सुभारती चैनल : हाथ मिलाना, साथ खाना या मिलना… और गयी नौकरी!

मेरठ के एकमात्र सेटेलाईट न्यूज चैनल सुभारती को लेकर कुछ दिन पहले एक खबर भड़ास पर पब्लिश हुई थी। इसमें कहा गया था कि चैनल हैड नीरज शर्मा ने सुभारती ज्वाइन करते ही पुराने लोगों को कुछ न कुछ इल्ज़ाम लगाकर निकालने की मुहिम छेड़ी हुई है। उनके निकालने से तो कर्मचारी नहीं गये लेकिन अपनी साख को बचाने के लिए लोगों को सुभारती छोड़ना पड़ा था।

अब फिर से एक ऐसी घटना सुभारती में दोहराई जा रही है जो सुभारती चैनल के मानस रंजन और प्रोडयूसर नदीम मिर्जा को लेकर थी। उनका दोष सिर्फ इतना था कि वो अपने व्यक्तिगत कारणों से सुभारती को छोड़कर गए स्टाफ से कभी-कभी मिल लेते थे इसलिए उनको चैनल की फुटेज चोरी करने का आरोप लगाकर सुभारती चैनल हेड नीरज शर्मा और निरीक्षक विजय भोला ने साठंगांठ करके उनके लिए एक सस्पेंशन आर्डर जारी कर दिया.

किन्तु उनका यह कारनामा नाकाम रहा और इन्क्वायरी कमेटी ने उन्हें चैनल की पॉलिसी के अनुसार निर्दोष पाया… लेकिन अपनी इज्जत बचाने की खातिर वो लोग सुभारती को अलविदा कहने पर मजबूर हो गए क्योंकि अपनी लाइफ के पांच से भी अधिक साल सुभारती को देने वाले मानस की हालत सुभारती चैनल में एक अटेन्डेन्ट से भी गयी गुज़री कर दी गयी थी. मानस को अपना बेटा कहने वाली मुक्ति भटनागर (चैनल मालिक) ने एक नहीं सुनी…. तो ऐसी परिस्थिती में चैनल को अलविदा कहना उनके लिए जरूरी था.

मानस जी की इस हालत को देखते हुए चैनल में नियुक्त पी.सी.आर कर्मचारी ताहिर खान और राज कुमार नागर ने भी अपना त्यागपत्र दे दिया कि कभी उनको भी किसी जाल में ना फंसाया जाए. दोनो लोगों के त्यागपत्र देने के बाद से ही नीरज ने साख बचाने को त्याग-पत्र मंजूर नहीं कर रहे. चैनल के सितारे तो काफी समय से खराब चल रहे हैं. (कानाफूसी)

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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