”वेबसाइटों पर निगरानी के लिए नियामक इकाई बने”

 

हैदराबाद : साइबर सुरक्षा से जुड़े एक विशेषज्ञ ने कहा है कि आपत्तिजनक सामग्री के चलते वेबसाइटों पर पूरी तरह रोक लगाने की बजाय ऐसा नियामक तंत्र और कानून बनाना बेहतर रहेगा जिससे कि वेबसाइट तेजी से सरकार को जवाब दे सकें. जाने माने कंप्यूटर सुरक्षा विशेषज्ञ और ऐथकल हैकर अंकित फ़ादिया ने कहा, ‘‘मैं लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों को पूरी तरह रोके जाने का समर्थन नहीं करता. अवैध सामग्री के संबंध में सरकार को नियामक प्राधिकरण की स्थापना करनी चाहिए जो इन सभी विभिन्न वेबसाइटों के साथ घनिष्ठता से काम करेगा. जब भी कुछ अनुचित सामग्री पोस्ट की जाएगी, उसे हटा दिया जाएगा.’’
 
उन्होंने कहा कि नियामक तंत्र व्यापक होना चाहिए जिसमें केवल सरकारी प्रतिनिधियों का एकाधिकार नहीं हो. फ़ादिया ने कहा, ‘‘यदि सरकार ऐसा नियामक प्राधिकरण बनाती है जिसमें केवल सरकारी सदस्य शामिल हों तो जनता इसे पसंद नहीं करेगी. इसमें विभिन्न तबकों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए. इसमें एक कानूनी विशेषज्ञ, एक तकनीकी विशेषज्ञ होना चाहिए. युवा, पुलिस तथा सरकार का प्रतिनिधित्व होना चाहिए. यह एक मनोनीत समिति हो सकती है और यह प्रत्येक दो या चार साल में बदल सकती है.’’ उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान में नहीं है तो एक ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए जिससे कि वेबसाइट सरकार को तेजी से जवाब देने के लिए बाध्य हो सकें. (प्रभात खबर)

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