिंग इनवेस्टमेंट कॉर्प की सारी परिसंपदा को निरुद्ध कर दिया। सेबी ने सहारा के संस्थापक और देश के सर्वाधिक अमीर कारोबारियों में एक सुब्रत रॉय के बैंक खातों और परिसंपदा को भी निरुद्ध कर दिया। सहारा ने हाल ही में कई अखबारों में विज्ञापन जारी करके कहा कि उसने सारे बॉन्डधारकों को दोबारा पैसे दे दिए हैं। सहारा के एक प्रवक्ता ने सोमवार को इस मुद्दे पर टिप्पणी से इन्कार कर दिया।

बैगनवाड़ी ऑफिस के मैनेजर श्री राशिद ने पिछले हफ्ते एक साक्षात्कार में कहा कि कंपनी ने स्थानीय लोगों से उगाहे 2.5 मिलियन रूपयों में से करीब 60 फीसदी वापस कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि बाकी दूसरी प्रतिभूति में तब्दील कर दिए गए, जिससे धारक सहारा के क्यू-शॉप नामक खुदरा स्टोरों से किराना और बाकी उत्पाद खरीद सकेगें। गौरतलब है कि मुंबई में अब तक ये स्टोर नहीं खुला है। कई बॉन्डधारक कहते हैं कि वे गुस्सा हैं और उन पर इन नई प्रतिभूतियों में निवेश हेतु दबाव डाला गया।

“मैं अपना पैसा वापस चाहता हूं। मैं महंगे किराने का क्या करूंगा?” बैगनवाड़ी में जूतों के बकसुए बनाने वाले 28 वर्षीय सुरेन्द्र कुमार जायसवाल ने कहा। श्री जायसवाल ने कहा कि 2009-2010 में उन्होंने सहारा बॉन्ड में कुल 25,000 रूपए (करीब 460 डॉलर) निवेश किए। वे इस पैसे को अपनी बेटियों, पांच साल की लक्ष्मी और दो साल की वर्षा की पढ़ाई पर खर्च करना चाहते थे।

श्री जायसवाल ने कहा कि सेबी ने कंपनी को निवेशकों को पैसा लौटाने को कहा है, अखबार में ये खबर पढ़कर पिछले साल उन्होंने अपने सहारा सेल्स एजेंट से संपर्क साधा। एजेंट ने उनसे कहा कि उन्हें अपने मौजूदा बॉन्ड को क्यू-शॉप प्रतिभूति में तब्दील करा लेना चाहिए अथवा सेबी से पैसा मिलने के लिए 10 से 15 साल इंतज़ार करना चाहिए, श्री जायसवाल ने बताया।

बैगनवाड़ी की 45 वर्षीय शमीम बानू शेख ने कहा कि उन्हें तो ये भी नहीं बताया गया कि उनके बॉन्ड एक दूसरी प्रतिभूति में तब्दील किए जा रहे हैं। सुश्री शेख इलाके की कई विनिर्माण इकाइयों में फुटकर काम करती हैं और करीब 3,000 रूपया (करीब 55 डॉलर) मासिक कमा लेती हैं। वह कहती हैं कि उन्होंने सहारा बॉन्ड में करीब 24,000 रूपए (440 डॉलर) निवेश किए, लेकिन सितबंर में उन्हें इनकी एवज़ में क्यू-शॉप सर्टिफिकेट दे दिए गए।

उन्होंने कहा कि वे इसे विशिष्ट तौर पर इसलिए विश्वासघातक समझ रही हैं क्योंकि इन बॉन्ड को बेचने वाला एजेंट उन्हीं के इलाके का है। “ऐसा लगता है मानो आपके किसी अपने ने ही आपका गला काट दिया,” सुश्री शेख ने कहा।

श्री राशिद, जिनके एजेंट ने श्री जायसवाल और सुश्री शेख को बॉन्ड बेचे, किसी भी निवेशक को जबरन खुदरा सर्टिफिकेट देने से इन्कार करते हैं। “हमने किसी को भी क्यू-शॉप में निवेश के लिए बाध्य नहीं किया। जब हम पैसे का पुनर्भुगतान कर रहे थे, उन्होंने कहा कि हमें फिलहाल पैसा नहीं चाहिए, लिहाज़ा हमने उन्हें इस योजना में निवेश का सुझाव दिया,” उन्होंने कहा। श्री राशिद ने कहा कि सहारा 34 सालों से अस्तित्व में है और “हमने हमेशा कानून का पालन किया है।” (आईआरटी)

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