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सहारा समय में फर्जी मार्कशीट से बन गया गंजबसोदा काका संवाददाता

क्या आप सोच सकते हैं कि सहारा समय जैसे संस्थान में कोई फर्जी मार्कशीट के सहारे पत्रकार बन सकता है। लेकिन सच्चाई है यह। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के गंजबासोदा में जफर मोहम्मद कुरेशी ने बीकाम थ्री की फर्जी मार्क शीट के सहारे संवाददाता बनने में सफलता हासिल कर ली। जफर लगभग 8 वर्षों से गंजबासोदा में संवाददाता हैं। अब पत्रकारिता के नाम पर इनका काम भी सुन लीजिये। ये जनाब गंजबासोदा में सरकारी उचित मूल्य की दुकानें संचालित करते हैं ओर खाद्यान की काला बाजारी करते हैं। सहारा समय न्यूज़ चैनल इनकी रक्षा का शस्त्र है पत्रकारिता का नहीं।

क्या आप सोच सकते हैं कि सहारा समय जैसे संस्थान में कोई फर्जी मार्कशीट के सहारे पत्रकार बन सकता है। लेकिन सच्चाई है यह। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के गंजबासोदा में जफर मोहम्मद कुरेशी ने बीकाम थ्री की फर्जी मार्क शीट के सहारे संवाददाता बनने में सफलता हासिल कर ली। जफर लगभग 8 वर्षों से गंजबासोदा में संवाददाता हैं। अब पत्रकारिता के नाम पर इनका काम भी सुन लीजिये। ये जनाब गंजबासोदा में सरकारी उचित मूल्य की दुकानें संचालित करते हैं ओर खाद्यान की काला बाजारी करते हैं। सहारा समय न्यूज़ चैनल इनकी रक्षा का शस्त्र है पत्रकारिता का नहीं।

इसकी पुष्टि विदिशा जिला प्रशासन के खाद्य विभाग और गंजबासोदा की पीड़ित गरीब जनता से की जा सकती है। सहारा समय की वजह से प्रशासन भी इनसे कुछ बोल नहीं पाता है। इनके दो सगे भाई रायसेन जिले में पत्रकार हैं। एक जुबेर कुरैशी सहारा समय के पत्रकार हैं (इनकी भी मार्क शीट फर्जी है)। दूसरे अजहर कुरैशी ईटीवी के पत्रकार हैं। इनके भी कारोबार पत्रकारिता की आड़ में सरकारी उचित मूल्य की दुकानें संचालित करने का ही है। और प्रशासन यहाँ भी चैनलों की वजह से इनसे कुछ नहीं कह पाता है।

मार्क शीट की सच्चाई कैसे उजागर हुई? : बासोदा से की गई शिकायत के आधार पर सहारा समय के वकील ने जफर कुरैशी को नोटिस दिया तथा भोपाल बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी से मार्क शीट वेरिफिकेसन करवाया। यूनिवर्सिटी ने मार्क शीट वेरिफिकेशन की लिखित सूचना सहारा समय कोओर्ड़ीनेटर सी2-सी3-सी4 सेक्टर-11 नोयडा को पत्र क्रमांक 1774 दिनांक 06.02.2012 को भेज दी। लेकिन इन पत्रकारों के हितैशी मनोज मनु ने अपने ही स्तर पर मामले को दबा दिया। और ये पत्रकार चैनल की आड़ में ना सिर्फ गरीबों का मिलने वाला खाद्यान कालाबाजारी में बेचकर उनका शोषण कर रहे हैं। प्रशासन पर भी दबाव बनाकर रखते हैं। हालांकि हाल ही में शिकायत के आधार पर कलेक्टर ने इनकी सरकारी उचित मूल्य की दुकानें निरस्त कर दी है। जहां ईटीवी के स्टेट हेड विनोद तिवारी की सिफारिश भी काम नहीं आई। हो सकता है भड़ास में पढ़कर सहारा समय के वारिष्ठ अधिकारी इस पर ध्यान देकर इन पत्रकारों की जांच कराकर इन्हें हटाने की कार्यवाही कर पत्रकारिता को कलंकित होने से बचाएंगे और अपने सहारा समय की शाख को भी। 

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