लखनऊ में पिछले दो सालों में ऐरे-गैरे भी बन गए हैं मान्‍यता प्राप्‍त पत्रकार

लखनऊ में अजीब हाल है राज्‍य मान्‍यता प्राप्‍त पत्रकार समिति का. पिछले दो सालों से पत्रकारों को मान्‍यता देने वाली प्रेस एकेडेशन समिति का गठन नहीं हुआ है. पिछले दो सालों में चले सारे विवादों के खतम होने के बाद भी शासन स्‍तर से गठित होने वाली इस कमेटी का गठन नहीं किया गया. बताया जा रहा है कि इसी का असर है कि छह मामलों में आरोपी होने के बावजूद अब्‍दुल मुईज खान को मान्‍यता मिल गया. वो भी बिना एलआईयू जांच के. अगर कमेटी होती तो शायद इस कथित पत्रकार को मान्‍यता मिलना इतना आसान नहीं होता.

राज्‍य मान्‍यता प्राप्‍त संवाददाता समिति का चुनाव बीते 12 अगस्‍त को सम्‍पन्‍न हो चुका है. जिसमें हेमन्‍त तिवारी अध्‍यक्ष एवं सिद्धार्थ कलहंस महामंत्री निवार्चित किए जा चुके हैं. बताया जा रहा है कि चुनाव जीतने के बाद नई समिति के पदाधिकारी तत्‍कालीन सूचना निदेशक अमृत अभिजात को मौखिक और लिखित रूप से नई प्रेस एकेडेशन समिति का गठन करने की अपील की. परन्‍तु अमृत अभिजात ने इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया, जिससे इस समिति का गठन नहीं हो सका और मनमाने ढंग से ऐसे वैसे लोगों को मान्‍यता दे दी गई, जिनका पत्रकारिता से कोई वास्‍ता नहीं था.

सूत्रों का कहना है कि सूचना विभाग के कई कर्मचारी तो अपने नाते रिश्‍तेदारों को मान्‍यता प्राप्‍त पत्रकार बनवा चुके हैं. वहीं आरोप यह भी है कि कुछ लोगों को पैसे लेकर मान्‍यता प्राप्‍त पत्रकार का कार्ड बांट दिया गया. अब जब अब्‍दुल मुईज खान का मामला सामने आया है तो सभी अधिकारी बचते फिर रहे हैं. बताया जा रहा है इस प्रकरण के बाद मान्‍यता प्राप्‍त संवाददाता समिति पर आंच आने से नाराज अध्‍यक्ष हेमंत तिवारी, महासचिव सिद्धार्थ कलहंस, उपाध्‍यक्ष सतवीर सिंह, नरेंद्र श्रीवास्‍तव समेत 15 सदस्‍यों का डेलीगेशन डाइरेक्‍टर इनफारमेंशन प्रभात मित्‍तल से मिला तथा उन्‍हें इन बातों से अवगत कराया. बताया जा रहा है कि समिति से मिलने के बाद प्रभात मित्‍तल ने इस मामले की समीक्षा करने के साथ ही पूरे मामले की जांच करने पर विचार करने का आश्‍वासन दिया है. 

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