सुप्रीम कोर्ट के आदेश एवं सेबी की जांच से ऊपर है सहारा समूह!

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सहारा अपनी देनदारी से बचने के लिए निवेशको के लिए अखबारों और मीडिया के माध्यम से बड़े बड़े विज्ञापन निकाल कर अपनी साख बचाने में लगा हुआ है। इस केस में पूर्व में हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को निवेशको के पैसे सेबी के माध्यम से लौटने के आदेश दिए थे, सहारा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को धत्ता बताते हुए कोर्ट में अपनी लड़ाई जा रखी। सेबी बनाम सहारा मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 13 फ़रवरी को सहारा के खातों और उनके चार बड़े अधिकारियों के खातों को सीज करते हुए लेन देन पर रोक लगा दी थी।

अब सहारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गलत बताते हुए सेबी से ही धन वसूली की बात कह रहा है, इसके लिए सहारा ने देश भर के अखबारों में बड़े बड़े विज्ञापन निकाल कर अपने को पाक साफ़ बताने की कोशिश की है। सवाल ये है कि सहारा के ये विज्ञापन क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गलत साबित करने के लिए निकाले गए है, या सहारा सुप्रीम कोर्ट और सेबी को झूठा साबित करने की कोशिश में लगा हुआ है।

आज निकाले गए विज्ञापन में सहारा ने अपनी दो कंपनियों का जिक्र करते हुए कहा की मेसर्स सहारा इंडिया रियल इस्टेट कार्पोर्रेशन लिमिटेड और मेसर्स सहारा इंडिया इन्वेस्टमेंट कारर्पोरेशन लिमिटेड की बकाया ओएफसीडी देनदारी को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। जहा सेबी निवेशको की कुल देनदारी 25,781.32 बता रहा है वहीं सहारा का कहना है कि उसने 22,117.39 करोड़ की धनराशि निवेशकों को लौटा चुकी है। सहारा ने इस विज्ञापन का सहारा लेकर ये भी प्रकाशित किया है कि उसके ऊपर कुल 3, 663.93 करोड़ की देनदारी बकाया है। इस वजह से निवेशकों को सहारा इंडिया पर विश्वास करना चाहिए।

सहारा सेबी को ही झूठा साबित करने में लगा है। उसका इस विज्ञापन के माध्यम से ये भी कहना है कि उसने अभी तक कोर्ट के आदेश और सेबी में मिली शिकायतों को ध्यान में रखकर उसने 5120 करोड़ रुपये सेबी में जमा किये हैं, उन जमा रुपयों के सापेक्ष अब सहारा को सेबी को कुछ नहीं देना है, उलटे सहारा ही सेबी से बहुत जल्दी बहुत बड़ी धनराशि पाने का हक़दार है। सहारा ये भी लिखता है कि सहारा इंडिया से सम्बंधित इन दोनों कंपनियों की सम्पतियों के गिरवी होने से सम्बंधित खबरें गलत और भ्रामक हैं।

सहारा ने आज देश के प्रमुख अखबारों में इन विज्ञापनों को छापकर अपने को सही और सेबी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गलत साबित करने की कोशिश की है। जबकि सहारा की कार्यशैली पर नज़र रखने वालों का मानना है कि सहारा अब अपने नए स्कीम सहारा क्यू शाप में निवेशकों से पैसे इन्वेस्ट करा रहा है। सहारा की कार्यशैली भी पुरानी रही है। आज कोर्ट केस और सेबी के मामले में उलझने के बाद सहारा और उसके कर्ताधर्ता इस मामले से निकलने के लिए रोजाना नए पैतरें इस्तेमाल कर रहे हैं। आने वाले दिनों में देखना ये है कि कोर्ट और सेबी इस विज्ञापन को कैसे लेते हैं।

पीटी के लिए शितांशुपति त्रिपाठी की रिपोर्ट.

संबंधित अन्य खबरों-विश्लेषणों के लिए यहां क्लिक करें- sebi sahara

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *