सरकारी सेवकों को आलोचना का अधिकार मिले : आईपीएस अमिताभ ठाकुर

: सरकारी सेवा नियमावलियों में बदलाव के लिए प्रत्यावेदन : मुझ अमिताभ ठाकुर, आईपीएस, यूपी कैडर, ने अपनी व्यक्तिगत हैसियत से सचिव, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार को एक प्रत्यावेदन दे कर विभिन्न सेवाओं की आचरण नियमावलियों में कुछ संशोधन किये जाने का निवेदन किया है. मैंने ये सुझाव वर्तमान में कई अधिकारियों की  व्हिसलब्लोवर कार्यों की पृष्ठभूमि में दिये हैं

हमारे देश में लगभग सभी सरकारी सेवाओं के लिए आचरण नियमावलियां हैं, जैसे केन्द्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियमावली, 1964, अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमावली 1968 आदि. इनमे लगभग सभी नियमावलियां प्रेस या मीडिया से संपर्क करने तथा सरकार की आलोचना करने को प्रतिबंधित करते हैं. मैंने कहा है कि इस प्रतिबन्ध का अपना महत्त्व है क्योंकि सरकारी सेवक कई महत्वपूर्ण शासकीय जानकारी रखते हैं लेकिन इसके साथ ही बदलते समय में इन प्रतिबंधों में बदलाव की भी जरूरत है.

मैंने सुझाव दिया है कि आरटीआई एक्ट के होने तथा व्हिसलब्लोवर्स एक्ट के आने की दृष्टि से मौजूदा समय में यह सेवा आचरण नियमावलियों में इस प्रकार परिवर्तन आवश्यक प्रतीत होता है कि सरकारी सेवक को अपने वरिष्ठ अधिकारियों, मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों आदि के गलत कार्यों तथा आदेशों की मीडिया के जरिये आलोचना करने का अधिकार हो. इसी प्रकार से व्यापक जनहित में उन शासकीय कार्यों तथा नियमों की आलोचना करने का भी अधिकार सरकारी कर्मियों को हो जिनमे वित्तीय भ्रष्टाचार, भेदभाव, गलत उद्देश्य आदि निहित हों.

मैंने यह निवेदन किया है कि चूँकि मीडिया की अपनी ताकत होती है, अतः यदि सरकारी कर्मियों को भी जनहित में गलत आदेशों एवं कार्यों का विरोध करने के लिए इसका प्रयोग करने का अधिकार मिलेगा तो इसके बहुत सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं.

अमिताभ ठाकुर

आईपीएस

लखनऊ

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