राडिया मामला : फोन टैपिंग के रिकार्ड के लिप्‍यंतरण का उच्‍च न्‍यायालय करेगा जांच

नई दिल्ली : सरकार ने आज कारपोरेट घरानों के लिये संपर्क का काम करने वाली नीरा राडिया की राजनीतिकों और टाटा समूह के पूर्व मुखिया रतन टाटा सहित तमाम कारपोरेट प्रमुखों के साथ बातचीत की 5800 टेलीफोन टैपिंग का लिप्यंतरण उच्चतम न्यायालय को सौंप दिया। न्यायालय ने कहा कि इसके विवरण पर गौर करने के बाद अगली कार्रवाई के बारे में निर्णय किया जायेगा। नीरा राडिया के टेलीफोन टैपिंग के अंश मीडिया में लीक होने के बाद देश की राजनीति में उबाल आ गया था। इससे कारपोरेट लॉबींग के स्वरूप और राजनीति पर उसके प्रभाव के तथ्य सामने आये थे।

न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय की खंडपीठ ने टैप की गयी समूची बातचीत के लिप्यंतरण को रिकार्ड पर लेने के बाद कहा, ‘‘हम इन लिफाफों : इनमें लिप्यंतरण रखे हैं: पर गौर करके अगली कार्रवाई के बारे में निर्णय करेंगे।’’ ये लिप्यंतरण 38 सीलबंद लिफाफों में हैं जो पहले पेश किये गये 10 सीलबंद लिफाफों के अतिरिक्त हैं। न्यायालय टाटा समूह के पूर्व अध्यक्ष रतन टाटा की याचिका पर इस समय विचार कर रहा है। रतन टाटा ने 29 नवंबर, 2010 को न्यायालय में याचिका दायर कर नीरा राडिया के साथ बातचीत के टैप किये गये अंश लीक करने की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि टैप की गयी बातचीत के अंश इस तरह से लीक करने से संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त जीने के उन मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है जिसमें निजता का अधिकार भी शामिल है।

गैर सरकारी संगठन सेन्टर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस ने विशुद्ध रूप से निजी स्वरूप वाले अंशों के अलावा टेलीफोन टैपिंग का सारा रिकार्ड सार्वजनिक करने का निर्देश देने का अनुरोध न्यायालय से किया है। उसका कहना है कि इस बातचीत में अवैधता या अपराधिता का संकेत देने वाले तथ्यों की गहराई से जांच की जानी चाहिए। टाटा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतेगी ने टैप के तथ्यों की जांच किसी स्वतंत्र व्यक्ति या दल से कराने के अनुरोध का विरोध किया। केन्द्रीय जांच ब्यूरो की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल हरेन रावल ने भी इस लिप्यंतरण पर गौर करने के लिये कोई अन्य दल नियुक्त करने के आग्रह का विरोध किया। उनका कहना था कि जांच ब्यूरो के दल को ही यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है जो अपना काम करके न्यायालय को रिपोर्ट देगा।

न्यायाधीशों ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि लिप्यंतरण के अवलोकन के बाद यदि बातचीत में किसी भी व्यक्ति की किसी तरह की अपराधिता का पता चले तो वह मामला जांच ब्यूरो के पास भेजा जा सकता है। टाटा का कहना था कि लिप्यंतरण सौंपने से इसके लीक होने का खतरा बना रहेगा और चूंकि यह याचिका सिर्फ निजता के अधिकार से संबंधित है, इसलिए इसे किसी और को नहीं सौंपा जाना चाहिए। न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद इस याचिका पर सुनवाई 22 जनवरी के लिये स्थगित कर दी।

वित्त मंत्रालय को 16 नवंबर, 2007 को मिली एक शिकायत के बाद नीरा राडिया की टेलीफोन बातचीत की निगरानी की गयी थी। इस शिकायत में आरेाप लगाया गया था कि नौ साल की अवधि में नीरा राडिया ने तीन सौ करोड़ का कारोबार खड़ा कर लिया है। सरकार ने कुल 180 दिन नीरा राडिया के टेलीफोन की बातचीत रिकार्ड की थी। पहली बार 20 अगस्त, 2008 से 60 दिन और फिर 19 अक्तूबर से अगले 60 दिन के लिये बातचीत रिकार्ड की गयी थी। इसके बाद नये आदेश पर आठ मई, 2009 से 60 दिन के लिये नीरा के टेलीफोन की बातचीत रिकार्ड की गयी थी। (एजेंसी)

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