लूट का खेल : आईएनएस से कैंसिल एजेंसी को सूचना विभाग ने थमाए लाखों के विज्ञापन

 

देहरादून। उत्तराखण्ड के सूचना विभाग में घोटालो की परतें उधड़नी शुरू हो गई हैं। वहीं अधिकारियों की आंखो में धूल झोंककर प्रदेश सरकार की छवि को धूमिल करने का ताना बाना बुना जाना शुरू कर दिया गया है। बीते 15 नवम्बर को उत्तराखण्ड के सूचना विभाग द्वारा 11 समाचार पत्रों को राजीव गांधी अन्तरराष्‍ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम एवं स्पोर्टस काम्प्लैक्स के शिलान्यास कार्यक्रम पर 858 वर्ग सेन्टीमीटर विज्ञापन जारी किया गया था, लेकिन सूचना विभाग में पंजीकृत टैल ब्लेजर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड देहरादून को जिस तरह कैन्सिल होने के बाद भी विज्ञापन जारी किया गया, उसने मुख्यमंत्री की छवि को भी बट्टा लगाने का काम कर दिया है। 
 
इन्डियन न्यूज पेपर सोसाइटी (आइएनएस) द्वारा बीते 5 नवम्बर 2012 को टेल ब्लेजर को कैन्सिल करते हुए उसका आइएनएस से एक्रीडेशन समाप्त कर दिया गया है और उत्तराखण्ड का सूचना विभाग राज्य सरकार के विज्ञापन 14 नवम्बर 2012 को इसी एजेन्सी को मोटा खेल खेलकर देने में लगा रहा। ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हुआ हो, इससे पहले भी सूचना विभाग में पंजीकृत न्यूज ऐजेन्सियों को कैन्सिल होने के बाद भी विज्ञापन बांटे गए हैं। सूचना विभाग के शिखंडियों की इस करतूत से सीएम की छवि को भी बट्टा लगाने का काम किया जा रहा है और सूचना विभाग के महानिदेशक को भी इस मामले में अंधेरे में रखकर इसे अंजाम दिया गया है। जिस तरह से उत्तराखण्ड के सूचना विभाग में पत्रकारों को बांटने का खेल खेला गया उसी का परिणाम रहा कि टिहरी का उपचुनाव प्रदेश के मुख्यमंत्री के बेटे साकेत बहुगुणा को हारना पड़ा। 
 
 
आगामी कुछ महीनो में ही पंचायत व निकाय के चुनाव सम्पन्न होने हैं लेकिन यदि इसी तरह सूचना विभाग के शिखंडियों पर मुख्यमंत्री द्वारा कार्यवाही नहीं की गई तो यह सरकार की छवि को भी बट्टा लगाने का काम कर सकते हैं। सूचना विभाग में तैनात एक अधिकारी को कैबिनेट मंत्री इन्दिरा हदयेश का करीबी माना जाता है और सूत्र बताते हैं कि उन्हीं के इशारे पर सरकार की छवि को धूमिल करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। उत्तराखंड में राजनैतिक गुटबाजी तेज होने के कारण नेता एक दूसरे की टांग खिंचाई में लगे हैं लेकिन सूचना विभाग में जिस तरह कैन्सिल एजेन्सी को विज्ञापन बांटे गए हैं उससे विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। सूचना विभाग के महानिदेशक दिलीप जावलकर से जब इस बारे में बात की गई तो उन्‍होंने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है और यदि कैन्सिल की गई एजेन्सी को सूचना विभाग द्वारा विज्ञापन जारी किए गए हैं तो उसका भुगतान रोककर कार्यवाही की जाएगी और इसमें दोषी अधिकारियों को भी दंडित किया जाएगा। 
 
देहरादून से नारायण परगांई की रिपोर्ट. 

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