सेबी ने कहा – सहारा समूह के दबाव में न आएं निवेशक

पूंजी बाजार नियामक सेबी ने सहारा समूह की दो कंपनियों के निवेशकों को सलाह दी है कि वे सहारा अथवा उसके एजेंटों के किसी प्रकार के दबाव में नहीं आयें। सेबी ने सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कार्प लिमिटेड (एसआईआरईसीएल) और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कार्प लिमिटेड (एसएचआईसीएल) के निवेशकों को सलाह दी है कि उनके निवेश को समूह की दूसरी कंपनियों में लगाने के सहारा अथवा उसके एजेंटों के दबाव में नहीं आएं।

उच्चतम न्यायालय ने अगस्त में सहारा समूह की इन दोनों कपंनियों को निवेशकों से जुटाए गए 24,000 करोड़ रुपए की राशि 15 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ तीन महीने के भीतर लौटाने का आदेश दिया था। कंपनियों ने नियमों का उल्लंघन कर पूंजी बाजार से यह धन जुटाया।
 
उच्चतम न्यायालय ने सहारा की कंपनियों को निवेशकों से संबंधित सभी दस्तावेज बाजार नियामक सेबी को सौंपने का भी आदेश दिया था। सेबी ने इस संबंध में जारी एक सार्वजनिक सूचना में कहा है कि उसे निवेशकों से इस तरह की कई शिकायतें मिल रही है कि उन पर सहारा समूह की तरफ से समूह की दूसरी कंपनियों में निवेश बदलने के लिए दबाव डाला जा रहा है। सेबी की सार्वजनिक सूचना में कहा गया है दबाव में नहीं आएं, भ्रमित नहीं हों। सेबी ने निवेशकों से कहा है बांड में किए गए अपने मौजूदा निवेश को किसी अन्य योजना में बदलने के सहारा अथवा उनके एजेंट, किसी भी व्यक्ति के दबाव में नहीं आएं।
 
उच्चतम न्यायालय ने सहारा समूह द्वारा आदेश का पालन नहीं करने पर सेबी को सेबी कानून के तहत कारवाई करने को कहा है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि यदि एसआईआरईसीएल और एसएचआईसीएल निवेशकों का धन लौटाने में असफल रहती हैं तो सेबी उनकी संपत्तियां कुर्क कर सकता है और कंपनियों के बैंक खातों पर रोक लगा सकता है। सहारा समूह ने माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार निवेश से संबंधित दस्तावेज सेबी को नहीं सौंपे हैं। सेबी को निवेशकों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं, उन पर सहारा की तरफ से उनके एजेंट और अधिकारियों की तरफ से उनके निवेशक को समूह की अन्य कंपनियों जैसे क्यू शॉप यूनिक प्राडक्टस रेंज लि सहारा क्रेडिट कॉआपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, जैसी कंपनियों में बदलने को दबाव बनाया जा रहा है।
 
सेबी के नोटिस में कहा गया है कि कुछ निवेशकों ने शिकायत की है कि उनके निवेश को सहारा समूह की दूसरी कंपनियों में बिना उनकी सहमति के ही परिवर्तित कर दिया गया है। उच्चतम न्यायालय ने अगस्त में एसआईआरईसीएल और एसएचआईसीएल को यह भी कहा था कि 13 मार्च, 2008 और 10 अक्टूबर, 2009 को जारी दस्तावेज के जरिए उन्होंने जो राशि जुटाई है उसे राशि मिलने के दिन से लेकर लौटाने की तिथि तक सालाना 15 प्रतिशत ब्याज दर के साथ रिफंड करें। ज्ञात रहे कि करीब एक माह पूर्व ही चोरों ने इस कार्यालय के साथ लगते एक स्टोक ब्रोकर के कार्यालय का ताला तोड़कर वहां से कंप्यूटर सैट चोरी कर लिया था। इससे पूर्व भी समाचार पत्रों के स्थानीय कार्यालय भी चोरों के निशाने पर रहे है। (एजेंसी)

 

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